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रेल हादसे रोकने के लिए विदेशी तकनीक का सहारा
Updated Thu, 24 Aug 2017 02:51 AM IST
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मेरठ। लगातार महंगे होते जा रहे सफर के बावजूद रेलवे यात्री सुविधाओं और सुरक्षा की गारंटी देने में फेल साबित हो रहा है। हाल में दो बड़े हादसों के बाद यात्री ट्रेनों में सफर करने से डरने लगे हैं। हालांकि सुरक्षा के पहलू पर रेलवे मंत्रालय ने आला अफसरों पर गाज गिराकर कड़ा संदेश देने का काम किया है। वहीं, लंबे समय से काकोदकर समिति की रिपोर्ट को पूरी तरह लागू करने से पीछे हट रहा रेलवे अब हादसों को रोकने के लिए विदेशी तकनीक का सहारा लेने की बात कह रहा है।
रेलवे स्टेशनों को वाई-फाई सुविधाओं के साथ पीपीपी मोड पर देकर एयरपोर्ट की भांति सुविधाएं प्रदान करने के दावे तो तो किए जा रहे हैं। लेकिन रेल किराए और सेवाओं को महंगा करने के बावजूद यहां अहम सवाल सुरक्षित सफर का है। पहले कानपुर और अब खतौली में कलिंग उत्कल ट्रेन हादसे ने आम जनमानस को हिलाकर रख दिया है। लगातार विश्वास खोते जा रहे रेलवे मंत्रालय ने चौतरफा दबाव के बाद रेलवे बोर्ड के इंजीनियरिंग सदस्य, जीएम व डीआरएम समेत आला अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बाद अब रेल संरक्षा (रेलवे सेफ्टी) पर बड़ा काम करने का फैसला लिया है। इस संबंध में नार्दन रेलवे के सीपीआरओ नीरज शर्मा का कहना है कि रेल संरक्षा पर कई बड़े देशों से तकनीक हासिल करने का समझौता हुआ है। पिछले तीन वर्षों में रेल हादसों में कमी आई है। इस पर और ज्यादा जोर देकर कम करने का प्रयास चल रहा है।
काकोदकर समिति की 68 सिफारिशें लागू
हादसे के बाद बैकफुट पर आए रेलवे ने अपनी सफाई देने के लिए मंगलवार को रेलवे संरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी है। मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया कि रेलवे ने काकोदकर उच्चस्तरीय संरक्षा समीक्षा समिति की 106 सिफारिशों में से 68 सिफारिशों को पूरी तरह से और 13 को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसमें 52 सिफारिशों पर अमल किया गया है और शेष सिफारिशों का क्रियान्वयन विभिन्न चरणों में चल रहा है।
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विदेशोें से लेेंगे तकनीकी मदद
रेल हादसों पर अंकुश लगाने और सफर सुरक्षित कराने के लिए रेलवे विदेशी तकनीक की मदद लेने जा रहा है। इसके लिए रेलवे ने रूस, जापान, इटली व कनाडा के साथ समझौता किया है। ये चारों देश न केवल रेलवे को अपनी संरक्षा तकनीक उपलब्ध कराएंगे बल्कि संरक्षा सेक्टर को और ज्यादा बेहतर करने में अपने सुझाव भी देंगे।
डिरेलमेंट रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा
डिरेलमेंट रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेने की बात भी कही गई है। इसमें यांत्रिकीकृत ट्रैक अनुरक्षण प्रणाली, व्हीक्यूलर यूएसएफडी मशीनों का उपयोग, वेल्डिंग तकनीक को बेहतर बनाना, हेड हार्डल रेलों का उपयोग, वे-साइड कोच और वैगन हॉट बॉक्स, वे-साइड लोड इंपेक्ट डिटेक्टर, एलएची डिब्बों का प्रसार, आईसीएफ डिब्बों में सीबीसी कपलिंग रैट्रो फिटमेंट इत्यादि का उपयोग किया जाएगा।
दावा: तीन साल में हादसों में कमी
जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल में संरक्षा स्थिति में सुधार आया है। वर्ष 2014-15 में 135 रेल दुर्घटनाओं के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 107 और 2016-17 में ये 104 रहीं। अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत संरक्षा मानदंडों वाले प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर पर दुर्घटनाओं का प्रतिशत वर्ष 2014-15 के 0.11 से सुधरकर 2015-16 में 0.10 और 2016-17 में 0.09 हो गया है। कर्मचारी रहित रेल फाटकों पर होने वाली दुर्घटनाओं में भी 60 फीसदी कमी आने का दावा किया जा रहा है।
