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आजादी के बाद किया सबसे बड़ा गन्ना मूल्य भुगतान
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आजादी के बाद सबसे अधिक गन्ना मूल्य भुगतान कराया: राणा
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। प्रदेश गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि पेराई सत्र 2018-2019 में 35, 463 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा गया, इसमें से 34.12 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। इसके अलावा सपा सरकार के चार साल के बकाया 4443 करोड़ रुपये का भी भुगतान कराया है। आजादी के बाद योगी सरकार ने सबसे अधिक गन्ना मूल्य भुगतान 50,000 करोड़ रुपये कराया हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की प्रेरणा से सरकार किसानों के हित में काम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के रेट कम होने के कारण सरकार ने अनुपूरक बजट में 5535 करोड़ रुपये की व्यवस्था गन्ना मूल्य भुगतान के लिए की, जो अब तक का सबसे बड़ा पैकेज गन्ना क्षेत्र के लिए था। अतिरिक्त उत्पादन से चीनी के दामों में आई गिरावट को देखते हुए चीनी के न्यूनतम बिक्री के दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किए। किसानों का भुगतान कराने के लिए चीनी मिलों को सरल ब्याज दर पर ऋण और वित्तीय सहायता देने की घोषणा की और इसके लिए 4000 करोड़ रुपये का प्राविधान किया। पचास चीनी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 2605 करोड़ रुपये की व्यवस्था की। इस साल किए गए गन्ना मूल्य भुगतान पर 381.86 करोड़ की व्यवस्था की। सहकारी क्षेत्र की 24 मिलों को 887 क रोड़ रुपये और निगम की एक मात्र चीनी मिल को 23 करोड़ रुपये का ऋण दिया। पूरे पैकेज की शर्त यही थी कि सारा पैसा सीधे किसानों के खाते में जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली। प्रदेश गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि पेराई सत्र 2018-2019 में 35, 463 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा गया, इसमें से 34.12 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। इसके अलावा सपा सरकार के चार साल के बकाया 4443 करोड़ रुपये का भी भुगतान कराया है। आजादी के बाद योगी सरकार ने सबसे अधिक गन्ना मूल्य भुगतान 50,000 करोड़ रुपये कराया हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की प्रेरणा से सरकार किसानों के हित में काम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के रेट कम होने के कारण सरकार ने अनुपूरक बजट में 5535 करोड़ रुपये की व्यवस्था गन्ना मूल्य भुगतान के लिए की, जो अब तक का सबसे बड़ा पैकेज गन्ना क्षेत्र के लिए था। अतिरिक्त उत्पादन से चीनी के दामों में आई गिरावट को देखते हुए चीनी के न्यूनतम बिक्री के दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किए। किसानों का भुगतान कराने के लिए चीनी मिलों को सरल ब्याज दर पर ऋण और वित्तीय सहायता देने की घोषणा की और इसके लिए 4000 करोड़ रुपये का प्राविधान किया। पचास चीनी मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 2605 करोड़ रुपये की व्यवस्था की। इस साल किए गए गन्ना मूल्य भुगतान पर 381.86 करोड़ की व्यवस्था की। सहकारी क्षेत्र की 24 मिलों को 887 क रोड़ रुपये और निगम की एक मात्र चीनी मिल को 23 करोड़ रुपये का ऋण दिया। पूरे पैकेज की शर्त यही थी कि सारा पैसा सीधे किसानों के खाते में जाएगा।
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