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हस्तिनापुर की खबर1
Updated Sun, 16 Sep 2018 02:24 AM IST
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हस्तिनापुर। कृषि विज्ञान केन्द्र, हस्तिनापुर द्वारा राजकीय इंटर कालेज, हस्तिनापुर में शनिवार को फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र प्रभारी अधिकारी डॉ. ओमवीर सिंह ने करके फसल अवशेष को खेत में प्रबंधन करने की बात कही। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष खेत में जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। वहीं, पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य मुनेशपाल ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि परिजनों को फसल अवशेष नहीं जलाने के बारे में जागरूक करें। जिससे फसल के अवशेष जमीन में मिलाकर उसका लाभ लिया जा सके। डॉ. राकेश तिवारी, मृृदा वैज्ञानिक ने बताया कि मिट्टी का लगातार स्वास्थ्य गिरने से उत्पादकता उत्पादन एवं अनाज की गुणवत्ता पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है जिससे कि मनुष्यों में एवं पशुओं में बांझपन की समस्या एवं लंबाई घटती जा रही है। इसके लिए कृृषक भाइयों को मृृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उर्वरक प्रयोग करना चाहिए। वहीं, फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर मृृदा का स्वास्थ्य ठीक किया जा सकता है। डा. पीएस तिवारी ने मृदा के अवशेषों को खेत में यथावत प्रबंधन के लिए हैपीसीडर, कल्चर, कटर कम स्प्रेडर, रिवर्सिबल प्लाउ एवं जीरो टिलेज मशीन द्वारा अवशेष प्रबंधन की छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। शिवकुमार द्वारा बायो डिकंपोजर द्वारा फसल अवशेष को अल्प समय में सड़ाने की जानकारी दी। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर वाद-विवाद कराई। इसमें जाह्नवी चौधरी प्रथम, सुषमा द्वितीय एवं शिवांगी चंदेल एवं अनिकेत ने तृृतीय स्थान प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में निव्या, राहुल, पारुल एवं राज उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में निबंध भी कराई। इसमें 350 छात्र-छात्राओं एवं नंदलेश कुमार, धर्मवीर सिंह, अनुज कुमार त्यागी, किरनपाल सिंह, प्रशांत चौधरी, मनमोहन कुमार आदि अध्यापक एवं कृृषि विज्ञान केन्द्र के दीपक, तेजपाल और बहादुर उपस्थित रहे।
मुख्य बातें
वाद-विवाद प्रतियोगिता में जाह्नवी अव्वल रही
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कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र प्रभारी अधिकारी डॉ. ओमवीर सिंह ने करके फसल अवशेष को खेत में प्रबंधन करने की बात कही। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष खेत में जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। वहीं, पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य मुनेशपाल ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि परिजनों को फसल अवशेष नहीं जलाने के बारे में जागरूक करें। जिससे फसल के अवशेष जमीन में मिलाकर उसका लाभ लिया जा सके। डॉ. राकेश तिवारी, मृृदा वैज्ञानिक ने बताया कि मिट्टी का लगातार स्वास्थ्य गिरने से उत्पादकता उत्पादन एवं अनाज की गुणवत्ता पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है जिससे कि मनुष्यों में एवं पशुओं में बांझपन की समस्या एवं लंबाई घटती जा रही है। इसके लिए कृृषक भाइयों को मृृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उर्वरक प्रयोग करना चाहिए। वहीं, फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर मृृदा का स्वास्थ्य ठीक किया जा सकता है। डा. पीएस तिवारी ने मृदा के अवशेषों को खेत में यथावत प्रबंधन के लिए हैपीसीडर, कल्चर, कटर कम स्प्रेडर, रिवर्सिबल प्लाउ एवं जीरो टिलेज मशीन द्वारा अवशेष प्रबंधन की छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। शिवकुमार द्वारा बायो डिकंपोजर द्वारा फसल अवशेष को अल्प समय में सड़ाने की जानकारी दी। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर वाद-विवाद कराई। इसमें जाह्नवी चौधरी प्रथम, सुषमा द्वितीय एवं शिवांगी चंदेल एवं अनिकेत ने तृृतीय स्थान प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में निव्या, राहुल, पारुल एवं राज उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में निबंध भी कराई। इसमें 350 छात्र-छात्राओं एवं नंदलेश कुमार, धर्मवीर सिंह, अनुज कुमार त्यागी, किरनपाल सिंह, प्रशांत चौधरी, मनमोहन कुमार आदि अध्यापक एवं कृृषि विज्ञान केन्द्र के दीपक, तेजपाल और बहादुर उपस्थित रहे।
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मुख्य बातें
वाद-विवाद प्रतियोगिता में जाह्नवी अव्वल रही