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तीन वर्ष बाद भी सुधार नहीं, सैकडों बच्चे तालाब के पानी से होकर जा रहे हैं स्कूल

Thu, 07 Dec 2017 09:53 PM IST
Updated Thu, 07 Dec 2017 09:53 PM IST
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तीन वर्ष बाद भी सुधार नहीं, सैकडों बच्चे तालाब के पानी से होकर जा रहे हैं स्कूल
खरखौदा।
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क्षेत्र के गांव गोविंदपुर में स्कूल जाने के लिए बच्चों को पिछले तीन वर्ष से तालाब के पानी से होकर गुरजना पड़ता है। इसकी शिकायत शिक्षा विभाग समेत ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से की है। हालांकि तीन वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
गांव गोविंदपुर पहले ग्राम पंचायत थी। करीब बीस वर्ष पहले गोविंदपुर को गांव खड़खड़ी ग्राम पंचायत का माजरा घोषित कर दिया गया। इस योजना में गांव गोविंदपुर को दोबारा ग्राम पंचायत का दर्जा मिल गया है। इसी गांव में एक प्राइमरी, एक जूनियर एवं एक राजकीय हाईस्कूल है। प्राइमरी पाठशाला गांव में ही है। जूनियर और राजकीय हाईस्कूल गांव के बाहर की ओर तालाब किनारे स्थित है। दोनों स्कूलों को जाने वाला रास्ता तालाब के किनारे से गुजरता है। स्कूल जाने वाले रास्ते पर तीन वर्षों से लगातार जलभराव है। स्कूल जाने वाले बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं। अब तक जूनियर एवं राजकीय हाईस्कूल दोनों ही एक ही परिसर में चल रहे हैं। इसी स्कूल की बगल में राजकीय हाईस्कूल की नई इमारत बन गई है। जूनियर हाईस्कूल में गांव के ही 108 एवं राजकीय हाईस्कूल में गोविंदपुर समेत गांव आड़ और कौल के 63 बच्चे पंजीकृत हैं। दोनों स्कूलों के बच्चे पिछले तीन वर्षों से रास्ते में फैले तालाब के गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बाद भी न तो प्रशासनिक अधिकारी ने ग्राम पहुंचकर इस पर समस्या का समाधान कराने की जहमत नहीं उठाई है। किसी जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। हालांकि सपा कार्यकाल में यह गांव राममनोहर लोहिया योजना अंतर्गत आ चुका है। विडंबना यह है कि जिला पंचायत सदस्य शमशाद भी इसी गांव के रहने वाले हैं। जिला पंचायत सदस्य ने क्षेत्र में करीब 35 लाख रुपये का काम करा दिया है, लेकिन इस रास्ते को वह भी दुरुस्त नहीं करा सके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान अपनी जिद के कारण इस रास्ते को नहीं बना रही है।
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बरसात में निजी मकानों में चलती हैं कक्षाएं
ग्रामीणों का कहना है कि इस समय तो मौसम साफ है। बरसात के मौसम में तालाब का पानी स्कूल परिसर में घुस जाता है। जिस कारण न तो बच्चे ही स्कूल पहुंच पाते हैं और न ही शिक्षक। जिस कारण ग्रामीणों की मांग पर शिक्षकों को निजी मकानों में शिक्षण कार्य करना पड़ता है।
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बीमारी फैलने का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे गांव की निकासी इसी रास्ते से तालाब में पहुंचती है। पानी का स्तर कम होने पर बच्चे तालाब किनारे बनी दीवार से होकर गुजर जाते हैं, लेकिन तालाब का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों को पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। जिस कारण बच्चों में चर्म रोग हो जाते हैं। तालाब और रास्ते में जलभराव के कारण मच्छर पनपता है। जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
ग्राम प्रधान इस तालाब पर अवैध कब्जा बता रही हैं। ग्राम प्रधान के अनुसार कई ग्रामीणों ने तालाब किनारे अवैध रूप से मकान बना रखे हैं। पहले तालाब से अवैध कब्जा हटाने तथा इसके बाद रास्ते का निर्माण कराया जाएग-। यदि जिला पंचायत से इस पर काम कराने का प्रयास भी कराया गया तो बिना ग्राम प्रधान की सहमति के यह काम नहीं हो सकता है। -शमशाद अली, सदस्य जिला पंचायत

तालाब पर अतिक्रमण है। जल्द ही इस मामले में कमिश्नर साहब से बात कर तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उधर, गांव के लोग भी रास्ते पर चल रहे पानी को रोक नहीं रहे हैं। जल्द ही इस समस्या का निस्तारण किया जाएगा।- शमशीना बेगम, ग्राम प्रधान
मुख्य बातें
जिला पंचायत सदस्य ने भी इस समस्या का समाधान नहीं कराया
अधिकारियों से शिकायत के बावजूद नहीं की जा रही कार्रवाई
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