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नये परिसीमन में गायब थे शहर के 406 कालोनी और मौहल्ले
Updated Thu, 23 Nov 2017 09:10 PM IST
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मेरठ।
नगर निगम चुनाव हो चुका है। हालांकि मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों पर छिड़ी बहस से रार बढ़ती दिख रही है। यह मामला अब राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष जाता नजर आ रहा है। इस घोर लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है इस पर भी सवाल उठ रहा है। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी इस मामले को पांच माह पहले राज्य निर्वाचन आयुक्त से लेकर स्थानीय प्रशासन के सामने उठा चुके हैं। वहीं, अकेला पड़ जाने के कारण उनकी सुनवाई नहीं हुई। नतीजतन शहर के करीब दो लाख मतदाता मतदान से वंचित रह गए हैं।
वाजपेयी ने उठाया था मुद्दा
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने रजिस्ट्री विभाग से शहर की कॉलोनियों और मोहल्लों की सूची ली थी। इसके बाद नगर निगम के परिसीमन की पत्रावली से मिलान किया। जिसमें पाया कि शहर की 406 कॉलोनी और मोहल्ले नए परिसीमन में गायब हैं। उन्होंने वोटर लिस्ट देखी तो नए परिसीमन में सबकुछ गायब मिला।
इस बाबत उन्होंने बीती 18 मई को राज्य निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखा। जिस पर तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने कहा कि जो कॉलोनी गायब हैं, उनको किस तरह नए परिसीमन में शामिल किया जाए, इसका चार्ट बनाकर उपलब्ध कराएं। इसके बाद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने वार्डवार छूटी कॉलोनियों और मोहल्लों को उनके निकट की कालोनियों में शामिल कर चार्ट बनाकर सौंपा था।
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नहीं हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले पर राज्य निर्वाचन आयोग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक चुप्पी साधकर बैठ गया। वहीं, भाजपा के स्थानीय संगठन ने भी ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप तमाम वोटर सूची से गायब हो गए। डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि 2017 की नगर निगम वोटर लिस्ट में करीब दो लाख मतदाताओं का खेल हुआ। जिसमें आधे से ज्यादा वोटर अपने वर्तमान निवास से दूसरे वार्ड की वोटर लिस्ट में पहुंच गए। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से गायब हो गए।
बीएलओ से लेकर एसडीएम तक जिम्मेदार
इस प्रकरण में बीएलओ से लेकर एसडीएम तक जिम्मेदार हैं। बीएलओ ने घर-घर जाकर वोट का सत्यापन करके मतदाता सूची तैयार की तथा अपने हस्ताक्षर से प्रमाणित करके सौंपी थीं। वहीं, एसडीएम को सूची से 10 फीसदी मतदाताओं की रैंडम जांच के बाद स्वीकृति देनी थी। बीएलओ ने एक ही जगह बैठकर वोटर लिस्ट बना दी, तो एसडीएम स्तर से भी इसे बिना परखे स्वीकृति दे दी।
राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जायेगी शिकायत
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने जनता से अपील की कि जिनकी वोट लिस्ट से गायब हैं वे उन तक शिकायत पहुंचाएं। जिससे साक्ष्यों के साथ दस दिन के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय कराई जा सके।
मुख्य बातें
भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने परिसीमन और मतदाता सूची को लेकर पांच माह पूर्व उठाई थी आवाज
प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान और भाजपाई भी कर गए थे किनारा
नगर निगम चुनाव में करीब दो लाख वोटर सीधे प्रभावित
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नगर निगम चुनाव हो चुका है। हालांकि मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों पर छिड़ी बहस से रार बढ़ती दिख रही है। यह मामला अब राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष जाता नजर आ रहा है। इस घोर लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है इस पर भी सवाल उठ रहा है। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी इस मामले को पांच माह पहले राज्य निर्वाचन आयुक्त से लेकर स्थानीय प्रशासन के सामने उठा चुके हैं। वहीं, अकेला पड़ जाने के कारण उनकी सुनवाई नहीं हुई। नतीजतन शहर के करीब दो लाख मतदाता मतदान से वंचित रह गए हैं।
वाजपेयी ने उठाया था मुद्दा
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने रजिस्ट्री विभाग से शहर की कॉलोनियों और मोहल्लों की सूची ली थी। इसके बाद नगर निगम के परिसीमन की पत्रावली से मिलान किया। जिसमें पाया कि शहर की 406 कॉलोनी और मोहल्ले नए परिसीमन में गायब हैं। उन्होंने वोटर लिस्ट देखी तो नए परिसीमन में सबकुछ गायब मिला।
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इस बाबत उन्होंने बीती 18 मई को राज्य निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखा। जिस पर तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने कहा कि जो कॉलोनी गायब हैं, उनको किस तरह नए परिसीमन में शामिल किया जाए, इसका चार्ट बनाकर उपलब्ध कराएं। इसके बाद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने वार्डवार छूटी कॉलोनियों और मोहल्लों को उनके निकट की कालोनियों में शामिल कर चार्ट बनाकर सौंपा था।
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नहीं हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले पर राज्य निर्वाचन आयोग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक चुप्पी साधकर बैठ गया। वहीं, भाजपा के स्थानीय संगठन ने भी ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप तमाम वोटर सूची से गायब हो गए। डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि 2017 की नगर निगम वोटर लिस्ट में करीब दो लाख मतदाताओं का खेल हुआ। जिसमें आधे से ज्यादा वोटर अपने वर्तमान निवास से दूसरे वार्ड की वोटर लिस्ट में पहुंच गए। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से गायब हो गए।
बीएलओ से लेकर एसडीएम तक जिम्मेदार
इस प्रकरण में बीएलओ से लेकर एसडीएम तक जिम्मेदार हैं। बीएलओ ने घर-घर जाकर वोट का सत्यापन करके मतदाता सूची तैयार की तथा अपने हस्ताक्षर से प्रमाणित करके सौंपी थीं। वहीं, एसडीएम को सूची से 10 फीसदी मतदाताओं की रैंडम जांच के बाद स्वीकृति देनी थी। बीएलओ ने एक ही जगह बैठकर वोटर लिस्ट बना दी, तो एसडीएम स्तर से भी इसे बिना परखे स्वीकृति दे दी।
राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जायेगी शिकायत
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने जनता से अपील की कि जिनकी वोट लिस्ट से गायब हैं वे उन तक शिकायत पहुंचाएं। जिससे साक्ष्यों के साथ दस दिन के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय कराई जा सके।
मुख्य बातें
भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने परिसीमन और मतदाता सूची को लेकर पांच माह पूर्व उठाई थी आवाज
प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान और भाजपाई भी कर गए थे किनारा
नगर निगम चुनाव में करीब दो लाख वोटर सीधे प्रभावित