{"_id":"5a9302a64f1c1b9b248b7098","slug":"141519583910-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यरुशलेम में अमेरिकी दूतावास बना तो हालात ओर खराब होंगे: उलमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यरुशलेम में अमेरिकी दूतावास बना तो हालात ओर खराब होंगे: उलमा
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यरुशलेम में अमेरिकी दूतावास बना तो हालात ओर खराब होंगे: उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। यरुशलेम में अमेरिकी दूतावास स्थापित किए जाने की घोषणा पर देवबंदी उलमा का कहना है कि अगर अमेरिका अपने दूतावास को तेल अबीब से यरुशेलम में स्थानांतरित करता है तो इससे वहां के हालात और खराब हो जाएंगे।
दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान का कहना है कि अगर घोषणा के मुताबिक अमेरिकी दूतावास को यरुशलेम में लाया तो इससे संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेश की अवहेलना माना जाएगा और इससे अमन की कोशिशों को भी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 2017 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बेतुल मुकद्दस को इजरायल को राजधानी मानने की घोषणा की थी। जिसका अरब देशों ने पुरजोर तरीके से विरोध किया था। जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ में इस घोषणा के खिलाफ प्रस्ताव भी पास किया गया था। साथ ही अमेरिका से कहा गया था कि वो अपने इस फैसले को वापस ले। लेकिन उसके बावजूद ट्रंप अपनी घोषणा पर अडिग हैं। जो सीधे सीधे संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेशों की अवहेलना है।
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। यरुशलेम में अमेरिकी दूतावास स्थापित किए जाने की घोषणा पर देवबंदी उलमा का कहना है कि अगर अमेरिका अपने दूतावास को तेल अबीब से यरुशेलम में स्थानांतरित करता है तो इससे वहां के हालात और खराब हो जाएंगे।
दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान का कहना है कि अगर घोषणा के मुताबिक अमेरिकी दूतावास को यरुशलेम में लाया तो इससे संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेश की अवहेलना माना जाएगा और इससे अमन की कोशिशों को भी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 2017 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बेतुल मुकद्दस को इजरायल को राजधानी मानने की घोषणा की थी। जिसका अरब देशों ने पुरजोर तरीके से विरोध किया था। जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ में इस घोषणा के खिलाफ प्रस्ताव भी पास किया गया था। साथ ही अमेरिका से कहा गया था कि वो अपने इस फैसले को वापस ले। लेकिन उसके बावजूद ट्रंप अपनी घोषणा पर अडिग हैं। जो सीधे सीधे संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेशों की अवहेलना है।
विज्ञापन