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टेंडर के चक्कर में अटका गांवों का विकास
Updated Wed, 12 Sep 2018 02:12 AM IST
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टेंडर के चक्कर में अटका गांवों का विकास
मेरठ। योगी सरकार ने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार समाप्त करने और पारदर्शिता लाने के लिए ई टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की थी। सरकारी विभागों ने कुछ हीलाहवाली के बाद इस प्रक्रिया को अपना लिया है। लेकिन ग्राम पंचायतों में प्रधान इसके विरोध में डटे रहे। जिस कारण ग्राम पंचायतों का विकास कार्य अटक गया।
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत सचिव अपने बचाव के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाने पर जोर दे रहे हैं। जबकि ग्राम प्रधान इसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानों का कहना है कि गांवों में विकास कार्यों के लिए इतना पैसा नहीं आता है कि टेंडर प्रक्रिया को अपनाया जा सके। प्रधानों का कहना था कि गांवों के विकास कार्य ई टेंडरिंग से दूर रखे जाएं और सीधे पूर्व की प्रक्रिया के तहत ही हों। लेकिन ग्राम पंचायत सचिव अपने बचाव के लिए प्रधानों की बात मानने से इंकार कर रहे हैं। ग्राम पंचायत सचिवों का कहना है कि यदि कहीं भी कोई गड़बड़ होती है तो सीधे-सीधे सरकारी कर्मचारी होने के कारण गाज उन पर ही गिरेगी। प्रधानों और सचिवों की इस खींचतान में गांवों के विकास कार्य लगभग पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। इस समय स्थिति ये है कि एक-दो लाख रुपये के विकास कार्य जो टेंडर से बाहर हैं, उनको ही गांवों में कराया जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्राम प्रधान संगठन भी कई बार अधिकारियों से मुलाकात कर दबाव बना चुका है।
अब निकाला गया समस्या का हल
जिला पंचायत राज अधिकारी ब्रह्मचारी दूबे ने कहा कि ई टेंडरिंग 10 लाख से ऊपर के विकास कार्य पर है। इसलिए ग्राम पंचायत से इससे लगभग बाहर ही हैं। लेकिन टेंडर प्रक्रिया जरूरी है। बावजूद इसके प्रधान इसका विरोध कर रहे थे। जिस पर पिछले दिनों इसका हल निकाल लिया गया है। यदि किसी विकास कार्य में तीन लाख रुपये से ऊपर का मैटीरियल लगता है, तो उसका मैटीरियल टेंडर छोड़ा जाएगा और इसके अलावा वर्क टेंडर भी छोड़ा जायेगा। जबकि इससे नीचे के काम पर पूर्व प्रक्रिया के तहत ही विकास करा सकेंगे। इसके अलावा अब काम सीधे ग्राम पंचायत ही कराएगी, इसमें किसी अन्य का हस्तक्षेप नहीं होगा। जिस पर सहमति के बाद अब ग्राम पंचायतों में विकास कार्य होना शुरू हो रहे हैं।
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मेरठ। योगी सरकार ने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार समाप्त करने और पारदर्शिता लाने के लिए ई टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की थी। सरकारी विभागों ने कुछ हीलाहवाली के बाद इस प्रक्रिया को अपना लिया है। लेकिन ग्राम पंचायतों में प्रधान इसके विरोध में डटे रहे। जिस कारण ग्राम पंचायतों का विकास कार्य अटक गया।
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत सचिव अपने बचाव के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाने पर जोर दे रहे हैं। जबकि ग्राम प्रधान इसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानों का कहना है कि गांवों में विकास कार्यों के लिए इतना पैसा नहीं आता है कि टेंडर प्रक्रिया को अपनाया जा सके। प्रधानों का कहना था कि गांवों के विकास कार्य ई टेंडरिंग से दूर रखे जाएं और सीधे पूर्व की प्रक्रिया के तहत ही हों। लेकिन ग्राम पंचायत सचिव अपने बचाव के लिए प्रधानों की बात मानने से इंकार कर रहे हैं। ग्राम पंचायत सचिवों का कहना है कि यदि कहीं भी कोई गड़बड़ होती है तो सीधे-सीधे सरकारी कर्मचारी होने के कारण गाज उन पर ही गिरेगी। प्रधानों और सचिवों की इस खींचतान में गांवों के विकास कार्य लगभग पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। इस समय स्थिति ये है कि एक-दो लाख रुपये के विकास कार्य जो टेंडर से बाहर हैं, उनको ही गांवों में कराया जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्राम प्रधान संगठन भी कई बार अधिकारियों से मुलाकात कर दबाव बना चुका है।
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अब निकाला गया समस्या का हल
जिला पंचायत राज अधिकारी ब्रह्मचारी दूबे ने कहा कि ई टेंडरिंग 10 लाख से ऊपर के विकास कार्य पर है। इसलिए ग्राम पंचायत से इससे लगभग बाहर ही हैं। लेकिन टेंडर प्रक्रिया जरूरी है। बावजूद इसके प्रधान इसका विरोध कर रहे थे। जिस पर पिछले दिनों इसका हल निकाल लिया गया है। यदि किसी विकास कार्य में तीन लाख रुपये से ऊपर का मैटीरियल लगता है, तो उसका मैटीरियल टेंडर छोड़ा जाएगा और इसके अलावा वर्क टेंडर भी छोड़ा जायेगा। जबकि इससे नीचे के काम पर पूर्व प्रक्रिया के तहत ही विकास करा सकेंगे। इसके अलावा अब काम सीधे ग्राम पंचायत ही कराएगी, इसमें किसी अन्य का हस्तक्षेप नहीं होगा। जिस पर सहमति के बाद अब ग्राम पंचायतों में विकास कार्य होना शुरू हो रहे हैं।
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