फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   मेनका सिनेमा

मेनका सिनेमा

Tue, 17 Jul 2018 02:00 AM IST
Updated Tue, 17 Jul 2018 02:00 AM IST
विज्ञापन
मेनका सिनेमा
मेरठ। मेनका सिनेमा हॉल की जिस भूमि को जिला प्रशासन नजूल की भूमि बता रहा है, उसका साल 1961 से अब तक चार बार सेटिंग से स्वामित्व बदला जा चुका था। इसे बेचा जाना भी कहा जा सकता है। लेकिन सरकारी सिस्टम सोता रहा। अब पांचवीं बार भी इसकी तैयारी थी तो अमर उजाला ने इसका भंडाफोड़ कर 15 करोड़ से ज्यादा भूमि को खुर्दबुर्द होने से बचा लिया। इस खुलासे को छह दिन बीत चुके हैं। लेकिन पुलिस-प्रशासन, एमडीए या नगर निगम कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि इस प्रकरण में सत्ताधारी दल से जुड़े कई बड़े लोग शामिल हैं। जिनको बचाने के लिए काम चल रहा है।
विज्ञापन

इन भवन संख्याओं पर ये हैं दर्ज
नगर के हाउस टैक्स रिकॉर्ड में भवन संख्या 255 नगर पालिका के नाम दर्ज है। जिस पर निगम की ट्यूबवेल लगी है। पड़ोसियों ने निगम की ट्यूबवेल की भूमि पर भी अवैध कब्जा किया हुआ है। भवन संख्या 256 में पुलिस चौकी यानी एसपी सिटी कार्यालय है। बराबर में भवन संख्या 258-1 नासिर अली के नाम दर्ज है। जिसमें अलकरीम होटल चलता है।
विज्ञापन

254 में चलती थी पाठशाला
मेनका सिनेमा के भवन संख्या 253 के ठीक बगल में भवन संख्या 254 में पाठशाला चलती थी। पाठशाला के नाम से ही निगम के रिकॉर्ड में भवन संख्या 254 दर्ज है। वह पाठशाला कहां चली गयी, इसका भी नगर निगम को पता नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आम आदमी के लिए चुनौती
आम आदमी के लिए निगम में अपने भवन के गृहकर में नाम परिवर्तन कराना चुनौती माना जाता है। लेकिन यहां तो ऐसे भी लोग हैं जो कभी निगम तक नहीं गए और एक के बाद एक उनके नाम संपत्ति का परिवर्तन होता गया। मेनका सिनेमा की भवन संख्या मौजूदा में 253 है। ‘अमर उजाला’ ने नगर निगम का रिकॉर्ड खंगाला तो 57 साल में चार लोगों के नाम चढ़ गए।

ऐसे हुआ संपत्ति परिवर्तन
01: नगर निगम के साल 1961 के रिकॉर्ड के मुताबिक हाउस टैक्स दो रुपये सालाना निर्धारित था। भवन संख्या 241 के स्वामी का नाम चरनदास था। इनके किराएदार के नाम पर पलटू का नाम दर्ज है। हालांकि निगम रिकॉर्ड में भवन संख्या 241 को बदलकर भवन संख्या 253 कर दिया गया।
02: इनके बाद 26 मार्च 2009 तक निगम के रिकॉर्ड के आधार पर सामने आया है कि नादिर अली उर्फ न्यादर पुत्र मो. इशाक भी मेनका भवन स्वामी के रूप में रहें हैं। जिनके नाम से निगम को टैक्स मिला है।
03: नादिर अली के बाद मै. हाईटेक सिटी डेवलपर्स प्रा.लि. के डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार चौबे का नाम 27 मार्च 2009 में दाखिल किया गया। नामांतरण बैनामे के दस्तावेज के आधार पर आया है या फिर मनमर्जी से, यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना जरूर है कि रजिस्टर में नाम परिवर्तन कर निर्धारण अधिकारी के आदेश पर अंकित किया जाना लिखा गया है। उसी समय से निगम के रिकार्ड में हाउस टैक्स पुरुषोत्तम कुमार चौबे के नाम से वसूला जा रहा है। जो नगर निगम से एओसी लेने से पहले भी जमा किया गया है।
चेक से बचे, कैश ही जमा किया टैक्स
मेनका सिनेमा को बेचने, सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने और अवैध तरीके से सिनेमा की बिल्डिंग को तोड़ने वालों का असली चेहरा अभी सामने नहीं आ रहा है। फिलहाल सभी फर्जीवाड़े की गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंक रहे हैं। निगम का बकाया हाउस टैक्स 94406.42 हजार निगम में करते समय भी समझदारी से काम लिया गया। हाउस टैक्स चेक से नहीं बल्कि कैश में जमा किया गया। अगर चेक से हाउस टैक्स जमा किया जाता तो यह साबित हो जाता कि टैक्स की धनराशि किसके खाते से कटी है। मै. हाईटेक सिटी डेवलपर्स के डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार चौबे अपनी जगह सही हैं या फिर स्थानीय स्तर पर कोई व्यक्ति इस पूरे खेल को खेल रहा है।

