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कहां जाऊ घोड़ों को लेकर, रेलवे अधिकारियों को इनकी बद्दुआ लगेगी
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कहां जाऊ घोड़ों को लेकर, रेलवे अधिकारियों को इनकी बद्दुआ लगेगी
- सिटी स्टेशन पर घोड़ों के साथ खड़ा रहा शहाबुद्दीन
- बोला- मांगते थे एक लाख रुपये कहां से लाता
मेरठ। 100 साल पुराने तांगा स्टैंड को भले ही रेलवे ने जमींदोज कर दिया है, लेकिन प्रधान शाहबुद्दीन का मोह नही छूट रहा है। तपती दोपहरी में वह स्टेशन के बाहर अपने घोड़ों के साथ खड़ा रहा। दरअसल रेलवे ने बृहस्पतिवार को तांगा स्टैंड को जमींदोज कर दिया था। स्टैंड के चारों तरफ से फेंसिंग कर दी गई है। जिससे उस स्थान पर किसी का कब्ज़ा न हो सके।
शुक्रवार को शाहबुद्दीन रेलवे के गेस्ट हाउस के सामने अपनी बग्गी और घोड़ों के साथ वहां खड़ा रहा। प्रधान शाहबुद्दीन को अब भी रेलवे से उम्मीद है कि कोई स्थान उसके लिए दे दिया जाए। जिससे वह इन घोड़ों को रखकर अपना गुजारा चला सके। लेकिन रेलवे की तरफ से कोई भी स्थान देने के लिए साफ इंकार किया जा चुका है।
एक लाख रुपये मांगते थे अधीक्षक
प्रधान का कहना है कि सिटी स्टेशन अधीक्षक आरपी शर्मा उससे एक लाख रुपये की मांग करते थे। उसने कहा कि डीआरएम के दौरे के समय अधीक्षक ही जानबूझकर तांगा स्टैंड को दिखाने के लिए लाए थे। शाहबुद्दीन का कहना है कि तेज़ धूप में घोड़े बिना किसी छत के खड़े है। इनकी बद्दुआ रेलवे के अधिकारियों को लगेगी। तेज धूप में घोड़ों के लिए पानी की व्यवस्था भी नहीं थी।
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आरोप बेबुनियाद
एक लाख रुपये मांगने के आरोप बेबुनियाद है। यह रेलवे की जमीन है, इसलिए तांगा स्टैंड को यहां से हटाया गया है। कहीं और भी जमीन नहीं दी जाएगी। - आरपी शर्मा, स्टेशन अधीक्षक
- सिटी स्टेशन पर घोड़ों के साथ खड़ा रहा शहाबुद्दीन
- बोला- मांगते थे एक लाख रुपये कहां से लाता
मेरठ। 100 साल पुराने तांगा स्टैंड को भले ही रेलवे ने जमींदोज कर दिया है, लेकिन प्रधान शाहबुद्दीन का मोह नही छूट रहा है। तपती दोपहरी में वह स्टेशन के बाहर अपने घोड़ों के साथ खड़ा रहा। दरअसल रेलवे ने बृहस्पतिवार को तांगा स्टैंड को जमींदोज कर दिया था। स्टैंड के चारों तरफ से फेंसिंग कर दी गई है। जिससे उस स्थान पर किसी का कब्ज़ा न हो सके।
शुक्रवार को शाहबुद्दीन रेलवे के गेस्ट हाउस के सामने अपनी बग्गी और घोड़ों के साथ वहां खड़ा रहा। प्रधान शाहबुद्दीन को अब भी रेलवे से उम्मीद है कि कोई स्थान उसके लिए दे दिया जाए। जिससे वह इन घोड़ों को रखकर अपना गुजारा चला सके। लेकिन रेलवे की तरफ से कोई भी स्थान देने के लिए साफ इंकार किया जा चुका है।
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एक लाख रुपये मांगते थे अधीक्षक
प्रधान का कहना है कि सिटी स्टेशन अधीक्षक आरपी शर्मा उससे एक लाख रुपये की मांग करते थे। उसने कहा कि डीआरएम के दौरे के समय अधीक्षक ही जानबूझकर तांगा स्टैंड को दिखाने के लिए लाए थे। शाहबुद्दीन का कहना है कि तेज़ धूप में घोड़े बिना किसी छत के खड़े है। इनकी बद्दुआ रेलवे के अधिकारियों को लगेगी। तेज धूप में घोड़ों के लिए पानी की व्यवस्था भी नहीं थी।
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आरोप बेबुनियाद
एक लाख रुपये मांगने के आरोप बेबुनियाद है। यह रेलवे की जमीन है, इसलिए तांगा स्टैंड को यहां से हटाया गया है। कहीं और भी जमीन नहीं दी जाएगी। - आरपी शर्मा, स्टेशन अधीक्षक