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चालान छुड़ाने पर भी वाहन ब्लैक लिस्टेड
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चालान छुड़ाने पर भी वाहन ब्लैक लिस्टेड
राजदीप जाखड़
मेरठ। परिवहन विभाग ने भले ही वाहन और सारथी सॉफ्टवेयर के जरिये लोगों की समस्याएं खत्म कर सुविधा देने में सफलता पाई हो, लेकिन अभी भी कुछ मामलों में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। कामर्शियल वाहन स्वामियों को दूसरे राज्यों में होने वाले चालान का जुर्माना भरने के बाद भी वाहन के ब्लैक लिस्टेड होने की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में उनके वाहनों की न तो फिटनेस हो पाती है और न ही परमिट आदि का नवीनीकरण। ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि कटे चालान का जुर्माना कहीं भी भरने की सुविधा प्रदान की जाए।
परिवहन विभाग के नियमानुसार वाहन का जिस जिले या राज्य में चालान कटता है, उसके मालिक को वह चालान वहीं पर भरना पड़ता है। चालान नहीं भरने पर उक्त वाहन ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है। उसका पूरा ब्यौरा परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर पर डाल दिया जाता है। ऐसे में उक्त वाहन की न तो फिटनेस हो पाती है और न ही परमिट का नवीनीकरण। लेकिन ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि चालान भरने के बाद भी वाहन को ब्लैक लिस्ट श्रेणी से नहीं हटाया जा रहा है।
ताजा मामला कामर्शियल गाड़ी संख्या यूपी-15सीटी 0797 से जुड़ा है। इस गाड़ी का गुरुग्राम (हरियाणा) में चालान काटा गया था। गाड़ी मालिक ने वहां जाकर जुर्माना भर दिया। लेकिन जब वह गाड़ी की फिटनेस कराने आरटीओ पहुंचा तो सॉफ्टवेयर ने गाड़ी को ब्लैक लिस्ट दिखा दिया। हरियाणा की ट्रैफिक पुलिस ने चालान भरने के बाद भी गाड़ी को ब्लैक लिस्ट से बाहर कर स्टेटस अपडेट नहीं किया था। सात-आठ दिन बाद इसे अपडेट किया गया, उसके बाद ही गाड़ी की फिटनेस हो सकी। ये एक मामला नहीं है बल्कि आरटीओ में ऐसे सैकड़ों केस आते हैं।
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हर जगह हो चालान छुड़ाने की सुविधा
ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा का कहना है कि जहां पर भी गाड़ी का चालान होता है, वहीं उसे भुगतना पड़ता है। इसमें ट्रांसपोर्टरों का समय और खर्च बढ़ता है। विभाग को कहीं पर भी चालान भुगतने की सुविधा देनी चाहिए। चालान का पैसा संबंधित अथॉरिटी को ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगा।
क्या बोले अधिकारी
अभी तक की व्यवस्था के अनुसार चालान वहीं भरा जाता है, जहां वह कटता है। कभी कभी चालन भुगतने के बाद भी वह सॉफ्टवेयर में प्रदर्शित होता रहता है। ट्रांसपोर्टरों की मांग को शासन तक भिजवाया जाएगा।
डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
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राजदीप जाखड़
मेरठ। परिवहन विभाग ने भले ही वाहन और सारथी सॉफ्टवेयर के जरिये लोगों की समस्याएं खत्म कर सुविधा देने में सफलता पाई हो, लेकिन अभी भी कुछ मामलों में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। कामर्शियल वाहन स्वामियों को दूसरे राज्यों में होने वाले चालान का जुर्माना भरने के बाद भी वाहन के ब्लैक लिस्टेड होने की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में उनके वाहनों की न तो फिटनेस हो पाती है और न ही परमिट आदि का नवीनीकरण। ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि कटे चालान का जुर्माना कहीं भी भरने की सुविधा प्रदान की जाए।
परिवहन विभाग के नियमानुसार वाहन का जिस जिले या राज्य में चालान कटता है, उसके मालिक को वह चालान वहीं पर भरना पड़ता है। चालान नहीं भरने पर उक्त वाहन ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है। उसका पूरा ब्यौरा परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर पर डाल दिया जाता है। ऐसे में उक्त वाहन की न तो फिटनेस हो पाती है और न ही परमिट का नवीनीकरण। लेकिन ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि चालान भरने के बाद भी वाहन को ब्लैक लिस्ट श्रेणी से नहीं हटाया जा रहा है।
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ताजा मामला कामर्शियल गाड़ी संख्या यूपी-15सीटी 0797 से जुड़ा है। इस गाड़ी का गुरुग्राम (हरियाणा) में चालान काटा गया था। गाड़ी मालिक ने वहां जाकर जुर्माना भर दिया। लेकिन जब वह गाड़ी की फिटनेस कराने आरटीओ पहुंचा तो सॉफ्टवेयर ने गाड़ी को ब्लैक लिस्ट दिखा दिया। हरियाणा की ट्रैफिक पुलिस ने चालान भरने के बाद भी गाड़ी को ब्लैक लिस्ट से बाहर कर स्टेटस अपडेट नहीं किया था। सात-आठ दिन बाद इसे अपडेट किया गया, उसके बाद ही गाड़ी की फिटनेस हो सकी। ये एक मामला नहीं है बल्कि आरटीओ में ऐसे सैकड़ों केस आते हैं।
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हर जगह हो चालान छुड़ाने की सुविधा
ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा का कहना है कि जहां पर भी गाड़ी का चालान होता है, वहीं उसे भुगतना पड़ता है। इसमें ट्रांसपोर्टरों का समय और खर्च बढ़ता है। विभाग को कहीं पर भी चालान भुगतने की सुविधा देनी चाहिए। चालान का पैसा संबंधित अथॉरिटी को ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगा।
क्या बोले अधिकारी
अभी तक की व्यवस्था के अनुसार चालान वहीं भरा जाता है, जहां वह कटता है। कभी कभी चालन भुगतने के बाद भी वह सॉफ्टवेयर में प्रदर्शित होता रहता है। ट्रांसपोर्टरों की मांग को शासन तक भिजवाया जाएगा।
डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