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आठ सीटों के गणित में जुटा खुफिया विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। प्रथम चरण में वेस्ट की आठ सीटों पर लोकसभा चुनाव होने के बाद अब खुफिया विभाग इन सीटों के गणित में जुट गया है। जातीय आधार पर भी कई पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारी लगातार इनपुट लेते रहे। राजनीतिक दलों के अलावा मीडिया कर्मियों और रिटायर्ड अधिकारियों से भी लगातार हार जीत के गुणा भाग का आकलन करते रहे।
प्रदेश में बृहस्पतिवार को प्रथम चरण में मेरठ- हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बागपत, मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर और बिजनौर सीट पर चुनाव संपन्न हुआ। ऐसे में चुनाव के दूसरे दिन शुक्रवार को लगातार उच्च अधिकारी इन सभी आठ सीटों के गणित की जानकारी करते रहे। एक तरफ जहां गठबंधन प्रत्याशियों की स्थिति जानने में जुटे रहे, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी प्रत्याशियों को लेकर भी भी जानकारी की गई। इन अधिकारियों में मेरठ के अलावा वेस्ट यूपी के जिलों में पूर्व में तैनात रहे पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारी हैं। इन अधिकारियों की छवि भी शासन में निष्पक्ष मानी जाती है। ऑफ द रिकार्ड की बात कहकर यह भी कहा गया कि यह सिर्फ चुनाव की स्थिति जानने को है। लेकिन जिस तरह से जातीय आधार पर लगातार इनपुट लिया गया, उससे तो यही लगता रहा है कि खुफिया विभाग पूरी तरह से आठों सीटों पर हुए चुनाव में वोटों के प्रतिशत, वोटरों की संख्या और वोटरों के रुझान पर ही इनपुट ले रहा है।
पार्टी के नेताओं से भी इनपुट
गोपनीय तरीके से खुफिया विभाग के अधिकारी अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से भी इनपुट लेते रहे। शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने की बात कहते हुए यही जानकारी की जाती रही कि चुनाव किस स्थिति में है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत और हार के अंतर पर भी गणित भाग किया जाता रहा। लोकसभा सीट में आने वाली प्रत्येक विधानसभा सीट में जातीय आधार पर कितना वोट हुआ और किस तरफ गया, इसी गणित भाग में अफसर लगे रहे।
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मेरठ। प्रथम चरण में वेस्ट की आठ सीटों पर लोकसभा चुनाव होने के बाद अब खुफिया विभाग इन सीटों के गणित में जुट गया है। जातीय आधार पर भी कई पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारी लगातार इनपुट लेते रहे। राजनीतिक दलों के अलावा मीडिया कर्मियों और रिटायर्ड अधिकारियों से भी लगातार हार जीत के गुणा भाग का आकलन करते रहे।
प्रदेश में बृहस्पतिवार को प्रथम चरण में मेरठ- हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बागपत, मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर और बिजनौर सीट पर चुनाव संपन्न हुआ। ऐसे में चुनाव के दूसरे दिन शुक्रवार को लगातार उच्च अधिकारी इन सभी आठ सीटों के गणित की जानकारी करते रहे। एक तरफ जहां गठबंधन प्रत्याशियों की स्थिति जानने में जुटे रहे, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी प्रत्याशियों को लेकर भी भी जानकारी की गई। इन अधिकारियों में मेरठ के अलावा वेस्ट यूपी के जिलों में पूर्व में तैनात रहे पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारी हैं। इन अधिकारियों की छवि भी शासन में निष्पक्ष मानी जाती है। ऑफ द रिकार्ड की बात कहकर यह भी कहा गया कि यह सिर्फ चुनाव की स्थिति जानने को है। लेकिन जिस तरह से जातीय आधार पर लगातार इनपुट लिया गया, उससे तो यही लगता रहा है कि खुफिया विभाग पूरी तरह से आठों सीटों पर हुए चुनाव में वोटों के प्रतिशत, वोटरों की संख्या और वोटरों के रुझान पर ही इनपुट ले रहा है।
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पार्टी के नेताओं से भी इनपुट
गोपनीय तरीके से खुफिया विभाग के अधिकारी अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से भी इनपुट लेते रहे। शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने की बात कहते हुए यही जानकारी की जाती रही कि चुनाव किस स्थिति में है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत और हार के अंतर पर भी गणित भाग किया जाता रहा। लोकसभा सीट में आने वाली प्रत्येक विधानसभा सीट में जातीय आधार पर कितना वोट हुआ और किस तरफ गया, इसी गणित भाग में अफसर लगे रहे।
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