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ऐतिहासिक चर्च में ईस्टर पर विशेष प्रार्थना का आयोजन
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प्रभु यीशु के जीवित होते ही बज उठे घंटे घटियाल
- सरधना चर्च में ईस्टर पर हुई विशेष प्रार्थना
सरधना। ऐतिहासिक चर्च में शनिवार रात चर्च में ईस्टर की पूर्व संध्या पर फादर ने पवित्र अग्नि की आशीष दी। इसके बाद विश्वासियों ने पास्का मोमबत्ती जलाई और जुलूस के रूप में चर्च के अंदर पहुंचे। इस दौरान चर्च में मिस्सा बलिदान का आयोजन किया गया। फादर ने बप्तिस्मा की प्रतिज्ञाओं को दोहराया और श्रद्धालुओं को पवित्र जल दिया। सभी ने प्रभु यीशु के जीवित होते ही एक दूसरे को ईस्टर की बधाई दी। सुबह के समय भी चर्च में ईस्टर पर विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया।
चर्च में फादर ने प्रभु यीशु के जीवित होते ही विशेष प्रार्थना कराई ओर मिस्सा बलिदान कराया। इसी में रविवार को ईसाई धर्म के लोग ईस्टर का त्योहार मनाते हैं। इस दिन प्रभु यीशु मृत्यु के तीन दिन बाद पुनर्जीवित हुए थे। फादर ने अंगीठी में अग्नि जलाकर उसको पवित्र किया। फादर ने अंगीठी की आग से पास्का मोमबत्ती जलाई। इस मोमबत्ती से सभी श्रद्धालुओं ने अपनी मोमबत्ती जलाकर आशीष ली। चर्च के अंदर फादर ने बाल्टी में रखे जल को आग से पवित्र करते हुए आशीष की प्रार्थना पढ़ी। मिस्सा बलिदान चढ़ाया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने बप्तिस्मा की प्रतिज्ञाओं को दोहराया। प्रार्थना में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रार्थना फादर पॉक्या नाथन व फादर ससिन बाबू ने कराई।
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- सरधना चर्च में ईस्टर पर हुई विशेष प्रार्थना
सरधना। ऐतिहासिक चर्च में शनिवार रात चर्च में ईस्टर की पूर्व संध्या पर फादर ने पवित्र अग्नि की आशीष दी। इसके बाद विश्वासियों ने पास्का मोमबत्ती जलाई और जुलूस के रूप में चर्च के अंदर पहुंचे। इस दौरान चर्च में मिस्सा बलिदान का आयोजन किया गया। फादर ने बप्तिस्मा की प्रतिज्ञाओं को दोहराया और श्रद्धालुओं को पवित्र जल दिया। सभी ने प्रभु यीशु के जीवित होते ही एक दूसरे को ईस्टर की बधाई दी। सुबह के समय भी चर्च में ईस्टर पर विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया।
चर्च में फादर ने प्रभु यीशु के जीवित होते ही विशेष प्रार्थना कराई ओर मिस्सा बलिदान कराया। इसी में रविवार को ईसाई धर्म के लोग ईस्टर का त्योहार मनाते हैं। इस दिन प्रभु यीशु मृत्यु के तीन दिन बाद पुनर्जीवित हुए थे। फादर ने अंगीठी में अग्नि जलाकर उसको पवित्र किया। फादर ने अंगीठी की आग से पास्का मोमबत्ती जलाई। इस मोमबत्ती से सभी श्रद्धालुओं ने अपनी मोमबत्ती जलाकर आशीष ली। चर्च के अंदर फादर ने बाल्टी में रखे जल को आग से पवित्र करते हुए आशीष की प्रार्थना पढ़ी। मिस्सा बलिदान चढ़ाया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने बप्तिस्मा की प्रतिज्ञाओं को दोहराया। प्रार्थना में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रार्थना फादर पॉक्या नाथन व फादर ससिन बाबू ने कराई।
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