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बिजौली में सस्ते गल्ले की दुकान का नहीं हो सका प्रस्ताव
Updated Sat, 23 Sep 2017 09:15 PM IST
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खरखौदा।
गांव बिजौली में पिछले छह माह से रिक्त चल रही सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के लिए शनिवार को खुली बैठक कर प्रस्ताव होना था। ग्राम प्रधान के बैठक में नहीं पहुंचने पर दुकान का प्रस्ताव नहीं हो सका है।
बिजौली गांव की आबादी करीब आठ हजार है। यहां सरकारी सस्ते गल्ले की दो दुकान थीं। इनमें एक एससी के लिए आरक्षित थी। आरक्षित दुकान भुजवीर तथा सामान्य शीला शर्मा के नाम दुकान थी। शीला शर्मा ने तबियत बिगड़ जाने पर करीब छह माह पूर्व दुकान छोड़ दी थी। इसी समय से दुकान रिक्त चल रही है। उधर, एसडीएम ने ग्राम प्रधान की सीट भी एससी में रिजर्व होने के कारण दूसरी दुकान भी एससी कोटे में दे दी। इसके खिलाफ शीला शर्मा का बेटा रामकुमार हाईकोर्ट चला गया। जनसंख्या के हिसाब से दूसरी दुकान का प्रस्ताव सामान्य में कराने की मांग की। जिसमें ग्राम विकास अधिकारी ने एसडीएम से विमर्श की मांग की। इस पर ग्राम विकास अधिकारी को 22 सितंबर को आदेश प्राप्त हुआ कि शीला के बेटे को खुली बैठक में शामिल किया जा सकता है। यदि रामकुमार शर्मा बहुमत सिद्ध कर देता है तो दुकान का प्रस्ताव उसी के नाम हो जाएगा। उसी को लेकर शनिवार को गांव में खुली बैठक हुई। ग्राम प्रधान धीरज गौतम के बैठक में नहीं पहुंचने पर बैठक निरस्त हो गई। वहीं, बैठक में मौजूद दूसरे पक्ष ने ग्राम प्रधान के नहीं पहुंचने पर हंगामा किया। पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाली। इस बाबत थानाध्यक्ष प्रमोद गौतम ने बताया कि कुछ शराबी युवकों ने हंगामा किया था। पुलिस के पहुुंचने पर वे शांत हो गए।
मुख्य बातें
ग्राम प्रधान के नहीं पहुंचने पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी
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गांव बिजौली में पिछले छह माह से रिक्त चल रही सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के लिए शनिवार को खुली बैठक कर प्रस्ताव होना था। ग्राम प्रधान के बैठक में नहीं पहुंचने पर दुकान का प्रस्ताव नहीं हो सका है।
बिजौली गांव की आबादी करीब आठ हजार है। यहां सरकारी सस्ते गल्ले की दो दुकान थीं। इनमें एक एससी के लिए आरक्षित थी। आरक्षित दुकान भुजवीर तथा सामान्य शीला शर्मा के नाम दुकान थी। शीला शर्मा ने तबियत बिगड़ जाने पर करीब छह माह पूर्व दुकान छोड़ दी थी। इसी समय से दुकान रिक्त चल रही है। उधर, एसडीएम ने ग्राम प्रधान की सीट भी एससी में रिजर्व होने के कारण दूसरी दुकान भी एससी कोटे में दे दी। इसके खिलाफ शीला शर्मा का बेटा रामकुमार हाईकोर्ट चला गया। जनसंख्या के हिसाब से दूसरी दुकान का प्रस्ताव सामान्य में कराने की मांग की। जिसमें ग्राम विकास अधिकारी ने एसडीएम से विमर्श की मांग की। इस पर ग्राम विकास अधिकारी को 22 सितंबर को आदेश प्राप्त हुआ कि शीला के बेटे को खुली बैठक में शामिल किया जा सकता है। यदि रामकुमार शर्मा बहुमत सिद्ध कर देता है तो दुकान का प्रस्ताव उसी के नाम हो जाएगा। उसी को लेकर शनिवार को गांव में खुली बैठक हुई। ग्राम प्रधान धीरज गौतम के बैठक में नहीं पहुंचने पर बैठक निरस्त हो गई। वहीं, बैठक में मौजूद दूसरे पक्ष ने ग्राम प्रधान के नहीं पहुंचने पर हंगामा किया। पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाली। इस बाबत थानाध्यक्ष प्रमोद गौतम ने बताया कि कुछ शराबी युवकों ने हंगामा किया था। पुलिस के पहुुंचने पर वे शांत हो गए।
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मुख्य बातें
ग्राम प्रधान के नहीं पहुंचने पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी