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नए सदस्य बनाने में सचिव गुट को फिर झटका
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नए सदस्य बनाने में सचिव गुट को फिर झटका
एलेक्जेंडर क्लब विवाद
डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज व चिट्स ने खारिज किया सदस्यता का प्रस्ताव
मौजूदा कार्यकारिणी को किया कालातीत घोषित
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर के प्रतिष्ठित एलेक्जेंडर एथलेटिक क्लब में बनाए गए नए सदस्यों की सदस्यता के प्रस्ताव को तीसरी बार निरस्त कर दिया गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज व चिट्स ने अपने आदेश में सदस्य बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है।
डिप्टी रजिस्ट्रार ने सचिव को यह निर्देश भी दिया है कि यदि कोई धनराशि प्राप्त की गई है तथा क्लब के खाते में अथवा कहीं अन्य अनुरक्षित रखें हो तो उन्हें शीघ्र वापस करते क्लब कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों को अवगत कराएं। इसके अलाव डिप्टी रजिस्ट्रार ने सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट की विहित प्रक्रिया के अंतर्गत मौजूद कार्यकारिणी को कालातीत घोषित किया है। इस आदेश के बाद क्लब के सचिव समेत पदाधिकारियों को एक बार फिर करारा झटका लगा है।
गत 29 मई को पारित किए गए अपने आदेश में डिप्टी रजिस्ट्रार ने माना है कि उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित किए गए मूल अभिलेख क्लब सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण इनके द्वारा की गई कार्यवाही अंगीकृत उपविधि (बाइलॉज) की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने के कारण मान्य किए जाने योग्य नहीं है। इसके चलते क्लब की कार्यकारिणी द्वारा पारित त्रुटिपूर्ण प्रस्ताव दिनांक 29 मई 2018 जिसमें सदस्य बनाए जाने का निर्णय लिया गया था, को निरस्त किया जाता है। डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश के अनुसार सचिव मुकेश गुप्ता ने 24 मई को दो अलग-अलग बैंकों की पास बुक, कार्यवाही रजिस्टर, एजेंडा रजिस्टर तो प्रस्तुत किए। लेकिन सदस्यता के संबंध में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। अभिलेखों में यह स्पष्ट नहीं है कि किस व्यक्ति के द्वारा किस प्रकार से धनराशि प्राप्त हुई है तथा किस प्रकार से खाते में जमा की गई है। क्योंकि जिन व्यक्तियों के नाम पर उल्लेख किया गया है, इसके संबंध में प्रस्तुत किए गए अभिलेखों से इनको सदस्य बनाए जाने के संबंध में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। जिन व्यक्तियों का शुल्क बैंक में जमा किया गया है, अभिलेखों से उनको सदस्य बनाये जाने के संबंध में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
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डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा क्लब के पंजीकृत नियमावली की विहित प्रक्रिया के अनुसार सदस्यता के संबंध में नियमों का पालन नहीं किया है। सचिव उपर्युक्त प्रक्रिया के संबंध में कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं प्रस्तुत कर सके हैं और न ही उनके पास कोई स्पष्ट प्रमाण है। इस प्रकार सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा पिक एड चूज प्रक्रिया का पालन करते हुए क्लब की सदस्यता प्रदान की गयी है, जिसमें सचिव का हित शामिल हो सकता है। लेकिन क्लब का हित शामिल नहीं है।
करीब एक साल से चल रहा प्रकरण
दरअसल क्लब में सदस्यता का मामला मई 2018 से चल रहा है। इससे पूर्व में भी डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज व चिट्स ने 30 अक्तूबर 2018 को सदस्यता निरस्त करने का आदेश पारित किए थे। लेकिन वहीं इस आदेश के खिलाफ सचिव मुकेश गुप्ता व आठ अन्य व्यक्तियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसको 31 जनवरी 2019 को दोनों पक्षों को सुनने के बाद वापस डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज व चिट्स को पुन: सुनवाई के लिए भेज दिया था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद 15 मार्च 2019 को डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में सदस्य बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त करते हुए एवं समस्त व्यक्तियों से प्राप्त धनराशि को तत्काल प्रभाव से वापस करने के भी निर्देश दिए थे। इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्रार ने बनाए गए सदस्यों एवं अन्य व्यक्तियों से लिए गए सदस्य बनाने संबंधी धनराशि का पूर्णता गोपन होना सिद्ध पाया था। इस आदेश के बाद क्लब के सचिव ने एक बार फिर अप्रैल में एक याचिका दायर कर डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश को चुनौती दी थी। इससे पूर्व 30 अक्तूबर 2018 के अपने आदेश में डिप्टी रजिस्ट्रार ने सदस्यता के प्रस्ताव को अवैध मानते हुए इसे निरस्त करने के आदेश पारित किए थे। इस आदेश के बाद एक बार फिर सचिव मुकेश गुप्ता व अन्य ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कई बिंदुओं पर अपनी टिप्पणी करते हुए अप्रैल में पुन: सुनवाई के लिए मामला डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजा था।
