{"_id":"5b0ae7624f1c1b916e8b4eac","slug":"152744125612-mawana-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौ. राकेश टिकैत ने भाकियू ने कहा कि किसानों के लिए विकट समय है। एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चौ. राकेश टिकैत ने भाकियू ने कहा कि किसानों के लिए विकट समय है। एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है।
Updated Sun, 27 May 2018 10:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मवाना। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आज बदतर हालात से गुजर रहा है। संगठित होकर संघर्ष करने से ही किसान की जान बच सकती है। सभी नीतियां किसान विरोधी लाई जा रही हैं। जिससे किसान का खेती से मोह भंग हो जाए तथा एक मजदूर की तरह जीवन बिताए।
राकेश टिकैत ने उक्त विचार बतौर मुख्य अतिथि कृषक इंटर कॉलेज में आयोजित चौ. महेंद्र सिंह टिकैत के स्मृति दिवस आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अभी तो गन्ने का भाव ही नहीं दे रहे हैं। यह बहुत बड़ी चाल है। मिलें चाहती हैं कि आंदोलन किसान करे, गन्ना मिलें खरीदें तथा भुगतान सरकार करे। कुछ मिलें तो आंदोलन के लिए बसें तक देने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि हर किसी की नीति है कि किसान को कर्ज में इस कदर डूबो दे कि वह विवश होकर अपनी जमीन देने को तैयार हो जाए। षड्यंत्र है कि यहां फैक्ट्री लगे और किसान मजदूरी करें। इसी कारण इस प्रकार की नीतियां लागू की जा रही हैं कि किसान खेती से पलायन कर शहर की ओर जाए। यदि हमें जमीन बचानी है तो हमें अपने बच्चों को इस जमीन से फिजिकल अटैंचमेंट करना पडे़गा। अटैंचमेंट नहीं रहा तो जमीन बिकेगी। उन्होंने बताया कि किसान को गुलाम बनाने की तैयारी है। विदेशी कंपनियों को ठेके पर खेती लेकर करने की अनुमति देने का षड्यंत्र चल रहा है। कुछ ही दिनों में अंधाधुंध उत्पादन लेकर जमीन को बंजर कर चलती बनेंगी। उन्होंने इस संबंध में विदेशों का उदाहरण भी दिया तथा कहा कि जो नए बीज लाए जा रहे हैं वे किसान को बर्बाद कर रहे हैं। इसका उदाहरण है कि एक बीज के कारण महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसानों ने आत्महत्या की। उन्होंने नए बीजों के नुकसान गिनाए तथा कहा कि आज इसी कारण हमारे पशु भी बांझपन का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव-गांव 11-11 सदस्यों की समिति बनाई जाए। यहां जब आवश्यकता हो पहुंचकर सहयोग दें। कार्यक्रम का आयोजन शो सिंह ग्राम प्रधान मुबारिकपुर ने किया। कार्यक्रम में नरेश, हरवीर सिंह निलौहा, जगपाल सिंह, प्रमोद, सलीम अहमद, संजय. वीरेंद्र सिंह, विलियम, मदन गुदारा, लोकेश सिरोही, अरुण कुमार, राकेश दौरालिया, जगवीर सिंह, कुलदीप त्यागी, रविंद्र दौरालिया, संजय सिंह आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
देश को बडे़ आंदोलन की जरूरत
राकेश टिकैत ने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि चुनाव आ रहे हैं। सरकारें जो कुछ दे सकती हैं वे चुनाव के नजदीक आने पर ही दे सकती हैं। इसलिए 16,17,18 में हरिद्वार में होने वाली बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। इस समय देश को बडे़ आंदोलन की आवश्यकता है। जिस प्रकार 10 साल पुराने ट्रैक्टर आदि किसानों के यंत्रों को प्रतिबंधित किया जा रहा है उसके लिए आंदोलन कर सरकार से मांग की जाएगी कि या तो सरकार किसानों के लिए 50 हजार करोड़ की व्यवस्था करे या कानून में संशोधन करे। बैठक में गन्ने आदि की समस्या तथा उसके लिए आंदोलन करने की भी रणनीति तैयार की जाएगी।
इस्मा ने बंटवाए पेंपलेट
कार्यक्रम का संचालन कर रहे हरवीर सिंह निलौहा ने कहा कि मवाना शुगर मिल द्वारा इस प्रकार के पेंपलेट गांवों में वितरित किए जा रहे हैं। जिसमें फैक्ट्री की आर्थिक स्थिति को विकट बताते हुए किसानों के गन्ना भुगतान से 20 प्रतिशत की कटौती कर मिल कर्मचारियों का भुगतान करने तथा सर्वे नहीं करने तथा आगामी सत्र में मिल नहीं चलाने की धमकी दी जा रही है। इस संबंध में मिल के अति गन्ना महाप्रबंधक प्रमोद बालियान का कहना है मिल द्वारा ऐसी कोई कटौती करने की पेंपलेट नहीं बांटे गए हैं। यह अफवाह है। इस्मा संगठन की ओर से पेंपलेट अवश्य बांटे गए हैं। उसमें मिलों की स्थिति से किसानों को अवगत कराया गया है।
बैठने के लिए कुर्सी नहीं दी
