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किसानों ने सड़क खोदी, शुरू कर दी खेती
Updated Mon, 05 Mar 2018 02:12 AM IST
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मेरठ। जागृति विहार एक्सटेंशन में रविवार को किसानों ने सड़क खोदकर और खेतों में ट्रैक्टर चलाकर आवास विकास परिषद के साथ प्रशासन की टेंशन बढ़ा दी। आरएसएस के राष्ट्रोदय कार्यक्रम के लिए परिषद ने यहां विस्तार योजना के खेतों को खाली कराकर युद्ध स्तर पर विकास कार्य कराए थे। समागम के बाद भूखंडों के आवंटन पर मंथन चल रहा था। लेकिन योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
करीब छह सौ एकड़ की जागृति विहार विस्तार योजना में आवास एवं विकास परिषद ने सरायकाजी, काजीपुर, घोसीपुर गांव के किसानों से भूमि अधिग्रहीत की थी। दस साल पहले परिषद ने इस योजना पर कार्य शुरू किया। जिसमें दो हजार से ज्यादा फ्लैट भी बनाए गए। योजना को शुरू हुए दस साल हो गए। लेकिन परिषद इसे कामयाब करने की जद्दोजहद ही कर रहा है। जिसमें सबसे बड़ी अड़चन किसानों से भूमि पर कब्जा लेने में आ रही है। दो सौ एकड़ को छोड़कर करीब चार सौ एकड़ भूमि किसानों के कब्जे में थी। इस बीच आरएसएस के वृहद राष्ट्रोदय कार्यक्रम को संपन्न कराने के लिए परिषद को पुलिस-प्रशासन का सहारा मिला। जिसके चलते समागम से पहले चार सौ एकड़ भूमि पर परिषद ने कब्जा ले लिया था। किसानों ने कब्जे के दौरान हंगामा भी किया। लेकिन भारी फोर्स के चलते किसानों की एक नहीं चली।
अब फिर एक्शन में किसान
25 फरवरी को समागम कार्यक्रम समाप्त हुआ तो किसानों ने यहां फिर से खेती करने की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों ने हापुड़ रोड़ और गढ़ रोड़ को जोड़ने वाली डिवाइडर रोड़ पर बने नाले के पुल के बराबर में सड़क को खोद दिया। जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। किसानों ने जेसीबी से सड़क पर गहरा गड्डा खोदा है। जिससे लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है।
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हमें बढ़ा हुआ प्रतिकर चाहिए
किसान नेता रोहित गुर्जर ने कहा कि सभी किसानों से मामले में वार्ता की जा चुकी है। अधिकारियों ने आरएसएस के कार्यक्रम का नाम लेकर जमीन खाली कराई थी। जिस पर अब किसानों का अधिकार है। किसानों को एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से प्रतिकर मिला है। दस साल बीत जाने के बाद जमीन के मूल्यों में भारी बढ़ोतरी हुई है। जिसके चलते किसानों को छह सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अतिरिक्त प्रतिकर चाहिए। किसानों के लगातार मांग करने के बाद परिषद ने उनकी मांग को अनदेखा कर दिया। किसान बबलू ने कहा कि अभी तो शुरूआत है। अधिकांश जगहों पर भी जल्द ट्रैक्टर चलेगा।
परिषद के लिए बनेगा चुनौती
आरएसएस समागम से पहले परिषद को किसानों से जमीन खाली कराने को बहुत जद्दोजहद करनी पड़ी थी। किसानों और आवास एवं विकास अधिकारियों के बीच भिड़ंत भी हो गई थी। जिसमें परिषद की ओर से किसानों पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया। ऐसे में परिषद के अधिकारी उसी दोराहे पर खडे़ नजर आ रहे है। किसानों ने दोबारा कब्जा किया तो परिषद के लिए जमीन खाली कराना बड़ी चुनौती हो सकती है।
करोड़ों खर्च भी दांव पर
समागम के बहाने विस्तार योजना को बढ़ाने के लिए परिषद ने करोड़ों रुपये विकास कार्यों में खर्च कर दिए हैं। लेकिन जल्द भूखंड आवंटन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो किसानाें द्वारा खेती के दौरान करोड़ों रुपये भी स्वाहा हो सकते हैं।
दोबारा करेंगे विचार
मेरी जानकारी ये नहीं है। हो सकता है कि खोदी हुई सड़क पर कोर्ट का स्टे हो। किसानों को प्रतिकर दिया जा चुका है। जमीन पर दोबारा प्रतिकर बढ़ाने की मांग गलत है। किसानों को इस मामले में कई बार बताया गया कि प्रतिकर नहीं बढ़ाया जा सकता है। किसानों के बढ़े प्रतिकर मामले में उच्चाधिकारियों से बात कर दोबारा विचार किया जाएगा। -महेंद्र प्रसाद, संयुक्त आवास आयुक्त
खास बातें:
- जागृति विहार विस्तार योजना में चलाया ट्रैक्टर, शुरू की खेती
- आरएसएस के राष्ट्रोदय समागम को लेकर प्रशासन ने खाली कराए थे खेत
- सड़क खोदने से हापुड़ और गढ़ रोड़ को जोड़ने वाला रास्ता भी हुआ बंद
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करीब छह सौ एकड़ की जागृति विहार विस्तार योजना में आवास एवं विकास परिषद ने सरायकाजी, काजीपुर, घोसीपुर गांव के किसानों से भूमि अधिग्रहीत की थी। दस साल पहले परिषद ने इस योजना पर कार्य शुरू किया। जिसमें दो हजार से ज्यादा फ्लैट भी बनाए गए। योजना को शुरू हुए दस साल हो गए। लेकिन परिषद इसे कामयाब करने की जद्दोजहद ही कर रहा है। जिसमें सबसे बड़ी अड़चन किसानों से भूमि पर कब्जा लेने में आ रही है। दो सौ एकड़ को छोड़कर करीब चार सौ एकड़ भूमि किसानों के कब्जे में थी। इस बीच आरएसएस के वृहद राष्ट्रोदय कार्यक्रम को संपन्न कराने के लिए परिषद को पुलिस-प्रशासन का सहारा मिला। जिसके चलते समागम से पहले चार सौ एकड़ भूमि पर परिषद ने कब्जा ले लिया था। किसानों ने कब्जे के दौरान हंगामा भी किया। लेकिन भारी फोर्स के चलते किसानों की एक नहीं चली।
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अब फिर एक्शन में किसान
25 फरवरी को समागम कार्यक्रम समाप्त हुआ तो किसानों ने यहां फिर से खेती करने की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों ने हापुड़ रोड़ और गढ़ रोड़ को जोड़ने वाली डिवाइडर रोड़ पर बने नाले के पुल के बराबर में सड़क को खोद दिया। जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। किसानों ने जेसीबी से सड़क पर गहरा गड्डा खोदा है। जिससे लोगों को वापस लौटना पड़ रहा है।
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हमें बढ़ा हुआ प्रतिकर चाहिए
किसान नेता रोहित गुर्जर ने कहा कि सभी किसानों से मामले में वार्ता की जा चुकी है। अधिकारियों ने आरएसएस के कार्यक्रम का नाम लेकर जमीन खाली कराई थी। जिस पर अब किसानों का अधिकार है। किसानों को एक हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से प्रतिकर मिला है। दस साल बीत जाने के बाद जमीन के मूल्यों में भारी बढ़ोतरी हुई है। जिसके चलते किसानों को छह सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अतिरिक्त प्रतिकर चाहिए। किसानों के लगातार मांग करने के बाद परिषद ने उनकी मांग को अनदेखा कर दिया। किसान बबलू ने कहा कि अभी तो शुरूआत है। अधिकांश जगहों पर भी जल्द ट्रैक्टर चलेगा।
परिषद के लिए बनेगा चुनौती
आरएसएस समागम से पहले परिषद को किसानों से जमीन खाली कराने को बहुत जद्दोजहद करनी पड़ी थी। किसानों और आवास एवं विकास अधिकारियों के बीच भिड़ंत भी हो गई थी। जिसमें परिषद की ओर से किसानों पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया। ऐसे में परिषद के अधिकारी उसी दोराहे पर खडे़ नजर आ रहे है। किसानों ने दोबारा कब्जा किया तो परिषद के लिए जमीन खाली कराना बड़ी चुनौती हो सकती है।
करोड़ों खर्च भी दांव पर
समागम के बहाने विस्तार योजना को बढ़ाने के लिए परिषद ने करोड़ों रुपये विकास कार्यों में खर्च कर दिए हैं। लेकिन जल्द भूखंड आवंटन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो किसानाें द्वारा खेती के दौरान करोड़ों रुपये भी स्वाहा हो सकते हैं।
दोबारा करेंगे विचार
मेरी जानकारी ये नहीं है। हो सकता है कि खोदी हुई सड़क पर कोर्ट का स्टे हो। किसानों को प्रतिकर दिया जा चुका है। जमीन पर दोबारा प्रतिकर बढ़ाने की मांग गलत है। किसानों को इस मामले में कई बार बताया गया कि प्रतिकर नहीं बढ़ाया जा सकता है। किसानों के बढ़े प्रतिकर मामले में उच्चाधिकारियों से बात कर दोबारा विचार किया जाएगा। -महेंद्र प्रसाद, संयुक्त आवास आयुक्त
खास बातें:
- जागृति विहार विस्तार योजना में चलाया ट्रैक्टर, शुरू की खेती
- आरएसएस के राष्ट्रोदय समागम को लेकर प्रशासन ने खाली कराए थे खेत
- सड़क खोदने से हापुड़ और गढ़ रोड़ को जोड़ने वाला रास्ता भी हुआ बंद