{"_id":"5a1093314f1c1b3c3d8b85e3","slug":"201511035697-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निकाय चुनाव में बिक्री पर जीएसटी की नजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निकाय चुनाव में बिक्री पर जीएसटी की नजर
Updated Sun, 19 Nov 2017 01:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निकाय चुनाव में बिक्री पर जीएसटी की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की टीम निकाय चुनाव से संबंधित बिक्री पर नजर रखेगी। प्रशासन को दी जाने वाली खर्च की लिस्ट से दुकानदारों की बिक्री का मिलान किया जाएगा।
निकाय चुनाव में रैलियां और जनसभाएं आदि हो रही हैं। इनमें बैनर, पोस्टर, वाहनों, टेंट और पंडाल का खूब इस्तेमाल किया जाता है। प्रत्याशियों की ओर से पेपर स्टेशनरी, पैक्ड भोजन, स्नैक्स, पानी, ऑटोमोबाइल, होटल रेस्टोरेंट एंड कैटरिंग का भी व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। लिहाजा प्रत्याशियों की ओर से मंगाए गए माल की सूची लेकर इन कारोबार से संबंधित डीलरों की सघन जांच करने की योजना है।
रैलियों के लिए जिलाधिकारी कार्यालय से अनुमति ली जाती है। विभिन्न आयोजन स्थलों की सूची जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर वहां इस्तेमाल की गई चीजों पर देय टैक्स की वसूली रेट लिस्ट के आधार पर सुनिश्चित हो, लिहाजा स्टेट जीएसटी की टीमें सक्रिय हो गई हैं। इस संबंध में राज्य जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर एकेराय ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो खरीद हो रही है वो जीएसटी वाला बिल दे रहा है या नहीं। डीलर पंजीकृत है या अपंजीकृत। निकाय चुनाव में प्रत्याशी जिलाधिकारी कार्यालय में खर्च का ब्योरा भेजते हैं। उनसे संपर्क करके जानकारी की जाएगी।
विज्ञापन
खास बात
प्रशासन को दी जाने खर्च की लिस्ट से किया जाएगा मिलान
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की टीम निकाय चुनाव से संबंधित बिक्री पर नजर रखेगी। प्रशासन को दी जाने वाली खर्च की लिस्ट से दुकानदारों की बिक्री का मिलान किया जाएगा।
निकाय चुनाव में रैलियां और जनसभाएं आदि हो रही हैं। इनमें बैनर, पोस्टर, वाहनों, टेंट और पंडाल का खूब इस्तेमाल किया जाता है। प्रत्याशियों की ओर से पेपर स्टेशनरी, पैक्ड भोजन, स्नैक्स, पानी, ऑटोमोबाइल, होटल रेस्टोरेंट एंड कैटरिंग का भी व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। लिहाजा प्रत्याशियों की ओर से मंगाए गए माल की सूची लेकर इन कारोबार से संबंधित डीलरों की सघन जांच करने की योजना है।
विज्ञापन
रैलियों के लिए जिलाधिकारी कार्यालय से अनुमति ली जाती है। विभिन्न आयोजन स्थलों की सूची जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर वहां इस्तेमाल की गई चीजों पर देय टैक्स की वसूली रेट लिस्ट के आधार पर सुनिश्चित हो, लिहाजा स्टेट जीएसटी की टीमें सक्रिय हो गई हैं। इस संबंध में राज्य जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर एकेराय ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो खरीद हो रही है वो जीएसटी वाला बिल दे रहा है या नहीं। डीलर पंजीकृत है या अपंजीकृत। निकाय चुनाव में प्रत्याशी जिलाधिकारी कार्यालय में खर्च का ब्योरा भेजते हैं। उनसे संपर्क करके जानकारी की जाएगी।
विज्ञापन
खास बात
प्रशासन को दी जाने खर्च की लिस्ट से किया जाएगा मिलान