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सही समय पर उपचार हो तो न रुके बच्चे का दिमागी विकास
Updated Sun, 19 Aug 2018 02:12 AM IST
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बच्चे में है मेटाबोलिक विकार, तो समय पर कराए उपचार
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग द्वारा न्यू लेक्चर थियेटर में शनिवार को अनुवांशिक मेटाबोलिक विकार (गोशेर रोग केसाथ जीना) विषय पर एक शैक्षिक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि सही समय पर उपचार कराने से बच्चों में दिमागी विकास की बीमारी एवं शारीरिक अपंगता को रोका जा सकता है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं सेमिनार के आर्गनाइजिंग डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि मेटाबालिक विकार अनुवांशिक दुर्लभ विकार है, जो माता पिता के जीन्स से बच्चों में आ सकते हैं। परिवार के सदस्यों के मध्य विवाह इस विकार के होने की संभावना को और बढ़ा सकता है। बीमारी का पता लगाना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि अगली प्रेग्नेंसी में भी वही बीमारी होने की आशंका रहती है। उचित समय पर बीमारी की पहचान नहीं होने से बच्चे के दिमाग का विकास अवरुद्ध हो सकता है या फिर बहुत सारी चिकित्सीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण शिशु की मृत्यु भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि मेटाबोलिक विकार वाले बच्चे जन्म के समय पूरी तरह से स्वस्थ पैदा होते है, लेकिन कई लक्षणों केआधार पर मेटाबोलिक विकार का संदेह कर सकते हैं। सेमिनार में डॉ. विनय अग्रवाल, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. अनुपमा वर्मा, डॉ. नवरतन गुप्ता, डॉ. प्रियंका गुप्ता आदि डॉक्टर उपस्थित रहे।
इन लक्षणों से करते हैं पहचान
- स्वस्थ बच्चे का अचानक बहुत बीमार होना
- परिवार केसदस्यों के मध्य विवाह
- दौरा पड़ना जो दवाइयों से कंट्रोल ना हो पाए
- स्वस्थ बच्चे का अचानक माइल स्टोर लॉस होना
- बार बार शुगर कम होना
- पेशाब में अलग तरह की बदबूआना
रुक जाता है शारीरिक विकास
गोशर विकार के रोगी में लीवर व तिल्ली का बढ़ा होना, शारीरिक विकास का रुक जाना, छोटा कदम होना, चोट लगने पर अत्यधिक रक्त बहना, रक्त की कमी अथवा प्लेटलेट्स कम होना, हड्डी में दर्द होना। इसी में पोम्पी विकार, फैबरी विकार और हाईपोथाइराडज्म भी हैं। इनके लक्षणों में दिमाग का कम होना और लंबाई का कम होना आदि हैं।
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खास बातें:
- मेडिकल कॉलेज में गोशेर रोग पर हुआ सेमिनार
- इलाज से रोकी जा सकती है बच्चे की शारीरिक अपंगता
- बच्चों में माता पिता की जीन्स के कारण आते हैं इस तरह के रोग
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बच्चे में है मेटाबोलिक विकार, तो समय पर कराए उपचार
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग द्वारा न्यू लेक्चर थियेटर में शनिवार को अनुवांशिक मेटाबोलिक विकार (गोशेर रोग केसाथ जीना) विषय पर एक शैक्षिक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि सही समय पर उपचार कराने से बच्चों में दिमागी विकास की बीमारी एवं शारीरिक अपंगता को रोका जा सकता है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष एवं सेमिनार के आर्गनाइजिंग डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि मेटाबालिक विकार अनुवांशिक दुर्लभ विकार है, जो माता पिता के जीन्स से बच्चों में आ सकते हैं। परिवार के सदस्यों के मध्य विवाह इस विकार के होने की संभावना को और बढ़ा सकता है। बीमारी का पता लगाना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि अगली प्रेग्नेंसी में भी वही बीमारी होने की आशंका रहती है। उचित समय पर बीमारी की पहचान नहीं होने से बच्चे के दिमाग का विकास अवरुद्ध हो सकता है या फिर बहुत सारी चिकित्सीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण शिशु की मृत्यु भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि मेटाबोलिक विकार वाले बच्चे जन्म के समय पूरी तरह से स्वस्थ पैदा होते है, लेकिन कई लक्षणों केआधार पर मेटाबोलिक विकार का संदेह कर सकते हैं। सेमिनार में डॉ. विनय अग्रवाल, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. अनुपमा वर्मा, डॉ. नवरतन गुप्ता, डॉ. प्रियंका गुप्ता आदि डॉक्टर उपस्थित रहे।
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इन लक्षणों से करते हैं पहचान
- स्वस्थ बच्चे का अचानक बहुत बीमार होना
- परिवार केसदस्यों के मध्य विवाह
- दौरा पड़ना जो दवाइयों से कंट्रोल ना हो पाए
- स्वस्थ बच्चे का अचानक माइल स्टोर लॉस होना
- बार बार शुगर कम होना
- पेशाब में अलग तरह की बदबूआना
रुक जाता है शारीरिक विकास
गोशर विकार के रोगी में लीवर व तिल्ली का बढ़ा होना, शारीरिक विकास का रुक जाना, छोटा कदम होना, चोट लगने पर अत्यधिक रक्त बहना, रक्त की कमी अथवा प्लेटलेट्स कम होना, हड्डी में दर्द होना। इसी में पोम्पी विकार, फैबरी विकार और हाईपोथाइराडज्म भी हैं। इनके लक्षणों में दिमाग का कम होना और लंबाई का कम होना आदि हैं।
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खास बातें:
- मेडिकल कॉलेज में गोशेर रोग पर हुआ सेमिनार
- इलाज से रोकी जा सकती है बच्चे की शारीरिक अपंगता
- बच्चों में माता पिता की जीन्स के कारण आते हैं इस तरह के रोग