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एलेक्जेंडर क्लब विवाद
डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज व चिट्स ने खारिज किया सदस्यता का प्रस्ताव
मौजूदा कार्यकारिणी को किया कालातीत घोषित
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर के प्रतिष्ठित एलेक्जेंडर एथलेटिक क्लब में बनाए गए नए सदस्यों की सदस्यता के प्रस्ताव को तीसरी बार निरस्त कर दिया गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज व चिट्स ने अपने आदेश में सदस्य बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है।
डिप्टी रजिस्ट्रार ने सचिव को यह निर्देश भी दिया है कि यदि कोई धनराशि प्राप्त की गई है तथा क्लब के खाते में अथवा कहीं अन्य अनुरक्षित रखें हो तो उन्हें शीघ्र वापस करते क्लब कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों को अवगत कराएं। इसके अलाव डिप्टी रजिस्ट्रार ने सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट की विहित प्रक्रिया के अंतर्गत मौजूद कार्यकारिणी को कालातीत घोषित किया है। इस आदेश के बाद क्लब के सचिव समेत पदाधिकारियों को एक बार फिर करारा झटका लगा है।
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गत 29 मई को पारित किए गए अपने आदेश में डिप्टी रजिस्ट्रार ने माना है कि उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित किए गए मूल अभिलेख क्लब सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण इनके द्वारा की गई कार्यवाही अंगीकृत उपविधि (बाइलॉज) की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने के कारण मान्य किए जाने योग्य नहीं है। इसके चलते क्लब की कार्यकारिणी द्वारा पारित त्रुटिपूर्ण प्रस्ताव दिनांक 29 मई 2018 जिसमें सदस्य बनाए जाने का निर्णय लिया गया था, को निरस्त किया जाता है। डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश के अनुसार सचिव मुकेश गुप्ता ने 24 मई को दो अलग-अलग बैंकों की पास बुक, कार्यवाही रजिस्टर, एजेंडा रजिस्टर तो प्रस्तुत किए। लेकिन सदस्यता के संबंध में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। अभिलेखों में यह स्पष्ट नहीं है कि किस व्यक्ति के द्वारा किस प्रकार से धनराशि प्राप्त हुई है तथा किस प्रकार से खाते में जमा की गई है। क्योंकि जिन व्यक्तियों के नाम पर उल्लेख किया गया है, इसके संबंध में प्रस्तुत किए गए अभिलेखों से इनको सदस्य बनाए जाने के संबंध में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। जिन व्यक्तियों का शुल्क बैंक में जमा किया गया है, अभिलेखों से उनको सदस्य बनाये जाने के संबंध में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
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डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा क्लब के पंजीकृत नियमावली की विहित प्रक्रिया के अनुसार सदस्यता के संबंध में नियमों का पालन नहीं किया है। सचिव उपर्युक्त प्रक्रिया के संबंध में कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं प्रस्तुत कर सके हैं और न ही उनके पास कोई स्पष्ट प्रमाण है। इस प्रकार सचिव मुकेश गुप्ता द्वारा पिक एड चूज प्रक्रिया का पालन करते हुए क्लब की सदस्यता प्रदान की गयी है, जिसमें सचिव का हित शामिल हो सकता है। लेकिन क्लब का हित शामिल नहीं है।
करीब एक साल से चल रहा प्रकरण
दरअसल क्लब में सदस्यता का मामला मई 2018 से चल रहा है। इससे पूर्व में भी डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज व चिट्स ने 30 अक्तूबर 2018 को सदस्यता निरस्त करने का आदेश पारित किए थे। लेकिन वहीं इस आदेश के खिलाफ सचिव मुकेश गुप्ता व आठ अन्य व्यक्तियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसको 31 जनवरी 2019 को दोनों पक्षों को सुनने के बाद वापस डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज व चिट्स को पुन: सुनवाई के लिए भेज दिया था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद 15 मार्च 2019 को डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने आदेश में सदस्य बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त करते हुए एवं समस्त व्यक्तियों से प्राप्त धनराशि को तत्काल प्रभाव से वापस करने के भी निर्देश दिए थे। इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्रार ने बनाए गए सदस्यों एवं अन्य व्यक्तियों से लिए गए सदस्य बनाने संबंधी धनराशि का पूर्णता गोपन होना सिद्ध पाया था। इस आदेश के बाद क्लब के सचिव ने एक बार फिर अप्रैल में एक याचिका दायर कर डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश को चुनौती दी थी। इससे पूर्व 30 अक्तूबर 2018 के अपने आदेश में डिप्टी रजिस्ट्रार ने सदस्यता के प्रस्ताव को अवैध मानते हुए इसे निरस्त करने के आदेश पारित किए थे। इस आदेश के बाद एक बार फिर सचिव मुकेश गुप्ता व अन्य ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कई बिंदुओं पर अपनी टिप्पणी करते हुए अप्रैल में पुन: सुनवाई के लिए मामला डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजा था।