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किताबों व फीस खबर
Updated Thu, 29 Mar 2018 02:16 AM IST
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छोड़ ऑफिस, काम पैरेंट्स पहुंच रहे किताबों की दुकान
मेरठ। बच्चों के स्कूल शुरू होने से पहले अभिभावक परेशान है। पापा ऑफिस से छुट्टी लेकर बच्चों की किताबें खरीदने जा रहे हैं। व्यापारी पिता अपनी दुकान बंद कर बाजारों में दिख रहे है। मम्मियों को भी चिंता है कि घर का काम जल्दी करके बच्चों की किताबें, यूनिफार्म ले आएं। अगर वक्त पर किताबें या यूनिफार्म नहीं खरीद पाए तो किताबें खत्म हो जाएगी। बाजार में किताबों की शॉर्टेज बहुत होती है। ऐसा न हो कि किताबें खत्म हो जाएं और उनका बच्चा बिना किताबों के रह जाए। बाद में उसी सिलेबस की किताबें मिलना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में मम्मियों की दौड़ भी घर का काम और पार्टी छोड़कर पहले किताबों की दुकान पर है। परेशान अभिभावकों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हैं।
सोफिया के सामने ही यूनिफार्म की दुकान
शहर के सबसे बड़े सोफिया गर्ल्स स्कूल क ी यूनिफार्म की दुकान स्कूल के सामने ही खुली है। स्कूल के सामने बैठने वाले टेलर से ही अधिकांश छात्राओं की यूनिफार्म तैयार होती है। स्कूल भी सजेस्ट करता है कि इसी दुकान से बच्ची की यूनिफार्म सिलवाएं। वहीं दुकानदार ने भी अपने यहां स्कूल के नाम के साथ बोर्ड टांगा है।
खास बातें:
किताबें व यूनिफार्म के लिए लगी कतारें
परेशान अभिभावक कोई नहीं होती सुनवाई
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मेरठ। बच्चों के स्कूल शुरू होने से पहले अभिभावक परेशान है। पापा ऑफिस से छुट्टी लेकर बच्चों की किताबें खरीदने जा रहे हैं। व्यापारी पिता अपनी दुकान बंद कर बाजारों में दिख रहे है। मम्मियों को भी चिंता है कि घर का काम जल्दी करके बच्चों की किताबें, यूनिफार्म ले आएं। अगर वक्त पर किताबें या यूनिफार्म नहीं खरीद पाए तो किताबें खत्म हो जाएगी। बाजार में किताबों की शॉर्टेज बहुत होती है। ऐसा न हो कि किताबें खत्म हो जाएं और उनका बच्चा बिना किताबों के रह जाए। बाद में उसी सिलेबस की किताबें मिलना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में मम्मियों की दौड़ भी घर का काम और पार्टी छोड़कर पहले किताबों की दुकान पर है। परेशान अभिभावकों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हैं।
सोफिया के सामने ही यूनिफार्म की दुकान
शहर के सबसे बड़े सोफिया गर्ल्स स्कूल क ी यूनिफार्म की दुकान स्कूल के सामने ही खुली है। स्कूल के सामने बैठने वाले टेलर से ही अधिकांश छात्राओं की यूनिफार्म तैयार होती है। स्कूल भी सजेस्ट करता है कि इसी दुकान से बच्ची की यूनिफार्म सिलवाएं। वहीं दुकानदार ने भी अपने यहां स्कूल के नाम के साथ बोर्ड टांगा है।
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खास बातें:
किताबें व यूनिफार्म के लिए लगी कतारें
परेशान अभिभावक कोई नहीं होती सुनवाई