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महिला अस्पताल: पुरूष चिकित्सक के भरोसे महिला मरीजों का इलाज
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मऊ। जिला महिला अस्पताल इन दिनों डॉक्टरों की कमी के बीच जैसे-तैसे संचालित हो रहा है। महिला मरीजों का इलाज किसी तरह हो सके इसके लिए दो संविदा चिकित्सकों की तैनाती की गई है। वर्तमान में आयुष पुरुष चिकित्सक द्वारा महिला मरीजों का इलाज किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। स्थिति यह है कि एक चिकित्सक छुट्टी पर हैं तो एक चिकित्सक ट्रेंनिंग के लिए गोरखपुर गईं हैं। गई हैं। मंगलवार को मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण सीएमएस ने भी मरीजों का इलाज किया।
जिला महिला अस्पताल में इस समय 300 से 400 की ओपीडी है। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते जैसे-तैसे मरीजों को इलाज किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल में 29 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं जबकि महज नौ पदों पर ही तैनाती है। महिला मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल में स्वीकृत चार स्त्री रोग विशेषज्ञ के सापेक्ष दो पदों पर ही चिकित्सकों की तैनाती है। इनमें से एक संविदा चिकित्सक हैं जो तीन दिन की छुट्टी पर हैं। जबकि एक महिला चिकित्सक गोरखपुर ट्रेनिंग में गई हुई हैं। अस्पताल में सुबह 12 बजे अस्पताल में मरीज चिकित्सक का इंतजार करते दिखे। जबकि आयुष पुरुष चिकित्सक डा. कमाल खान ही महिला मरीजों का इलाज करते दिखे। जबकि एक चिकित्सक का चेंबर तो खुला था, लेकिन वह अपने चेंबर में दिखाई नहीं दीं। काफी संख्या में मरीज चेंबर के बाहर उनका इंतजार करते रहे।
अस्पताल में इलाज कराने आईं मर्यादपुर निवासिनी आराधना यादव ने बताया कि डिलीवरी के लिए दो दिन बाद डॉक्टर की दी तारीख पर इलाज कराने को आईं थीं पर लेकिन चिकित्सक के न होने के कारण उन्हें काफी परेशान होना पड़ा। परदहां निवासिनी सुनीता मौर्या ने बताया कि वह महिला चिकित्सक को दिखाने के लिए आई थीं। लेकिन चिकित्सक के न होने के कारण वह काफी परेशान रहीं। अस्पताल में इलाज के लिए आईं पूजा और श्यामा देवी ने बताया कि अस्पताल में इलाज के लिए वह काफी परेशान हुए। चिकित्सक की कमी के कारण उन्हें काफी देर इंतजार करना पड़ा।
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सीएमएस डा. चंदा सिन्हा ने बताया कि डा. रीमा यादव गोरखपुर में ट्रेनिंग में गई हैं। जबकि डा. स्वाति गुप्ता तीन दिन की छुट्टी पर हैं। डा. माया राय, आयुष चिकित्सक डा. कमाल खान तथा एनेस्थिसिया के चिकित्सक डा. पीसी झा से मरीजों का इलाज कराया जा रहा है। वह भी खुद मरीजों का इलाज कर रही हैं।
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जिला महिला अस्पताल में इस समय 300 से 400 की ओपीडी है। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते जैसे-तैसे मरीजों को इलाज किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल में 29 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं जबकि महज नौ पदों पर ही तैनाती है। महिला मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल में स्वीकृत चार स्त्री रोग विशेषज्ञ के सापेक्ष दो पदों पर ही चिकित्सकों की तैनाती है। इनमें से एक संविदा चिकित्सक हैं जो तीन दिन की छुट्टी पर हैं। जबकि एक महिला चिकित्सक गोरखपुर ट्रेनिंग में गई हुई हैं। अस्पताल में सुबह 12 बजे अस्पताल में मरीज चिकित्सक का इंतजार करते दिखे। जबकि आयुष पुरुष चिकित्सक डा. कमाल खान ही महिला मरीजों का इलाज करते दिखे। जबकि एक चिकित्सक का चेंबर तो खुला था, लेकिन वह अपने चेंबर में दिखाई नहीं दीं। काफी संख्या में मरीज चेंबर के बाहर उनका इंतजार करते रहे।
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अस्पताल में इलाज कराने आईं मर्यादपुर निवासिनी आराधना यादव ने बताया कि डिलीवरी के लिए दो दिन बाद डॉक्टर की दी तारीख पर इलाज कराने को आईं थीं पर लेकिन चिकित्सक के न होने के कारण उन्हें काफी परेशान होना पड़ा। परदहां निवासिनी सुनीता मौर्या ने बताया कि वह महिला चिकित्सक को दिखाने के लिए आई थीं। लेकिन चिकित्सक के न होने के कारण वह काफी परेशान रहीं। अस्पताल में इलाज के लिए आईं पूजा और श्यामा देवी ने बताया कि अस्पताल में इलाज के लिए वह काफी परेशान हुए। चिकित्सक की कमी के कारण उन्हें काफी देर इंतजार करना पड़ा।
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सीएमएस डा. चंदा सिन्हा ने बताया कि डा. रीमा यादव गोरखपुर में ट्रेनिंग में गई हैं। जबकि डा. स्वाति गुप्ता तीन दिन की छुट्टी पर हैं। डा. माया राय, आयुष चिकित्सक डा. कमाल खान तथा एनेस्थिसिया के चिकित्सक डा. पीसी झा से मरीजों का इलाज कराया जा रहा है। वह भी खुद मरीजों का इलाज कर रही हैं।