{"_id":"5a55299e4f1c1bfe7a8b6400","slug":"181515530654-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधुनिक इम्पलांट तकनीक से किया घुटने का प्रत्यारोपण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आधुनिक इम्पलांट तकनीक से किया घुटने का प्रत्यारोपण
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आधुनिक इम्पलांट पद्धति से किया घुटने का प्रत्यारोपण
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में एक बुजुर्ग केदोनों घुटनों का प्रत्यारोपण आधुनिक तकनीक और आधुनिक इम्पलांट पद्धति द्वारा किया गया। इस तरह की तकनीक यहां पहली बार अपनाई गई है।
घुटनों का प्रत्यारोपण डॉ. डीडी त्यागी (65) निवासी आशियाना कालोनी मुरादाबाद का किया गया है। वह मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के पिता हैं। वह 20 सालों से घुटने की बीमारी से ग्रस्त थे। तीन सालों से चलने, फिरने और रोजमर्रा की जरूरत में भी घुटनों से परेशान थे। वह शुगर और दिल की बीमारी से भी पीड़ित हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. परवेज अहमद की देखरेख में उन्हें भर्ती किया गया था। ऑर्थोपेडिक्स टीम में डॉ. परवेज अहमद के अलावा डॉ. शशांक जिंदल, डॉ. सुर्यांश मोहन और बेहोशी में डॉ. सुभाष दहिया शामिल रहे।
डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह के इम्पलांट का पहली बार इस्तेमाल किया गया है। इस इम्पलांट की कार्यक्षमता 10 गुना ज्यादा होती है और इसकी लाइफ 20 साल तक आंकी गई है, जो कि नार्मल इम्पलांट से 10 साल ज्यादा है। यह मरीज को एलर्जी से भी बचाता है, क्योंकि ऑक्सीनियम पद्धति में कोबाल्ट क्रोमियम और निकिल मिश्रित धातु नहीं होती है। इससे मरीज को धातु एलर्जी का खतरा भी नहीं होता है और मरीज की चाल भी इस पद्धति द्वारा ज्यादा होती है। मेडिकल कॉलेज केप्रिंसिपल डॉ. एसकेगर्ग, कॉलेज की फैकल्टी और सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने पूरी टीम को बधाई दी है।
विज्ञापन
प्रत्यारोपण की लागत हुई कम
सरकार द्वारा घुटना प्रत्यारोण की लागत कम करने से लोगों की काफी राहत मिली है। पहले इस तरह के एक घुटने की लागत दो लाख के लगभग आती थी, वह अब घट कर करीब 75 हजार रुपये रह गई है।ॅ
खास बात
मेडिकल कॉलेज में पहली बार अपनाई गई इस तरह की तकनीक
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में एक बुजुर्ग केदोनों घुटनों का प्रत्यारोपण आधुनिक तकनीक और आधुनिक इम्पलांट पद्धति द्वारा किया गया। इस तरह की तकनीक यहां पहली बार अपनाई गई है।
घुटनों का प्रत्यारोपण डॉ. डीडी त्यागी (65) निवासी आशियाना कालोनी मुरादाबाद का किया गया है। वह मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के पिता हैं। वह 20 सालों से घुटने की बीमारी से ग्रस्त थे। तीन सालों से चलने, फिरने और रोजमर्रा की जरूरत में भी घुटनों से परेशान थे। वह शुगर और दिल की बीमारी से भी पीड़ित हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. परवेज अहमद की देखरेख में उन्हें भर्ती किया गया था। ऑर्थोपेडिक्स टीम में डॉ. परवेज अहमद के अलावा डॉ. शशांक जिंदल, डॉ. सुर्यांश मोहन और बेहोशी में डॉ. सुभाष दहिया शामिल रहे।
विज्ञापन
डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह के इम्पलांट का पहली बार इस्तेमाल किया गया है। इस इम्पलांट की कार्यक्षमता 10 गुना ज्यादा होती है और इसकी लाइफ 20 साल तक आंकी गई है, जो कि नार्मल इम्पलांट से 10 साल ज्यादा है। यह मरीज को एलर्जी से भी बचाता है, क्योंकि ऑक्सीनियम पद्धति में कोबाल्ट क्रोमियम और निकिल मिश्रित धातु नहीं होती है। इससे मरीज को धातु एलर्जी का खतरा भी नहीं होता है और मरीज की चाल भी इस पद्धति द्वारा ज्यादा होती है। मेडिकल कॉलेज केप्रिंसिपल डॉ. एसकेगर्ग, कॉलेज की फैकल्टी और सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने पूरी टीम को बधाई दी है।
विज्ञापन
प्रत्यारोपण की लागत हुई कम
सरकार द्वारा घुटना प्रत्यारोण की लागत कम करने से लोगों की काफी राहत मिली है। पहले इस तरह के एक घुटने की लागत दो लाख के लगभग आती थी, वह अब घट कर करीब 75 हजार रुपये रह गई है।ॅ
खास बात
मेडिकल कॉलेज में पहली बार अपनाई गई इस तरह की तकनीक