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टावर लगाने को मोबाइल कंपनियां नहीं दे रहीं साइट की लोकेशन
Updated Fri, 29 Jun 2018 02:24 AM IST
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मोबाइल कंपनियां नहीं गंभीर, कैसे मिले फुल नेटवर्क
मेरठ। कैंट क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या से लोगों को अभी राहत मिलने वाली नहीं है। केंद्र सरकार की नई पॉलिसी के तहत काऊ (कम्युनिकेशन ऑल व्हील) के साथ ही स्थाई मोबाइल टॉवर लगाने के लिए कंपनियों ने टॉवर की साइट लोकेशन कैंट बोर्ड को नहीं दी है। ऐसे में जब तक कंपनियां साइट का ब्योरा नहीं देंगी तब तक जगहों को लीज पर देने के लिए विचार नहीं किया जा सकेगा। इसके चलते टेंडर से लेकर दूसरी प्रक्रियाओं में भी देरी होगी।
कैंट क्षेत्र में मोबाइल टॉवर नहीं होने की वजह से कनेक्टिविटी की समस्या रहती है। कई बार दुकानदार ऑनलाइन लेनदेन के दौरान स्वाइप मशीन को सड़कों तक पर लिए खड़े नजर आते हैं। छह महीने पहले कैंट बोर्ड ने जनवरी के पहले सप्ताह में क्षेत्र में 16 मोबाइल वैन टॉवर काऊ लगाने का दावा किया था। टेंडर भी निकाल दिए थे। इसी बीच सीईओ का तबादला हो गया। फरवरी में केंद्र सरकार ने टॉवर को लेकर लैंड पॉलिसी में बदलाव कर दिया। अब काऊ के साथ ही लीज पर डिफेंस की जमीन में भी स्थाई टॉवर लगाए जा सकते हैं। नई पॉलिसी के तहत कैंट बोर्ड ने मोबाइल कंपनियों से जानकारी मांगी थी। एक महीना होने को है लेकिन अभी तक कंपनियों ने ये नहीं बताया है कि वे किस-किस लोकेशन पर अपने टॉवर लगाना चाहती हैं। कंपनियों द्वारा साइट के बारे में जानकारी देने के बाद ही कैंट बोर्ड सीईओ, स्टेशन कमांडर हेडक्वार्टर, सिग्नल कोर, डीईओ और एमईएस के अधिकारी इन साइटों पर विचार करके वहीं या उसके आसपास लीज पर टॉवर के लिए जमीन मुहैया कराएंगे।
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मेरठ। कैंट क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या से लोगों को अभी राहत मिलने वाली नहीं है। केंद्र सरकार की नई पॉलिसी के तहत काऊ (कम्युनिकेशन ऑल व्हील) के साथ ही स्थाई मोबाइल टॉवर लगाने के लिए कंपनियों ने टॉवर की साइट लोकेशन कैंट बोर्ड को नहीं दी है। ऐसे में जब तक कंपनियां साइट का ब्योरा नहीं देंगी तब तक जगहों को लीज पर देने के लिए विचार नहीं किया जा सकेगा। इसके चलते टेंडर से लेकर दूसरी प्रक्रियाओं में भी देरी होगी।
कैंट क्षेत्र में मोबाइल टॉवर नहीं होने की वजह से कनेक्टिविटी की समस्या रहती है। कई बार दुकानदार ऑनलाइन लेनदेन के दौरान स्वाइप मशीन को सड़कों तक पर लिए खड़े नजर आते हैं। छह महीने पहले कैंट बोर्ड ने जनवरी के पहले सप्ताह में क्षेत्र में 16 मोबाइल वैन टॉवर काऊ लगाने का दावा किया था। टेंडर भी निकाल दिए थे। इसी बीच सीईओ का तबादला हो गया। फरवरी में केंद्र सरकार ने टॉवर को लेकर लैंड पॉलिसी में बदलाव कर दिया। अब काऊ के साथ ही लीज पर डिफेंस की जमीन में भी स्थाई टॉवर लगाए जा सकते हैं। नई पॉलिसी के तहत कैंट बोर्ड ने मोबाइल कंपनियों से जानकारी मांगी थी। एक महीना होने को है लेकिन अभी तक कंपनियों ने ये नहीं बताया है कि वे किस-किस लोकेशन पर अपने टॉवर लगाना चाहती हैं। कंपनियों द्वारा साइट के बारे में जानकारी देने के बाद ही कैंट बोर्ड सीईओ, स्टेशन कमांडर हेडक्वार्टर, सिग्नल कोर, डीईओ और एमईएस के अधिकारी इन साइटों पर विचार करके वहीं या उसके आसपास लीज पर टॉवर के लिए जमीन मुहैया कराएंगे।
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