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आस्था की आड़ में हुआ लाखों-करोड़ों का कारोबार
Updated Sat, 24 Nov 2018 02:31 AM IST
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माफिया से जमकर किया रेत का खनन
मवाना। मखदूमपुर गंगा घाट पर जिला पंचायत द्वारा लगाए मेले में इस बार भी जमकर रेत खनन हुआ। माफिया ने आस्था की आड़ में गंगा का सीना चीर लाखों रुपये कमाए। इससे खनन पर रोक लगाने के प्रशासनिक दावे खोखले साबित हुए।
मखदूमपुर मेले का रेत खनन माफिया इंतजार करते हैं। दरअसल मखदूमपुर में गंगा घाट पर हर वर्ष जिला पंचायत द्वारा लाखों का बजट पास कर मेला लगाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की आड़ लेकर खनन माफिया कारोबार करते हैं। इस बार मेले के दो दिन घटा दिए गए, लेकिन खनन माफिया ने जमकर रेत खनन किया। मेले के आयोजन से पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक लेकर रेत खनन करने वाले माफिया पर लगाम लगाने के निर्देश दिए थे। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ही माफिया ने लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे किए। शुक्रवार को मेला खत्म होने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रेत भरकर ले जाया जा रहा था। कई ट्रैक्टर के धंस जाने पर पुलिस उन्हें निकलवाती नजर आई। पहले दिन से ही माफिया ने रेत का खनन करना शुरू कर दिया था, जबकि प्रदेश सरकार ने गंगा व नहर से रेत खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है। सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर मेले में आखिर किसकी शह पर खनन होता है। हर साल माफिया लाखों-करोड़ों का रेत खनन करके ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरकर ले जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत लेकर जा रहे एक व्यक्ति ने बताया कि रेत से भरे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की कीमत 9 से 10 हजार रुपये है। एक ट्रैक्टर 24 घंटे में लगभग 10 से 12 चक्कर आसानी से लगा देता है। मेले के अंत में जाम के कारण संख्या थोड़ी घट जाती है। दिनभर रेत से लदी ट्रॉलियों से उड़ती धूल के कारण लोगों का बुरा हाल रहा।
आस्था की आड़ में कुछ माफिया ने मेले में खनन का कारोबार बना लिया है। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाएगा। जिससे अगले वर्ष मेले के दौरान रेत का खनन न हो सके।-अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
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मवाना। मखदूमपुर गंगा घाट पर जिला पंचायत द्वारा लगाए मेले में इस बार भी जमकर रेत खनन हुआ। माफिया ने आस्था की आड़ में गंगा का सीना चीर लाखों रुपये कमाए। इससे खनन पर रोक लगाने के प्रशासनिक दावे खोखले साबित हुए।
मखदूमपुर मेले का रेत खनन माफिया इंतजार करते हैं। दरअसल मखदूमपुर में गंगा घाट पर हर वर्ष जिला पंचायत द्वारा लाखों का बजट पास कर मेला लगाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की आड़ लेकर खनन माफिया कारोबार करते हैं। इस बार मेले के दो दिन घटा दिए गए, लेकिन खनन माफिया ने जमकर रेत खनन किया। मेले के आयोजन से पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक लेकर रेत खनन करने वाले माफिया पर लगाम लगाने के निर्देश दिए थे। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ही माफिया ने लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे किए। शुक्रवार को मेला खत्म होने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रेत भरकर ले जाया जा रहा था। कई ट्रैक्टर के धंस जाने पर पुलिस उन्हें निकलवाती नजर आई। पहले दिन से ही माफिया ने रेत का खनन करना शुरू कर दिया था, जबकि प्रदेश सरकार ने गंगा व नहर से रेत खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है। सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर मेले में आखिर किसकी शह पर खनन होता है। हर साल माफिया लाखों-करोड़ों का रेत खनन करके ट्रैक्टर ट्रॉलियों में भरकर ले जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत लेकर जा रहे एक व्यक्ति ने बताया कि रेत से भरे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की कीमत 9 से 10 हजार रुपये है। एक ट्रैक्टर 24 घंटे में लगभग 10 से 12 चक्कर आसानी से लगा देता है। मेले के अंत में जाम के कारण संख्या थोड़ी घट जाती है। दिनभर रेत से लदी ट्रॉलियों से उड़ती धूल के कारण लोगों का बुरा हाल रहा।
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आस्था की आड़ में कुछ माफिया ने मेले में खनन का कारोबार बना लिया है। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाएगा। जिससे अगले वर्ष मेले के दौरान रेत का खनन न हो सके।-अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
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