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कैंपस के डाकघर से मिले पुराने पते वाले लिफाफों पर उठे सवाल
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कैंपस के डाकघर से मिले पुराने पते लिखे लिफाफे
- एलएलबी की मार्कशीट लेने आए छात्रों को लिफाफे मिलने के बाद खुलासा
- गोपनीय विभाग और डाकघर के कर्मचारियों की हो सकती है मिलीभगत
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू कैंपस के डाकघर में प्रमाण पत्रों केलिए दिए जाने वाले लिफाफों पर पुराने पते लिखे होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल खड़े हो गए हैं कि यह लिफाफे किन छात्रों के थे, उनकेप्रमाण पत्रों का क्या हुआ। पूरे मामले में डिप्टी रजिस्ट्रार ने जांच के आदेश दिए हैं।
सीसीएसयू कैंपस में आजकल प्रमाण पत्र बनवाने केलिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। इसमें छात्र-छात्राओं को मार्कशीट, डिग्री के अलावा जो अन्य प्रमाण पत्र बनवाने होते हैं, उनकी फीस कैंपस स्थित इलाहाबाद बैंक के काउंटर पर जमा होती है। यहां से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फॉर्म मिलता है। जिसमें दी गई जानकारी भरने के बाद छात्र कैंपस के डाकघर से लिफाफा लेकर उसे फॉर्म केसाथ जमा कर देते हैं। जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रमाण पत्र बनने के बाद उसे छात्र द्वारा जमा किए गए लिफाफे में रखकर भेज देती है। सोमवार को दिल्ली से आलोक गुप्ता एलएलबी थर्ड और सिक्स सेमेस्टर की मार्कशीट बनवाने केलिए आए थे। उन्होंने डाकघर से तीन लिफाफे लिए, लेकिन उन पर सफेद कागज चिपका देखकर छात्रों ने जानकारी ली तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सफेद कागजों के नीचे दूसरे पते लिखे हुए थे।
पहले से उठते रहे हैं सवाल
इस पूरे मामले में बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पहले छात्र कई बार आरोप लगा चुके हैं कि गोपनीय विभाग में कार्यरत कुछ कर्मचारी लिफाफों से प्रमाण पत्र अलग करकेलिफाफों को वापस डाकघर भेज देते हैं। जिसके कारण छात्रों केप्रमाण पत्र उनके घर नहीं पहुंच पाते हैं। अब लिफाफों से सफेद कागज हटाए जाने के बाद उसकेनीचे लिखे दूसरे पते से यह बात साफ हो गई है। ऐसे में इसके पीछे कहीं कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं है, यह जांच का विषय बन गया है।
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जांच कराई जाएगी
पूरा मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच कराई जा रही है। अगर ऐसा सामने आया तो इस रैकेट में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - वीपी कौशल, डिप्टी रजिस्ट्रार सीसीएसयू
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- एलएलबी की मार्कशीट लेने आए छात्रों को लिफाफे मिलने के बाद खुलासा
- गोपनीय विभाग और डाकघर के कर्मचारियों की हो सकती है मिलीभगत
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू कैंपस के डाकघर में प्रमाण पत्रों केलिए दिए जाने वाले लिफाफों पर पुराने पते लिखे होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल खड़े हो गए हैं कि यह लिफाफे किन छात्रों के थे, उनकेप्रमाण पत्रों का क्या हुआ। पूरे मामले में डिप्टी रजिस्ट्रार ने जांच के आदेश दिए हैं।
सीसीएसयू कैंपस में आजकल प्रमाण पत्र बनवाने केलिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। इसमें छात्र-छात्राओं को मार्कशीट, डिग्री के अलावा जो अन्य प्रमाण पत्र बनवाने होते हैं, उनकी फीस कैंपस स्थित इलाहाबाद बैंक के काउंटर पर जमा होती है। यहां से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फॉर्म मिलता है। जिसमें दी गई जानकारी भरने के बाद छात्र कैंपस के डाकघर से लिफाफा लेकर उसे फॉर्म केसाथ जमा कर देते हैं। जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रमाण पत्र बनने के बाद उसे छात्र द्वारा जमा किए गए लिफाफे में रखकर भेज देती है। सोमवार को दिल्ली से आलोक गुप्ता एलएलबी थर्ड और सिक्स सेमेस्टर की मार्कशीट बनवाने केलिए आए थे। उन्होंने डाकघर से तीन लिफाफे लिए, लेकिन उन पर सफेद कागज चिपका देखकर छात्रों ने जानकारी ली तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सफेद कागजों के नीचे दूसरे पते लिखे हुए थे।
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पहले से उठते रहे हैं सवाल
इस पूरे मामले में बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पहले छात्र कई बार आरोप लगा चुके हैं कि गोपनीय विभाग में कार्यरत कुछ कर्मचारी लिफाफों से प्रमाण पत्र अलग करकेलिफाफों को वापस डाकघर भेज देते हैं। जिसके कारण छात्रों केप्रमाण पत्र उनके घर नहीं पहुंच पाते हैं। अब लिफाफों से सफेद कागज हटाए जाने के बाद उसकेनीचे लिखे दूसरे पते से यह बात साफ हो गई है। ऐसे में इसके पीछे कहीं कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं है, यह जांच का विषय बन गया है।
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जांच कराई जाएगी
पूरा मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच कराई जा रही है। अगर ऐसा सामने आया तो इस रैकेट में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - वीपी कौशल, डिप्टी रजिस्ट्रार सीसीएसयू