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अस्थाई गोशाला के पिलर और टाई बीम निर्माण में खेल
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फोटो समाचार-----------
अस्थाई गोशाला के पिलर और टाई बीम निर्माण में खेल
- निगम के इंजीनियरों की मिलीभगत से हो रहा है गड़बड़ झाला
- 20 पिलर को रोकने के लिए भी नियम से नहीं डाला गया टाई बीम
- खुलासा हुआ तो आनन फानन में पिलर काटकर जमीन के ऊपर डाला गया टाई बीम
- अस्थाई गोशाला पर निगम के खर्च होंगे लगभग 40 लाख रुपये
राजकुमार सैनी
मेरठ। सरकारी निर्माण कार्यों में सीधे सीधे धन की बंदरबांट हो रही है। शिकायतों के बाद भी अधिकारी संज्ञान लेने कोे तैयार नहीं हैं। ऐसा ही निर्माण कार्य अस्थाई गोशाला में किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर यहां निर्माण कार्य किया जा रहा है, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मानकों पर कोई ध्यान ही नहीं है।
दरअसल सूरजकुंड वाहन डिपो के बराबर में 20 पिलरों पर टीन शेड डाला गया है। पहले इस स्थान को डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदी कूड़ा गाड़ी को खड़ी करने के लिए गैराज के रूप में चयनित किया गया था। उसी के लिए निर्माण कार्य शुरू कराया था। बताया जा रहा है कि यहां लगभग 40 लाख रुपये से पिलर, टीन शेड डालने और टायल्स लगाने का एस्टीमेट तैयार किया गया। निर्माण के दौरान ठेकेदार ने जो टीनशेड डालने के लिए पिलर खड़े किए उसको टाईबीम से जोड़ना ही भूल गया। अधिकारियों की नींद उस समय टूटी जब पिलर अपना पूरा आकार ले चुके थे। उसके बाद टाईबीम का ख्याल आया।
पिलर काटकर डाले गए टाई बीम
नियमानुसार किसी भी बड़ी बिल्डिंग का पिलर पर स्ट्रेक्चर खड़ा करने के लिए टाई बीम डाला जाना जरूरी होता है। ताकि भूकंप के समय पिलर पर खड़ी बिल्डिंग को नुकसान न पहुंचे। जब गोशाला में पिलर खड़े हो गए तो पिलरों को टाई बीम से जोड़ने के लिए पिलरों को ही कटवाना शुरू कर दिया। अब पिलर कटने के बाद इतने कमजोर हो गए कि इसका खामियाजा भविष्य में भरना पड़ सकता है। इतना ही नहीं ठेकेदार ने काटे गए पिलर के स्थान और जमीन पर डाले गए टाई बीम को छुपाने के लिए मिटटी भी डाल दी है।
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निर्माण कार्य को भी देखने नहीं पहुंचे इंजीनियर
- शहर में प्रतिवर्ष 100 करोड़ से भी अधिक के कार्य होते हैं। जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी निगम के इंजीनियरों की होती है। लेकिन नगर निगम के इंजीनियर हैं कि वह अपने कार्यालय से उठकर कहीं जाते ही नहीं हैं। यही कारण है कि नगर निगम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उंगलियां उठती रही हैं।
रोकेंगे भुगतान
पिलर को काटकर टाई बीम डाला जाना टेक्निकल गलत है। हमारे संज्ञान में मामला नहीं है। बुधवार को इसे दिखवाया जाएगा। अगर ऐसा किया गया तो ठेकेदार का भुगतान नहीं होने दिया जाएगा। - जितेन्द्र कैन, चीफ इंजीनियर नगर निगम
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अस्थाई गोशाला के पिलर और टाई बीम निर्माण में खेल
- निगम के इंजीनियरों की मिलीभगत से हो रहा है गड़बड़ झाला
- 20 पिलर को रोकने के लिए भी नियम से नहीं डाला गया टाई बीम
- खुलासा हुआ तो आनन फानन में पिलर काटकर जमीन के ऊपर डाला गया टाई बीम
- अस्थाई गोशाला पर निगम के खर्च होंगे लगभग 40 लाख रुपये
राजकुमार सैनी
मेरठ। सरकारी निर्माण कार्यों में सीधे सीधे धन की बंदरबांट हो रही है। शिकायतों के बाद भी अधिकारी संज्ञान लेने कोे तैयार नहीं हैं। ऐसा ही निर्माण कार्य अस्थाई गोशाला में किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर यहां निर्माण कार्य किया जा रहा है, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मानकों पर कोई ध्यान ही नहीं है।
दरअसल सूरजकुंड वाहन डिपो के बराबर में 20 पिलरों पर टीन शेड डाला गया है। पहले इस स्थान को डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदी कूड़ा गाड़ी को खड़ी करने के लिए गैराज के रूप में चयनित किया गया था। उसी के लिए निर्माण कार्य शुरू कराया था। बताया जा रहा है कि यहां लगभग 40 लाख रुपये से पिलर, टीन शेड डालने और टायल्स लगाने का एस्टीमेट तैयार किया गया। निर्माण के दौरान ठेकेदार ने जो टीनशेड डालने के लिए पिलर खड़े किए उसको टाईबीम से जोड़ना ही भूल गया। अधिकारियों की नींद उस समय टूटी जब पिलर अपना पूरा आकार ले चुके थे। उसके बाद टाईबीम का ख्याल आया।
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पिलर काटकर डाले गए टाई बीम
नियमानुसार किसी भी बड़ी बिल्डिंग का पिलर पर स्ट्रेक्चर खड़ा करने के लिए टाई बीम डाला जाना जरूरी होता है। ताकि भूकंप के समय पिलर पर खड़ी बिल्डिंग को नुकसान न पहुंचे। जब गोशाला में पिलर खड़े हो गए तो पिलरों को टाई बीम से जोड़ने के लिए पिलरों को ही कटवाना शुरू कर दिया। अब पिलर कटने के बाद इतने कमजोर हो गए कि इसका खामियाजा भविष्य में भरना पड़ सकता है। इतना ही नहीं ठेकेदार ने काटे गए पिलर के स्थान और जमीन पर डाले गए टाई बीम को छुपाने के लिए मिटटी भी डाल दी है।
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निर्माण कार्य को भी देखने नहीं पहुंचे इंजीनियर
- शहर में प्रतिवर्ष 100 करोड़ से भी अधिक के कार्य होते हैं। जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी निगम के इंजीनियरों की होती है। लेकिन नगर निगम के इंजीनियर हैं कि वह अपने कार्यालय से उठकर कहीं जाते ही नहीं हैं। यही कारण है कि नगर निगम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उंगलियां उठती रही हैं।
रोकेंगे भुगतान
पिलर को काटकर टाई बीम डाला जाना टेक्निकल गलत है। हमारे संज्ञान में मामला नहीं है। बुधवार को इसे दिखवाया जाएगा। अगर ऐसा किया गया तो ठेकेदार का भुगतान नहीं होने दिया जाएगा। - जितेन्द्र कैन, चीफ इंजीनियर नगर निगम