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कार्रवाई के नाम पर एक दूसरे के पाले में डालते रहे गेंद
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:37 AM IST
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कार्रवाई के नाम पर एक दूसरे के पाले में डालते रहे गेंद
मेरठ। चारागाह की जमीन पर कॉलोनी बनाने के मामले में कई परत खुल रही हैं। सरकारी जमीन पर कब्जे से कोई अनजान नहीं है, लेकिन कार्रवाई को लेकर एक दूसरे के पाले में गेंद डाली जा रही है। तहसीलदार सदर की जांच रिपोर्ट इसका खुलासा करती है।
ग्राम काशी में चारागाह की जमीन पर कॉलोनी बनाने का अमर उजाला ने बुधवार को खबर प्रकाशित कर खुलासा किया था। अब इस मामले में एक नई लापरवाही सामने आई है। इस जमीन पर कब्जे को लेकर अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन द्वारा नवंबर 2017 में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से शिकायत की गई थी। जिस पर उन्होंने एसडीएम सदर को जांच कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इस मामले में एसडीएम सदर द्वारा तहसीलदार से जांच कराई गई और यह जांच रिपोर्ट 16 जनवरी 2018 को मंडलायुक्त को भेजी गई। इस जांच रिपोर्ट में तमाम जमीनों के खसरा नंबर के साथ चारागाह की जमीन का रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराया गया। लेकिन रिपोर्ट में साठगांठ का ऐसा खेल चला कि तहसीलदार ने किसी कब्जे होने या न होने की सपष्ट बात अपनी रिपोर्ट में कही ही नहीं। इसके साथ ही रिपोर्ट में तहसीलदार द्वारा कहा गया कि काशी ग्राम नगर निगम सीमा के अंतर्गत आता है, जिस कारण कार्रवाई के लिए नगर निगम को निर्देशित किया जाना उचित होगा। लेकिन यह जांच रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में चली गई और उसके बाद मंडलायुक्त कार्यालय से कोई दिशा निर्देश नगर निगम को जारी नहीं हुए कि वह इस चारागाह की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई करे। जबकि इस बीच लगातार कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।
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मेरठ। चारागाह की जमीन पर कॉलोनी बनाने के मामले में कई परत खुल रही हैं। सरकारी जमीन पर कब्जे से कोई अनजान नहीं है, लेकिन कार्रवाई को लेकर एक दूसरे के पाले में गेंद डाली जा रही है। तहसीलदार सदर की जांच रिपोर्ट इसका खुलासा करती है।
ग्राम काशी में चारागाह की जमीन पर कॉलोनी बनाने का अमर उजाला ने बुधवार को खबर प्रकाशित कर खुलासा किया था। अब इस मामले में एक नई लापरवाही सामने आई है। इस जमीन पर कब्जे को लेकर अखिल भारतीय लोकाधिकार संगठन द्वारा नवंबर 2017 में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से शिकायत की गई थी। जिस पर उन्होंने एसडीएम सदर को जांच कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
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इस मामले में एसडीएम सदर द्वारा तहसीलदार से जांच कराई गई और यह जांच रिपोर्ट 16 जनवरी 2018 को मंडलायुक्त को भेजी गई। इस जांच रिपोर्ट में तमाम जमीनों के खसरा नंबर के साथ चारागाह की जमीन का रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराया गया। लेकिन रिपोर्ट में साठगांठ का ऐसा खेल चला कि तहसीलदार ने किसी कब्जे होने या न होने की सपष्ट बात अपनी रिपोर्ट में कही ही नहीं। इसके साथ ही रिपोर्ट में तहसीलदार द्वारा कहा गया कि काशी ग्राम नगर निगम सीमा के अंतर्गत आता है, जिस कारण कार्रवाई के लिए नगर निगम को निर्देशित किया जाना उचित होगा। लेकिन यह जांच रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में चली गई और उसके बाद मंडलायुक्त कार्यालय से कोई दिशा निर्देश नगर निगम को जारी नहीं हुए कि वह इस चारागाह की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई करे। जबकि इस बीच लगातार कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।
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