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कूड़े की पहाड़ी का निगम को कल एनजीटी में देना होगा जवाब
Updated Sun, 04 Mar 2018 02:36 AM IST
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एनजीटी में सुनवाई कल, निगम पर लग सकता है जुर्माना
मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी के निस्तारण का मामला एनजीटी में भी चल रहा है। सोमवार को एनजीटी इसपर सुनवाई करेगा। वहीं आरटीआई कार्यकर्ता ने अमर उजाला द्वारा कूड़े की पहाड़ी को लेकर चलाए गए अभियान का रिकॉर्ड न्यायालय के सामने रखने को फाइल तैयार कर ली है। जिसमें कमिश्नर के पत्र का भी हवाला दिया गया है। माना जा रहा है कि झूठे हलफनामों के कारण एनजीटी नगर निगम प्रशासन पर भारी जुर्माना लग सकता है।
लोगों का है बुरा हाल
शहर के बीच नगर निगम ने मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ियां बना दी है। पहाड़ी के बराबर में ही मृत पशुओं की खाल उतारने का काम भी हो रहा है। कूड़े और पशुओं के अवशेष से निकलने वाली दुर्गंध से लोगों का बुरा हाल है। जहां प्रदूषण से क्षेत्र की हरियाली खत्म हो रही है वहीं बीमारी भी फैल रही है। नगर निगम प्रशासन की तरफ से अभी तक कूड़ा निस्तारण को लेकर कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट मे दिया था हलफनामा
शहर का कूड़ा शहर में ही डाले जाने का मामला एनजीटी में ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट में भी चल रहा है। पिछले दिनों नगर निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था कि 90 दिन के भीतर मामले का निस्तारण कर दिया जाएगा। हलफनामा दिए 180 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक हुआ कुछ नहीं। वहीं एनजीटी में जवाब देने के लिए नगर निगम प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी हैं। शनिवार को नगर निगम के अधिकारी कागजी कार्रवाई में जुटे रहे।
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नहीं डाला जा रहा कूड़ा
एनजीटी में सोमवार को सुनवाई है। निगम अपना पक्ष रखेगा। कूड़ा निस्तारण शीघ्र होने वाला है। फिलहाल कूड़ा डलना बंद है। डा. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
निगम बोल रहा झूठ
नगर निगम प्रशासन बार बार न्यायालय के सामने भी झूठ बोल रहा है। हमने कमिश्नर के पत्र के साथ साथ अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों का भी संकलन किया है। ताकि न्यायालय में प्रस्तुत करके निगम प्रशासन की असलियत बताई जा सके। लोकेश खुराना, आरटीआई कार्यकर्ता
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मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी के निस्तारण का मामला एनजीटी में भी चल रहा है। सोमवार को एनजीटी इसपर सुनवाई करेगा। वहीं आरटीआई कार्यकर्ता ने अमर उजाला द्वारा कूड़े की पहाड़ी को लेकर चलाए गए अभियान का रिकॉर्ड न्यायालय के सामने रखने को फाइल तैयार कर ली है। जिसमें कमिश्नर के पत्र का भी हवाला दिया गया है। माना जा रहा है कि झूठे हलफनामों के कारण एनजीटी नगर निगम प्रशासन पर भारी जुर्माना लग सकता है।
लोगों का है बुरा हाल
शहर के बीच नगर निगम ने मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ियां बना दी है। पहाड़ी के बराबर में ही मृत पशुओं की खाल उतारने का काम भी हो रहा है। कूड़े और पशुओं के अवशेष से निकलने वाली दुर्गंध से लोगों का बुरा हाल है। जहां प्रदूषण से क्षेत्र की हरियाली खत्म हो रही है वहीं बीमारी भी फैल रही है। नगर निगम प्रशासन की तरफ से अभी तक कूड़ा निस्तारण को लेकर कोई ठोस कार्य नहीं किया गया है।
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हाईकोर्ट मे दिया था हलफनामा
शहर का कूड़ा शहर में ही डाले जाने का मामला एनजीटी में ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट में भी चल रहा है। पिछले दिनों नगर निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था कि 90 दिन के भीतर मामले का निस्तारण कर दिया जाएगा। हलफनामा दिए 180 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक हुआ कुछ नहीं। वहीं एनजीटी में जवाब देने के लिए नगर निगम प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी हैं। शनिवार को नगर निगम के अधिकारी कागजी कार्रवाई में जुटे रहे।
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नहीं डाला जा रहा कूड़ा
एनजीटी में सोमवार को सुनवाई है। निगम अपना पक्ष रखेगा। कूड़ा निस्तारण शीघ्र होने वाला है। फिलहाल कूड़ा डलना बंद है। डा. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
निगम बोल रहा झूठ
नगर निगम प्रशासन बार बार न्यायालय के सामने भी झूठ बोल रहा है। हमने कमिश्नर के पत्र के साथ साथ अमर उजाला में प्रकाशित समाचारों का भी संकलन किया है। ताकि न्यायालय में प्रस्तुत करके निगम प्रशासन की असलियत बताई जा सके। लोकेश खुराना, आरटीआई कार्यकर्ता