शो टैक्स भी नहीं वसूल पाया निगम
निगम रिकॉर्ड के मुताबिक 31 मार्च 2007 तक मेनका सिनेमा में फिल्म चली थी। नगर निगम मेनका सिनेमा में चली फिल्म का शो टैक्स 14207 रुपये आज तक नहीं वसूल पाया है। निगम को सिनेमा का मालिक भी नहीं मिल पाया है। निगम के रिकार्ड में शो टैक्स मेनका सिनेमा को ही आधार दर्शाया गया है न कि सिनेमा मालिक के नाम। निगम के लिपिक संजीव के अनुसार हाल ही में उन्हें यह कार्य मिला है। रिकार्ड में जो शो टैक्स बकाया अंकित है, उसके आधार पर जानकारी दी जा रही है।

जेई के खिलाफ एफआईआर की तैयारी
मेनका सिनेमा भवन जर्जर होने के प्रार्थनापत्र पर निगम के जिस जेई ने रिपोर्ट लगायी थी। आवेदकों द्वारा दिए गए शपथपत्रों की जांच करना भी गवारा नहीं समझा था। उस जेई के खिलाफ निगम प्रशासन एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। प्रथम दृष्टया जेई को ही दोषी माना जा रहा है। हालांकि अपर नगरायुक्त के निर्देश पर अधिशासी अभियंता नीना सिंह ने जेई एसपी सिंह के नाम तहरीर नहीं दी है।
तहसील की जांच में खुलेगा खेल
मेनका सिनेमा की भूमि कब और कितनी बार बिकी। इसको खरीदने वालों ने किस आधार पर नजूल की बनी भूमि पर सिनेमा खरीदा। क्या सही में नजूल की भूमि है। बैनामों के दौरान किसने कितने स्टांप की चोरी की। इन सभी सवालों का जवाब, जिला प्रशासन यानी तहसील की जांच के बाद ही सामने आएगा।

हमने तो स्पष्ट किया था
अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी का कहना है कि नजूल की हो या साधारण भूमि, इसका पूरा लेखाजोखा तहसील के पास होता है। निगम केवल भवन पर हाउस टैक्स लगाकर वसूली करता है। जिस प्रार्थनापत्र और जेई की रिपोर्ट पर चौबे के नाम अपेक्षा संबंधी नोटिस दिया गया था, वह हमने वापस ले लिया है। उसमें हमने स्पष्ट कर दिया था कि तब तक भवन न गिराया जाए, जब तक कि मनोरंजन और अन्य विभागों से एनओसी न मिले। हमारे अपेक्षा पत्र का उल्लंघन किया गया है। जिसके आधार पर हमने पुरुषोत्तम कुमार चौबे के नाम एफआईआर दर्ज करा दी है। जेई के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराएंगे।


खास बातें:
57 साल में चार बार सेटिंग से बदला मेनका हॉल का स्वामित्व
समय के साथ बदलते गए भवन स्वामी, पांचवीं बार में खुली पोल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed