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मदरसा अस्तित्व में नहीं जारी कर दी छात्रवृति और वेतन
Updated Wed, 21 Jun 2017 02:47 AM IST
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अल्पसंख्यक विभाग के लिपिकों ने साक्ष्य छिपाकर किया खेल
जिस मदरसे पर एफआईआर दर्ज हुई उसे भी दिला दी छात्रवृत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। अल्पसंख्यक विभाग में हुए घोटाले और फर्जीवाड़े लगातार सामने आ रहे हैं। जिन मदरसों के हवा में ही संचालित होने के कारण मान्यता निरस्त करने के आदेश हो गए, विभाग के लिपिकों ने साक्ष्य छिपाते हुए उन्हें छात्रवृत्ति जारी करा दी। ऐसे ही एक मदरसे के तो शिक्षकों को वेतन तक दिला दिया गया।
मदरसा दानिश इस्लामिक मदरसा अहमदनगर को 2004-05 में मान्यता दी गयी थी। इस मदरसे के खिलाफ फर्जीवाड़ा कर छात्रवृत्ति और शिक्षकों के वेतन हड़पने की शिकायत पर जांच हुई तो मदरसा पूरी तरह फर्जी पाया गया। जांच अधिकारी ने लिखा कि मदरसे का कहीं अस्तित्व ही नहीं है। इसके बाद इस मदरसे के खिलाफ एफआईआर होने के साथ ही मान्यता समाप्त करने के आदेश जारी हुआ। लेकिन इस मदरसे के करीब 100 छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ ही यहां तैनात तीन शिक्षकों को मदरसा बोर्ड से वेतन जारी हो गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह काम अल्पसंख्यक विभाग में तैनात एक बाबू ने किया। जिसने तमाम साक्ष्य छिपाते हुए मदरसा संचालक से साज कर सूची शासन को भेज दी। यहां छात्रवृत्ति और वेतन के रूप में करीब डेढ़ लाख रुपये जारी हुए हैं।
एफआईआर दर्ज, छात्रवृत्ति जारी
मदरसा दरसगाह इस्लामी हमीदिया राधना इनायतपुर के खिलाफ भी तमाम शिकायतों पर जांच हुई थी। इस जांच में इस मदरसे को फर्जीवाड़ा का दोषी पाया गया और एफआईआर दर्ज हुई। बावजूद इसके इस मदरसे के भी करीब 200 छात्रों को साठगांठ कर छात्रवृत्ति जारी कर दी गयी है।
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कोट
मेरे पास अल्पसंख्यक विभाग का अतिरिक्त प्रभार है। मामला मेरी जानकारी में नही है। संबधित बाबू से जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकता हूं। यदि ऐसा है तो कार्रवाई होगी। -उमेश द्विवेदी, प्रभारी अधिकारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
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जिस मदरसे पर एफआईआर दर्ज हुई उसे भी दिला दी छात्रवृत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। अल्पसंख्यक विभाग में हुए घोटाले और फर्जीवाड़े लगातार सामने आ रहे हैं। जिन मदरसों के हवा में ही संचालित होने के कारण मान्यता निरस्त करने के आदेश हो गए, विभाग के लिपिकों ने साक्ष्य छिपाते हुए उन्हें छात्रवृत्ति जारी करा दी। ऐसे ही एक मदरसे के तो शिक्षकों को वेतन तक दिला दिया गया।
मदरसा दानिश इस्लामिक मदरसा अहमदनगर को 2004-05 में मान्यता दी गयी थी। इस मदरसे के खिलाफ फर्जीवाड़ा कर छात्रवृत्ति और शिक्षकों के वेतन हड़पने की शिकायत पर जांच हुई तो मदरसा पूरी तरह फर्जी पाया गया। जांच अधिकारी ने लिखा कि मदरसे का कहीं अस्तित्व ही नहीं है। इसके बाद इस मदरसे के खिलाफ एफआईआर होने के साथ ही मान्यता समाप्त करने के आदेश जारी हुआ। लेकिन इस मदरसे के करीब 100 छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ ही यहां तैनात तीन शिक्षकों को मदरसा बोर्ड से वेतन जारी हो गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह काम अल्पसंख्यक विभाग में तैनात एक बाबू ने किया। जिसने तमाम साक्ष्य छिपाते हुए मदरसा संचालक से साज कर सूची शासन को भेज दी। यहां छात्रवृत्ति और वेतन के रूप में करीब डेढ़ लाख रुपये जारी हुए हैं।
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एफआईआर दर्ज, छात्रवृत्ति जारी
मदरसा दरसगाह इस्लामी हमीदिया राधना इनायतपुर के खिलाफ भी तमाम शिकायतों पर जांच हुई थी। इस जांच में इस मदरसे को फर्जीवाड़ा का दोषी पाया गया और एफआईआर दर्ज हुई। बावजूद इसके इस मदरसे के भी करीब 200 छात्रों को साठगांठ कर छात्रवृत्ति जारी कर दी गयी है।
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कोट
मेरे पास अल्पसंख्यक विभाग का अतिरिक्त प्रभार है। मामला मेरी जानकारी में नही है। संबधित बाबू से जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकता हूं। यदि ऐसा है तो कार्रवाई होगी। -उमेश द्विवेदी, प्रभारी अधिकारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग