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एमआईईटी में नैनोटेकनोलॉजी पर सेमिनार
Updated Mon, 04 Dec 2017 09:13 PM IST
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मेरठ।
मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सोमवार को 14 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। इसके तहत बायोटेक्नोलॉजी विभाग में नैनो बायोटेक्नोलॉजी और ड्रोसोफिला के उपयोग में जेनेटिक रिसर्च मॉडल पर शिक्षण कार्यशाला होगी।
कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला शुरू हुई। इसका मुख्य अतिथि वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह रोहिला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डॉ. एनसी मिश्रा आईआईटी रुड़की एवं एमआईईटी ग्रुप के चेयरमैन विष्णुशरण ने शुभारंभ किया। यहां करीब 150 शिक्षकों ने शिरकत की। पाठ्यक्रम डायरेक्टर डॉ. पंकज त्यागी ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य सभी शिक्षकों को नैनो बायोटेक्नोलॉजी की मदद से ड्रोसोफिला (उड़ने वाली एक प्रजाति या मक्खी जो आमतौर पर आम फल मक्खी या सिरका मक्खी के रूप में जानी जाती है) के प्रयोग से रोगजनन और जीवन इतिहास एवं विकास के बारे में नई तकनीक से अवगत कराना है। जिससे भविष्य की बायोटेक्नोलॉजी और नैनो बायोटेक्नोलॉजी से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके। वहीं, जटिल बीमारियों का इलाज आसानी से हो सके। साथ ही शरीर की संरचना उचित रहे। उन्होंने बताया कि ड्रोसोफिला मक्खी की संरचना मानव संरचना से मिलती है। जिसके परिणामस्वरूप ड्रोसोफिला मक्खी पर नैनो बायोटेक्नोलॉजी के उपयोग से अनेक बीमारियों का निदान पाकर मेडिकल क्षेत्र में नई राहें खोल सकते हैं। मुख्य अतिथि वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह रोहिला ने छात्रों को बताया कि वैज्ञानिकों ने नैनो बायोटेक्नोलॉजी से फेफड़ों के कैंसर पर निजात पा ली है। वैज्ञानिकों ने बैंडेज जैसा पॉलीमर नैनो फाइबर तैयार किया है। इससे फेफड़ों क ी कैंसर कोशिकाओं को समूल नष्ट कि या जा सकता है। इसी प्रकार ड्रोसोफिला पर नैनो बायोटेक्नोलॉजी के जरिए शोध करके कई घातक बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। अतिथि वक्ता डॉ. एनसी मिश्रा ने छात्रों को नैनो फाइबर बनाने की विविध तकनीक एवं उनके लाभ और नुकसान की जानकारी दी।
इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष विष्णुशरण, उपाध्यक्ष पुनीत अग्रवाल, महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल जेएम गर्ग, निदेशक डॉ. मयंक गर्ग, एचओडी डॉ. अजय शर्मा, कोर्स निदेशक डॉ. पंकज त्यागी, डॉ. अजय सिंह, धर्मेेंद्र शर्मा और अजय चौधरी मौजूद रहे।
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मुख्य बातें
एमआईईटी में नैनो बायोटेक्नोलॉजी एवं ड्रोसोफिला पर प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ
ड्रोसोफिला पर शोध करके खोजेंगे बीमारियों के नए इलाज
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मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सोमवार को 14 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। इसके तहत बायोटेक्नोलॉजी विभाग में नैनो बायोटेक्नोलॉजी और ड्रोसोफिला के उपयोग में जेनेटिक रिसर्च मॉडल पर शिक्षण कार्यशाला होगी।
कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला शुरू हुई। इसका मुख्य अतिथि वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह रोहिला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डॉ. एनसी मिश्रा आईआईटी रुड़की एवं एमआईईटी ग्रुप के चेयरमैन विष्णुशरण ने शुभारंभ किया। यहां करीब 150 शिक्षकों ने शिरकत की। पाठ्यक्रम डायरेक्टर डॉ. पंकज त्यागी ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य सभी शिक्षकों को नैनो बायोटेक्नोलॉजी की मदद से ड्रोसोफिला (उड़ने वाली एक प्रजाति या मक्खी जो आमतौर पर आम फल मक्खी या सिरका मक्खी के रूप में जानी जाती है) के प्रयोग से रोगजनन और जीवन इतिहास एवं विकास के बारे में नई तकनीक से अवगत कराना है। जिससे भविष्य की बायोटेक्नोलॉजी और नैनो बायोटेक्नोलॉजी से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके। वहीं, जटिल बीमारियों का इलाज आसानी से हो सके। साथ ही शरीर की संरचना उचित रहे। उन्होंने बताया कि ड्रोसोफिला मक्खी की संरचना मानव संरचना से मिलती है। जिसके परिणामस्वरूप ड्रोसोफिला मक्खी पर नैनो बायोटेक्नोलॉजी के उपयोग से अनेक बीमारियों का निदान पाकर मेडिकल क्षेत्र में नई राहें खोल सकते हैं। मुख्य अतिथि वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह रोहिला ने छात्रों को बताया कि वैज्ञानिकों ने नैनो बायोटेक्नोलॉजी से फेफड़ों के कैंसर पर निजात पा ली है। वैज्ञानिकों ने बैंडेज जैसा पॉलीमर नैनो फाइबर तैयार किया है। इससे फेफड़ों क ी कैंसर कोशिकाओं को समूल नष्ट कि या जा सकता है। इसी प्रकार ड्रोसोफिला पर नैनो बायोटेक्नोलॉजी के जरिए शोध करके कई घातक बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। अतिथि वक्ता डॉ. एनसी मिश्रा ने छात्रों को नैनो फाइबर बनाने की विविध तकनीक एवं उनके लाभ और नुकसान की जानकारी दी।
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इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष विष्णुशरण, उपाध्यक्ष पुनीत अग्रवाल, महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल जेएम गर्ग, निदेशक डॉ. मयंक गर्ग, एचओडी डॉ. अजय शर्मा, कोर्स निदेशक डॉ. पंकज त्यागी, डॉ. अजय सिंह, धर्मेेंद्र शर्मा और अजय चौधरी मौजूद रहे।
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मुख्य बातें
एमआईईटी में नैनो बायोटेक्नोलॉजी एवं ड्रोसोफिला पर प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ
ड्रोसोफिला पर शोध करके खोजेंगे बीमारियों के नए इलाज