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कोआपरेटिव बैंक में किसानो की भीड जुटी
Updated Thu, 21 Jun 2018 06:47 PM IST
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बहसूमा। सहकारी समितियों से किसानों द्वारा लिये गए ऋण को जमा करने की आखिरी तारीख 30 जून होने की वजह से को-आपरेटिव बैंक में बृहस्पतिवार को दिनभर भीड़ रही।
गौरतलब है कि सहकारी समितियों में किसानों ने खाद, बीज एवं कृषि उपकरण संबंधी मद में ऋण ले रखा है। उसे जून में जमा करना पड़ता है। मवाना मिल से जुडे़ किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान नहीं मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि लोन जमा करने की आखिरी तारीख 30 जून है। किसानों की भीड़ के चलते बैंक में पैर रखने तक की जगह बड़ी मुश्किल से मिली।
कोआपरेटिव बैंक से महमूदपुर सिखेड़ा सहकारी समिति और मौड़ खुर्द सहकारी समिति जुड़ी हैं। दोनों समितियों से लगभग तीन हजार किसान जुडे़ हैं। वहीं, इस संबंध में कोआपरेटिव बैंक शाखा प्रबंधक संतोष कुमार का कहना है। किसान ऋण की अदला-बदली करने में जुटे हैं। किसान महेंद्र सिंह, डॉ. ऋषिपाल, ईश्वर सिंह और सुरेशपाल सिंह ढाका का कहना है कि प्रदेश सरकार ने गत चुनावी घोषणापत्र में फसली ऋण माफ करने की बात कही थी, लेकिन किसानों का आज तक ऋण माफ नहीं हुआ है। यह किसानों के साथ छल से कम नहीं है।
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गौरतलब है कि सहकारी समितियों में किसानों ने खाद, बीज एवं कृषि उपकरण संबंधी मद में ऋण ले रखा है। उसे जून में जमा करना पड़ता है। मवाना मिल से जुडे़ किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान नहीं मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि लोन जमा करने की आखिरी तारीख 30 जून है। किसानों की भीड़ के चलते बैंक में पैर रखने तक की जगह बड़ी मुश्किल से मिली।
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कोआपरेटिव बैंक से महमूदपुर सिखेड़ा सहकारी समिति और मौड़ खुर्द सहकारी समिति जुड़ी हैं। दोनों समितियों से लगभग तीन हजार किसान जुडे़ हैं। वहीं, इस संबंध में कोआपरेटिव बैंक शाखा प्रबंधक संतोष कुमार का कहना है। किसान ऋण की अदला-बदली करने में जुटे हैं। किसान महेंद्र सिंह, डॉ. ऋषिपाल, ईश्वर सिंह और सुरेशपाल सिंह ढाका का कहना है कि प्रदेश सरकार ने गत चुनावी घोषणापत्र में फसली ऋण माफ करने की बात कही थी, लेकिन किसानों का आज तक ऋण माफ नहीं हुआ है। यह किसानों के साथ छल से कम नहीं है।
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