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कोर्ट का आदेश, पवन गुप्ता को रिहा करो
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:28 AM IST
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मेरठ। पुलिस की लापरवाही से जेल भेजे गए ब्रह्मपुरी निवासी पवन गुप्ता को एसीजेएम-10 नीरज बख्शी की अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है।
थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र में दो अप्रैल को हुए उपद्रव में पुलिस ने ब्रह्मपुरी निवासी पवन गुप्ता को पवन कुमार के नाम से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिस पर पवन गुप्ता की तरफ से दलील दी गई थी कि उसका दलित आंदोलन से कोई लेना-देना नही है। उसका नाम पवन गुप्ता है और वह दलित नही है। उसके बावजूद भी पुलिस ने पवन गुप्ता को जेल भेज दिया था। भाजपा नेताओं ने जब इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी तो पुलिस बैकफुट पर आ गई। पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 169 के तहत जांच कर इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश की।
एसीजेएम कोर्ट संख्या-10 नीरज बख्शी ने पवन गुप्ता के विरुद्ध दर्ज कराए गए मुकदमे के वादी को तलब किया था। जिस पर बुधवार को अदालत में पुलिस वादी के साथ उपस्थित हुई। सहायक अभियोजन अधिकारी शालू वर्मा ने अदालत को बताया कि जिन आपराधिक धाराओं में पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। उनमें पवन गुप्ता की जांच में संलिप्तता नहीं पायी जाती है। जबकि पवन गुप्ता की गिरफ्तारी हो चुकी है और वह न्यायिक अभिरक्षा में है। इसलिए पुलिस की तरफ से अदालत में प्रार्थनापत्र पेश किया गया। जिसकी सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए पवन गुप्ता को रिहा करने का आदेश दिया।
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थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र में दो अप्रैल को हुए उपद्रव में पुलिस ने ब्रह्मपुरी निवासी पवन गुप्ता को पवन कुमार के नाम से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिस पर पवन गुप्ता की तरफ से दलील दी गई थी कि उसका दलित आंदोलन से कोई लेना-देना नही है। उसका नाम पवन गुप्ता है और वह दलित नही है। उसके बावजूद भी पुलिस ने पवन गुप्ता को जेल भेज दिया था। भाजपा नेताओं ने जब इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी तो पुलिस बैकफुट पर आ गई। पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 169 के तहत जांच कर इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश की।
एसीजेएम कोर्ट संख्या-10 नीरज बख्शी ने पवन गुप्ता के विरुद्ध दर्ज कराए गए मुकदमे के वादी को तलब किया था। जिस पर बुधवार को अदालत में पुलिस वादी के साथ उपस्थित हुई। सहायक अभियोजन अधिकारी शालू वर्मा ने अदालत को बताया कि जिन आपराधिक धाराओं में पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। उनमें पवन गुप्ता की जांच में संलिप्तता नहीं पायी जाती है। जबकि पवन गुप्ता की गिरफ्तारी हो चुकी है और वह न्यायिक अभिरक्षा में है। इसलिए पुलिस की तरफ से अदालत में प्रार्थनापत्र पेश किया गया। जिसकी सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए पवन गुप्ता को रिहा करने का आदेश दिया।
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