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सिनेमा को तोड़ने की जेई ने लिखी थी पटकथा

Tue, 10 Jul 2018 02:32 AM IST
Updated Tue, 10 Jul 2018 02:32 AM IST
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सिनेमा को तोड़ने की जेई ने लिखी थी पटकथा
मेरठ। मेनका सिनेमा हॉल तोड़ने की पटकथा नगर निगम के निर्माण विभाग के जेई ने लिखी थी। उसी पटकथा को आधार मानकर निगम के आला अधिकारियों ने एनओसी जारी की। अब फंसता देख इन अधिकारियों ने निगम से स्थानांतरित हो चुके संबंधित जेई को फोन पर फटकार लगायी है। एनओसी में निगम ने मनोरंजन कर विभाग से एनओसी लिए बगैर जर्जर भवन की मरम्मत या फिर तोड़ने का काम नहीं करने की भी सलाह दी थी।
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पत्रों में छुपाया सिनेमा का नाम
निगम निर्माण विभाग के तत्कालीन जेई एसपी सिंह द्वारा प्रस्तुत की गयी जांच रिपोर्ट में मेनका सिनेमा का हवाला नहीं दिया गया है। बल्कि भवन संख्या 253 कंबोह गेट दर्शाया गया। ताकि उच्चाधिकारी बगैर किसी सवाल के अपनी स्वीकृति दें दें। हालांकि आवेदन कर्ता ने अपने पत्र और शपथ पत्र में मेनका सिनेमा का जिक्र किया है।
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पीके चौबे बोले, खुदा मेरी मदद करे
सिनेमा हॉल बिल्डिंग जर्जर होने और कोई सरकारी देय न होने के हवाले वाला एक शपथपत्र भी सामने आया है। जो पीके चौबे निदेशक हाइटेक सिटी डेवलपर प्रा.लि. द्वारा निगम में दिया गया। जिसमें पीके चौबे ने जर्जर भवन को गिराने की अनुमति मांगी है। हालांकि यह शपथपत्र संदिग्ध माना जा रहा है। क्योंकि शपथ पत्र के अंतिम में लिखा है कि शपथ पत्र में कुछ भी असत्य नहीं है। खुदा मेरी मदद करे।
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हस्ताक्षरों पर संदेह
पीके चौबे द्वारा निगम में एक शपथपत्र और एक प्रार्थनापत्र दिया गया है। दोनों ही पत्रों पर किए गए हस्ताक्षरों पर संदेह है। प्रथम दृष्टया दोनों ही हस्ताक्षर अलग-अलग प्रतीत होते हैं। प्रार्थना पत्र के हस्ताक्षर पीके चौबे द्वारा किए लगते हैं। लेकिन शपथ पत्र के हस्ताक्षर किसी के द्वारा बनाए लगते हैं। हालांकि यह तो एक्सपर्ट की जांच के बाद स्पष्ट होगा।
कहीं फर्जी तो नहीं रिसीविंग
अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी द्वारा जारी एनओसी पत्र की एक-एक कॉपी एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, थाना देहली गेट को रिसीव कराना बतायी जा रही है। अब सवाल उठता है कि अगर पत्र रिसीव कराए गए तो सभी अधिकारी इस मामले को क्यों दबा गए, या फिर निगम कर्मचारियों ने एक विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी रिसीविंग दर्शायी है। यह स्पष्ट करने के लिए तो संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखना ही चाहिए।


जेई की रिपोर्ट ही आधार
किसी भी जर्जर भवन की मौके की रिपोर्ट देने का काम जेई का होता है। जेई की रिपोर्ट के आधार पर ही मुख्य अभियंता ने स्वीकृति दी थी। उसी के आधार पर हमने एनओसी दी थी। लेकिन हमने स्पष्ट किया हुआ है कि बगैर मनोरंजन विभाग से एनओसी के न तो मरम्मत की जाए और न ही गिराने का काम। हमने जेई से बात की है। - अलीहसन कर्नी, अपर नगरायुक्त


खास बातें:
(हस्ताक्षर की पुष्टि के लिए दोनों पत्रों के फोटो भी प्रेषित हैं)
- नगर निगम के जेई ने लिखी मेनका सिनेमा हॉल तोड़ने की पटकथा
- जेई ने अपनी रिपोर्ट नहीं किया था सिनेमा का जिक्र, भवन संख्या 253 बताया

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