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क्या-क्या बीता निजी लाइफ में, उस पर रच दिया उपन्यास
बरेली/शालिनी
Updated Sun, 16 Jun 2013 01:29 AM IST
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सुबह से शाम तक किताबों में उलझे रहना। लाशों को चीड़ना-फाड़ना। एक ऑमलेट में दो दोस्तों का साझा करना। छोटी-छोटी बात पर दोस्त से तुनक जाना, फिर कुछ देर बाद ही मान जाना।
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कैफेटेरिया में नोट्स पर आंखें गड़ाएं रहना, इम्तिहान खत्म होने के बाद खूब धमाल करना। मानों यहां हर व्यक्ति के अंदर एक उपन्यास चल है... ये सब मेडिकल की छात्रा असबा के उपन्यास का हिस्सा बन गया।
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शहर के न्यू आजादपुरम में रहने वाली असबा ने मेडिकल के स्टूडेंट पर ‘इन अ हार्ट बीट’ नॉवेल लिखा है। इसे पेंग्वुइन ने प्रकाशित किया है।
लखनऊ में एमडी की तैयारी कर असबा शायर शम्स बदायूंनी की बेटी हैं।
असबा को बचपन से पढ़ने और लिखने का शौक था। वह पांचवीं कक्षा में पढ़ती थीं, जब पहली बार कहानी लिखी थी।
असबा ने बताया कि एसआरएमएस में एमबीबीएस के लिए जब दाखिला लिया तो वहां पर अजीबोगरीब जिंदगी देखी तो लगा कि कुछ लिखा जाना चाहिए।
हालांकि, डेली रूटीन तो मैं डायरी में लिखती थी, बाद में उसे से मैंने उपन्यास तैयार कर लिया।
चूंकि मेडिकल लाइफ पर उपन्यास बहुत कम ही लिखे मिलते हैं, इसलिए यूनिक विषय होने की वजह से पेंग्वुइन ने इसे प्रकाशित किया। यह उपन्यास एमबीबीएस फर्स्ट ईयर पर है।
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असबा इसी का सीक्युअल एमबीबीएस सेकेंड ईयर पर दूसरा पार्ट लिख रही हैं।
असबा ने बताया कि चेतन भगत के उपन्यास पढ़ती तो लगता था कि जैसे उन्होंने इंजीनियरिंग के स्टूडेंट पर लिखा वैसे ही मैं भी मेडिकल स्टूडेंट की लाइफ पर लिख सकती हूं।
असबा ने कहा कि उन्हें चेतन भगत नॉवेल से काफी प्रेरणा मिली है।
हार्टमैन कॉलेज से इंटरमीडिएट करने वाली असबा इन दिनों लखनऊ में एमडी की तैयारी कर रही हैं।
अभी तो फिलहाल असबा अंग्रेजी भाषा में ही उपन्यास लिख रही हैं, लेकिन कुछ सालों बाद वह हिंदी में लिखेंगी।
असबा को पाउलो काएलो के उपन्यास बहुत पसंद हैं। खासतौर पर उन उपन्यासों के जीवंत चरित्र, जो जीने के लिए नई राह दिखाते हैं और कुछ नया करने की प्रेरणा है।
क्रॉस वर्ड बुक अवार्ड के लिए भी असबा की किताब नामित की गई है।