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केमिकल से जान सकते हैं हर्बल प्रोडक्ट में मिलावट
Updated Fri, 16 Feb 2018 03:00 AM IST
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केमिकल से जान सकते हैं हर्बल प्रोडक्ट में मिलावट
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में बृहस्पतिवार से प्रो. वाई मूर्ति की स्मृति में बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा नेशनल कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय से आए प्रो. एके पांडे ने कहा कि मौलीक्लियर टेक्सोनॉमी के जरिए किसी भी पौधे की मूल उत्पत्ति के बारे में पता लगाया जा सकता है। एक पौधा कैरीओंडा भारत में भी पाया जाता है और अफ्रीका में भी। जब पौधे की टेक्सोनॉमी की गई तो उसकी मूल उत्पत्ति अफ्रीका में होने की बात सामने आई। प्रो. एम डेनियल ने बताया कि बाजार में आजकल हर्बल प्रोडक्ट का बोलबाला है, ऐसे में सब इसी की डिमांड करते हैं। जिसके चलते इसमें भी मिलावट होने लगी है। उन्होंने बताया कि कई केमिकल के जरिए हर्बल प्रोडक्ट में मिलावट का पता लगाया जा सकता है। इस मौके पर बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो. वाई विमला, प्रो. एके चौबे, प्रो. मुदुल गुप्ता, अनिल अग्रवाल आदि मौजूद रहे। शुक्रवार से बॉटनी विभाग में कार्यशाला 21 फरवरी तक चलेगी।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में बृहस्पतिवार से प्रो. वाई मूर्ति की स्मृति में बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा नेशनल कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय से आए प्रो. एके पांडे ने कहा कि मौलीक्लियर टेक्सोनॉमी के जरिए किसी भी पौधे की मूल उत्पत्ति के बारे में पता लगाया जा सकता है। एक पौधा कैरीओंडा भारत में भी पाया जाता है और अफ्रीका में भी। जब पौधे की टेक्सोनॉमी की गई तो उसकी मूल उत्पत्ति अफ्रीका में होने की बात सामने आई। प्रो. एम डेनियल ने बताया कि बाजार में आजकल हर्बल प्रोडक्ट का बोलबाला है, ऐसे में सब इसी की डिमांड करते हैं। जिसके चलते इसमें भी मिलावट होने लगी है। उन्होंने बताया कि कई केमिकल के जरिए हर्बल प्रोडक्ट में मिलावट का पता लगाया जा सकता है। इस मौके पर बॉटनी विभागाध्यक्ष प्रो. वाई विमला, प्रो. एके चौबे, प्रो. मुदुल गुप्ता, अनिल अग्रवाल आदि मौजूद रहे। शुक्रवार से बॉटनी विभाग में कार्यशाला 21 फरवरी तक चलेगी।
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