कार्यक्रम में भाकियू के तहसील अध्यक्ष नरेश कुमार को मंच पर स्थान नहीं मिलने तथा बोलने के लिए भी समय नहीं दिया जाना चर्चा का विषय रहा। इस संबंध में नरेश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रवक्ता के सामने कुर्सी पर बैठना मेरे लिए अच्छा नहीं था। उनकी अगुवाई में खड़ा था।
मुख्य बातें
मवाना के कृषक इंटर कॉलेज में चौ. महेंद्र सिंह टिकैत के स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजित
विज्ञापन
राकेश टिकैत ने उक्त विचार बतौर मुख्य अतिथि कृषक इंटर कॉलेज में आयोजित चौ. महेंद्र सिंह टिकैत के स्मृति दिवस आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अभी तो गन्ने का भाव ही नहीं दे रहे हैं। यह बहुत बड़ी चाल है। मिलें चाहती हैं कि आंदोलन किसान करे, गन्ना मिलें खरीदें तथा भुगतान सरकार करे। कुछ मिलें तो आंदोलन के लिए बसें तक देने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हर किसी की नीति है कि किसान को कर्ज में इस कदर डूबो दे कि वह विवश होकर अपनी जमीन देने को तैयार हो जाए। षड्यंत्र है कि यहां फैक्ट्री लगे और किसान मजदूरी करें। इसी कारण इस प्रकार की नीतियां लागू की जा रही हैं कि किसान खेती से पलायन कर शहर की ओर जाए। यदि हमें जमीन बचानी है तो हमें अपने बच्चों को इस जमीन से फिजिकल अटैंचमेंट करना पडे़गा। अटैंचमेंट नहीं रहा तो जमीन बिकेगी। उन्होंने बताया कि किसान को गुलाम बनाने की तैयारी है। विदेशी कंपनियों को ठेके पर खेती लेकर करने की अनुमति देने का षड्यंत्र चल रहा है। कुछ ही दिनों में अंधाधुंध उत्पादन लेकर जमीन को बंजर कर चलती बनेंगी। उन्होंने इस संबंध में विदेशों का उदाहरण भी दिया तथा कहा कि जो नए बीज लाए जा रहे हैं वे किसान को बर्बाद कर रहे हैं। इसका उदाहरण है कि एक बीज के कारण महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसानों ने आत्महत्या की। उन्होंने नए बीजों के नुकसान गिनाए तथा कहा कि आज इसी कारण हमारे पशु भी बांझपन का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव-गांव 11-11 सदस्यों की समिति बनाई जाए। यहां जब आवश्यकता हो पहुंचकर सहयोग दें। कार्यक्रम का आयोजन शो सिंह ग्राम प्रधान मुबारिकपुर ने किया। कार्यक्रम में नरेश, हरवीर सिंह निलौहा, जगपाल सिंह, प्रमोद, सलीम अहमद, संजय. वीरेंद्र सिंह, विलियम, मदन गुदारा, लोकेश सिरोही, अरुण कुमार, राकेश दौरालिया, जगवीर सिंह, कुलदीप त्यागी, रविंद्र दौरालिया, संजय सिंह आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
देश को बडे़ आंदोलन की जरूरत
राकेश टिकैत ने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि चुनाव आ रहे हैं। सरकारें जो कुछ दे सकती हैं वे चुनाव के नजदीक आने पर ही दे सकती हैं। इसलिए 16,17,18 में हरिद्वार में होने वाली बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। इस समय देश को बडे़ आंदोलन की आवश्यकता है। जिस प्रकार 10 साल पुराने ट्रैक्टर आदि किसानों के यंत्रों को प्रतिबंधित किया जा रहा है उसके लिए आंदोलन कर सरकार से मांग की जाएगी कि या तो सरकार किसानों के लिए 50 हजार करोड़ की व्यवस्था करे या कानून में संशोधन करे। बैठक में गन्ने आदि की समस्या तथा उसके लिए आंदोलन करने की भी रणनीति तैयार की जाएगी।
इस्मा ने बंटवाए पेंपलेट
कार्यक्रम का संचालन कर रहे हरवीर सिंह निलौहा ने कहा कि मवाना शुगर मिल द्वारा इस प्रकार के पेंपलेट गांवों में वितरित किए जा रहे हैं। जिसमें फैक्ट्री की आर्थिक स्थिति को विकट बताते हुए किसानों के गन्ना भुगतान से 20 प्रतिशत की कटौती कर मिल कर्मचारियों का भुगतान करने तथा सर्वे नहीं करने तथा आगामी सत्र में मिल नहीं चलाने की धमकी दी जा रही है। इस संबंध में मिल के अति गन्ना महाप्रबंधक प्रमोद बालियान का कहना है मिल द्वारा ऐसी कोई कटौती करने की पेंपलेट नहीं बांटे गए हैं। यह अफवाह है। इस्मा संगठन की ओर से पेंपलेट अवश्य बांटे गए हैं। उसमें मिलों की स्थिति से किसानों को अवगत कराया गया है।
बैठने के लिए कुर्सी नहीं दी
कार्यक्रम में भाकियू के तहसील अध्यक्ष नरेश कुमार को मंच पर स्थान नहीं मिलने तथा बोलने के लिए भी समय नहीं दिया जाना चर्चा का विषय रहा। इस संबंध में नरेश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रवक्ता के सामने कुर्सी पर बैठना मेरे लिए अच्छा नहीं था। उनकी अगुवाई में खड़ा था।
मुख्य बातें
मवाना के कृषक इंटर कॉलेज में चौ. महेंद्र सिंह टिकैत के स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजित