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वैज्ञानिक साक्ष्यों ने भी साबित की सरस्वती नदी की प्रमाणिकता

Thu, 12 Apr 2018 02:28 AM IST
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:28 AM IST
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वैज्ञानिक साक्ष्यों ने भी साबित की सरस्वती नदी की प्रमाणिकता
विलुप्त होकर भी सरस्वती देगी राजस्थान को पानी
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मेरठ। विलुप्त सरस्वती आज भी राजस्थान की मरूभूमि को पानी दे रही है। वैज्ञानिक साक्ष्यों से साफ हो गया है कि सरस्वती नदी इस पूरे इलाके की लाइफ लाइन थी। ये बातें बुधवार को वैज्ञानिकों ने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कही। इस दौरान उन्होंने सरस्वती नदी की प्रमाणिकता के साक्ष्य प्रस्तुत किए।
इसरो के पश्चिमी क्षेत्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र जोधपुर से आए वैज्ञानिक डॉ. बीके भद्रा ने कहा कि 50 वर्षों से सरस्वती नदी पर शोध हो रहा है। विज्ञान इतिहास से अलग नहीं है। ऋग्वेद, महाभारत और अन्य पौराणिक ग्रंथों में सरस्वती नदी का उल्लेख है। डॉ. भद्रा ने कहा कि इसरो ने सेटेलाइट के माध्यम से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात आदि में सरस्वती से संबंधित स्थानों को चिन्ह्ति किया है। सेटेलाइट से मिले चित्रों के स्थान पर जैसलमेर में 2000-2002 के बीच 21 नलकूप खोदे गए, जिनमें मीठा पेयजल का भंडार मिला है। सरस्वती नदी शोध संस्थान, जोधपुर से आए मदन गोपाल व्यास ने कहा कि 1869 में खंभात की खाड़ी और 1893 में राजस्थान में सदानीरा के प्रमाण मिल चुके हैं। भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर भी सदानीरा के प्रवाह मार्ग की पुष्टि कर चुका है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने सरस्वती नदी के प्रवाह पर जन उपयोगी कार्यों को करने के लिए 68.67 करोड़ रुपये की योजना बनाकर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर जिलों में कोर ड्रिलिंग करवाई जाएगी। पश्चिमी राजस्थान में जीपीआरएस सर्वे कराकर इस नदी के प्रवाह मार्ग पर कम से कम सौ ट्यूबवेल लगवाए जाएंगे।
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कार्यशाला में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. आराधना ने अतिथियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कौषिकी दास गुप्ता ने किया। डॉ. अजय विजय कौर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अध्यक्षीय उद्भाषण अनिल गुप्ता ने दिया। इस दौरान डॉ. सुचि, डॉ. अलका, डॉ. किरन, डॉ. प्रवीन, डॉ. रीनू जैन, कमलकांत, लोकेश शर्मा और मोहित आदि का विशेष सहयोग रहा।
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खास बातें:
- इतिहास विभाग में इसरो के वैज्ञानिक बोले, साक्ष्यों ने साबित की सरस्वती नदी की प्रमाणिकता
- 1996 से इसरो सरस्वती नदी पर कर रहा है शोध, ब्रिटिश काल के मानचित्र में भी है उल्लेख
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