खास बात
- सफर हो रहा लगातार महंगा लेकिन सुरक्षा की गारंटी खो रहा रेलवे
- रूस, जापान, इटली, कनाडा से तकनीकी साझेदारी का समझौता
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रेलवे स्टेशनों को वाई-फाई सुविधाओं के साथ पीपीपी मोड पर देकर एयरपोर्ट की भांति सुविधाएं प्रदान करने के दावे तो तो किए जा रहे हैं। लेकिन रेल किराए और सेवाओं को महंगा करने के बावजूद यहां अहम सवाल सुरक्षित सफर का है। पहले कानपुर और अब खतौली में कलिंग उत्कल ट्रेन हादसे ने आम जनमानस को हिलाकर रख दिया है। लगातार विश्वास खोते जा रहे रेलवे मंत्रालय ने चौतरफा दबाव के बाद रेलवे बोर्ड के इंजीनियरिंग सदस्य, जीएम व डीआरएम समेत आला अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बाद अब रेल संरक्षा (रेलवे सेफ्टी) पर बड़ा काम करने का फैसला लिया है। इस संबंध में नार्दन रेलवे के सीपीआरओ नीरज शर्मा का कहना है कि रेल संरक्षा पर कई बड़े देशों से तकनीक हासिल करने का समझौता हुआ है। पिछले तीन वर्षों में रेल हादसों में कमी आई है। इस पर और ज्यादा जोर देकर कम करने का प्रयास चल रहा है।
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काकोदकर समिति की 68 सिफारिशें लागू
हादसे के बाद बैकफुट पर आए रेलवे ने अपनी सफाई देने के लिए मंगलवार को रेलवे संरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी है। मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया कि रेलवे ने काकोदकर उच्चस्तरीय संरक्षा समीक्षा समिति की 106 सिफारिशों में से 68 सिफारिशों को पूरी तरह से और 13 को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसमें 52 सिफारिशों पर अमल किया गया है और शेष सिफारिशों का क्रियान्वयन विभिन्न चरणों में चल रहा है।
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विदेशोें से लेेंगे तकनीकी मदद
रेल हादसों पर अंकुश लगाने और सफर सुरक्षित कराने के लिए रेलवे विदेशी तकनीक की मदद लेने जा रहा है। इसके लिए रेलवे ने रूस, जापान, इटली व कनाडा के साथ समझौता किया है। ये चारों देश न केवल रेलवे को अपनी संरक्षा तकनीक उपलब्ध कराएंगे बल्कि संरक्षा सेक्टर को और ज्यादा बेहतर करने में अपने सुझाव भी देंगे।
डिरेलमेंट रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा
डिरेलमेंट रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेने की बात भी कही गई है। इसमें यांत्रिकीकृत ट्रैक अनुरक्षण प्रणाली, व्हीक्यूलर यूएसएफडी मशीनों का उपयोग, वेल्डिंग तकनीक को बेहतर बनाना, हेड हार्डल रेलों का उपयोग, वे-साइड कोच और वैगन हॉट बॉक्स, वे-साइड लोड इंपेक्ट डिटेक्टर, एलएची डिब्बों का प्रसार, आईसीएफ डिब्बों में सीबीसी कपलिंग रैट्रो फिटमेंट इत्यादि का उपयोग किया जाएगा।
दावा: तीन साल में हादसों में कमी
जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल में संरक्षा स्थिति में सुधार आया है। वर्ष 2014-15 में 135 रेल दुर्घटनाओं के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 107 और 2016-17 में ये 104 रहीं। अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत संरक्षा मानदंडों वाले प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर पर दुर्घटनाओं का प्रतिशत वर्ष 2014-15 के 0.11 से सुधरकर 2015-16 में 0.10 और 2016-17 में 0.09 हो गया है। कर्मचारी रहित रेल फाटकों पर होने वाली दुर्घटनाओं में भी 60 फीसदी कमी आने का दावा किया जा रहा है।
खास बात
- सफर हो रहा लगातार महंगा लेकिन सुरक्षा की गारंटी खो रहा रेलवे
- रूस, जापान, इटली, कनाडा से तकनीकी साझेदारी का समझौता