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कन्या विद्या धन घोटाला
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12 साल बाद सामने आएगी सच्चाई, होगी कार्रवाई
कन्या विद्या धन घोटाला
- 52 अपात्र छात्राओं को 2006-07 में बांटे गए थे 20-20 हजार रुपये
- सतर्कता अधिष्ठान टीम ने डीआईओएस कार्यालय से मांगा ब्योरा
- इंडियन ओवरसीज बैंक प्रबंधन से मांगी गई खातों की जानकारी
अरीश रिजवी
मेरठ।
कन्या विद्या धन घोटाले की करीब 12 साल से दबी फाइल फिर बाहर आ गई है। शासन की गंभीरता की वजह से उप्र सतर्कता अधिष्ठान ने जांच तेज कर दी है। साल 2006-07 में 52 अपात्रों को बांटे गए 20-20 हजार रुपये के बारे में इंडियन ओवरसीज बैंक प्रबंधन से खातों का ब्योरा मांगा गया है। इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से उन छात्राओं की जानकारी मांगी गई है। माना जा रहा है कि सच्चाई सामने आएगी और कार्रवाई होगी।
उप्र में 2003 में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कन्या विद्या धन योजना शुरू की थी। इसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें मेरठ जनपद में सदर, सरधना और मवाना तहसील में रहे एक एसडीएम, तीन तहसीलदार और 16 लेखपाल फंसे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन सभी से यह धन ब्याज सहित वसूला जा सकता है। इस मामले में दो अधिकारी और आधे से ज्यादा लेखपाल रिटायर्ड हो चुके हैं, जबकि दो दूसरे जनपदों में तैनात हैं। इस बीच दो सरकारें बदलीं, लेकिन जांच रिपोर्ट का खुलासा न होने से कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब फिर से रिपोर्ट बाहर आई है।
यह है मामला
कन्या विद्या धन योजना के तहत 12वीं उत्तीर्ण निर्धन कन्याओं को 20-20 हजार रुपये आर्थिक सहायता दी गई थी। योजना में तहसील कर्मचारियों की साठगांठ से अपात्रों ने फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर लाभ उठा लिया था। प्रदेश में यह घोटाला 2006-07 में हुआ। 2007 में बसपा सरकार ने इस मामले की जांच प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को सौंप दी थी। पूरे प्रदेश के जनपदों में जांच हुई, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इसके बाद 2012 में फिर से सपा सरकार आई और पूरी जांच रिपोर्ट दबा दी गई।
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प्रदेश में 27 करोड़ का हुआ था घोटाला
सूत्रों के मुताबिक उप्र में करीब 27 करोड़ का फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें 10 लाख रुपये से ज्यादा का फर्जीवाड़ा मेरठ में हुआ था। मेरठ से 52 अपात्र लड़कियों के फर्जी आय के प्रमाण पत्र बनाकर उन्हें निर्धन बताया गया और कन्या विद्या धन दिला दिया गया।
तेजी से चल रही जांच
2006-07 में बांटे गए कन्या विद्या धन मामले की जांच तेजी से चल रही है। इससे संबंधित जानकारी इंडियन ओवरसीज बैंक और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मांगी गई है।
- राम सुरेश यादव, एसपी, ईओडब्ल्यू
---
जांच में किया जाएगा सहयोग
कन्या विद्या धन के संबंध में अगर कार्यालय से कोई जानकारी मांगी गई है और वह जानकारी कार्यालय में उपलब्ध है तो उसे संबंधित विभाग को दिया जाएगा। जांच में सहयोग किया जाएगा।
- गिरजेश चौधरी, जिला विद्यालय निरीक्षक
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कन्या विद्या धन घोटाला
- 52 अपात्र छात्राओं को 2006-07 में बांटे गए थे 20-20 हजार रुपये
- सतर्कता अधिष्ठान टीम ने डीआईओएस कार्यालय से मांगा ब्योरा
- इंडियन ओवरसीज बैंक प्रबंधन से मांगी गई खातों की जानकारी
अरीश रिजवी
मेरठ।
कन्या विद्या धन घोटाले की करीब 12 साल से दबी फाइल फिर बाहर आ गई है। शासन की गंभीरता की वजह से उप्र सतर्कता अधिष्ठान ने जांच तेज कर दी है। साल 2006-07 में 52 अपात्रों को बांटे गए 20-20 हजार रुपये के बारे में इंडियन ओवरसीज बैंक प्रबंधन से खातों का ब्योरा मांगा गया है। इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से उन छात्राओं की जानकारी मांगी गई है। माना जा रहा है कि सच्चाई सामने आएगी और कार्रवाई होगी।
उप्र में 2003 में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कन्या विद्या धन योजना शुरू की थी। इसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें मेरठ जनपद में सदर, सरधना और मवाना तहसील में रहे एक एसडीएम, तीन तहसीलदार और 16 लेखपाल फंसे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन सभी से यह धन ब्याज सहित वसूला जा सकता है। इस मामले में दो अधिकारी और आधे से ज्यादा लेखपाल रिटायर्ड हो चुके हैं, जबकि दो दूसरे जनपदों में तैनात हैं। इस बीच दो सरकारें बदलीं, लेकिन जांच रिपोर्ट का खुलासा न होने से कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब फिर से रिपोर्ट बाहर आई है।
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यह है मामला
कन्या विद्या धन योजना के तहत 12वीं उत्तीर्ण निर्धन कन्याओं को 20-20 हजार रुपये आर्थिक सहायता दी गई थी। योजना में तहसील कर्मचारियों की साठगांठ से अपात्रों ने फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर लाभ उठा लिया था। प्रदेश में यह घोटाला 2006-07 में हुआ। 2007 में बसपा सरकार ने इस मामले की जांच प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को सौंप दी थी। पूरे प्रदेश के जनपदों में जांच हुई, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इसके बाद 2012 में फिर से सपा सरकार आई और पूरी जांच रिपोर्ट दबा दी गई।
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प्रदेश में 27 करोड़ का हुआ था घोटाला
सूत्रों के मुताबिक उप्र में करीब 27 करोड़ का फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें 10 लाख रुपये से ज्यादा का फर्जीवाड़ा मेरठ में हुआ था। मेरठ से 52 अपात्र लड़कियों के फर्जी आय के प्रमाण पत्र बनाकर उन्हें निर्धन बताया गया और कन्या विद्या धन दिला दिया गया।
तेजी से चल रही जांच
2006-07 में बांटे गए कन्या विद्या धन मामले की जांच तेजी से चल रही है। इससे संबंधित जानकारी इंडियन ओवरसीज बैंक और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मांगी गई है।
- राम सुरेश यादव, एसपी, ईओडब्ल्यू
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जांच में किया जाएगा सहयोग
कन्या विद्या धन के संबंध में अगर कार्यालय से कोई जानकारी मांगी गई है और वह जानकारी कार्यालय में उपलब्ध है तो उसे संबंधित विभाग को दिया जाएगा। जांच में सहयोग किया जाएगा।
- गिरजेश चौधरी, जिला विद्यालय निरीक्षक