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रालोद ने सिवाल में दिखाया दम, सरधना में पिछड़ा
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सिवालखास में दिखाया दम, सरधना में पिछड़ा
मेरठ। लोकसभा चुनाव में रालोद ने बागपत संसदीय सीट की सिवालखास विधानसभा सीट पर जहां पूरा दम दिखाया, वहीं मुजफ्फरनगर संसदीय सीट की सरधना विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा। सिवालखास की बढ़त से जहां रालोद ने मोदीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा को मिली लीड की भरपाई की, वहीं सरधना सीट पर सात हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। यहां से मिली हार ही चौधरी अजित सिंह की हार का सबसे बड़ा कारण बनी।
एक जमाने में सिवालखास विधानसभा सीट को रालोद का गढ़ माना जाता था। यह जब तक सुरक्षित सीट रही तब तक इस सीट पर अधिकतर रालोद ने कब्जा रखा। लेकिन वर्ष 2012 में सीट के सामान्य होने के बाद यहां से पहले सपा ने और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने विजय पताका फहराई। लेकिन लोकसभा चुनाव में रालोद को सपा-बसपा गठबंधन के साथ रहने का पूरा फायदा मिला। रालोद को इस सीट से 127 981 वोट मिले, जबकि भाजपा को 92825 वोट ही मिल सके। रालोद के जयंत चौधरी ने इस सीट पर भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह पर 35156 की लीड बनाई। इस लीड से रालोद ने मोदीनगर विधानसभा में करीब 34 हजार वोटों से पिछड़ने की भरपाई की।
दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट की सरधना विधानसभा सीट पर भी सबकी नजर लगी थी। रालोद को इस सीट से अच्छी खासी बढ़त की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी को यहां 7127 वोट से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान को 117530 वोट मिले और रालोद प्रत्याशी चौधरी अजित सिंह को 110403 वोट प्राप्त हुए। चौधरी अजित सिंह 6526 वोट से हारे। सरधना की सात हजार वोटों की लीड ही डॉ. संजीव बालियान की जीत के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।
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मेरठ। लोकसभा चुनाव में रालोद ने बागपत संसदीय सीट की सिवालखास विधानसभा सीट पर जहां पूरा दम दिखाया, वहीं मुजफ्फरनगर संसदीय सीट की सरधना विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा। सिवालखास की बढ़त से जहां रालोद ने मोदीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा को मिली लीड की भरपाई की, वहीं सरधना सीट पर सात हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। यहां से मिली हार ही चौधरी अजित सिंह की हार का सबसे बड़ा कारण बनी।
एक जमाने में सिवालखास विधानसभा सीट को रालोद का गढ़ माना जाता था। यह जब तक सुरक्षित सीट रही तब तक इस सीट पर अधिकतर रालोद ने कब्जा रखा। लेकिन वर्ष 2012 में सीट के सामान्य होने के बाद यहां से पहले सपा ने और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने विजय पताका फहराई। लेकिन लोकसभा चुनाव में रालोद को सपा-बसपा गठबंधन के साथ रहने का पूरा फायदा मिला। रालोद को इस सीट से 127 981 वोट मिले, जबकि भाजपा को 92825 वोट ही मिल सके। रालोद के जयंत चौधरी ने इस सीट पर भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह पर 35156 की लीड बनाई। इस लीड से रालोद ने मोदीनगर विधानसभा में करीब 34 हजार वोटों से पिछड़ने की भरपाई की।
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दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट की सरधना विधानसभा सीट पर भी सबकी नजर लगी थी। रालोद को इस सीट से अच्छी खासी बढ़त की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी को यहां 7127 वोट से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान को 117530 वोट मिले और रालोद प्रत्याशी चौधरी अजित सिंह को 110403 वोट प्राप्त हुए। चौधरी अजित सिंह 6526 वोट से हारे। सरधना की सात हजार वोटों की लीड ही डॉ. संजीव बालियान की जीत के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।
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