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खुद के भवन में संचालित होगा महिला जिला अस्पताल
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नगर के बाल निकेतन तिराहा स्थित महिला जिला अस्पताल का दशकों पुराना भवन जर्जर हो चुका है। जर्जर भवन के चलते इसमें संचालित जिला महिला अस्पताल को बगल में ही बने पांच मंजिला नए भवन एमसीएच विंग में शिफ्ट कर संचालित किया जा रहा है। लेकिन जल्द ही खुद के नए भवन में संचालित होगा।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जर्जर महिला अस्पताल के भवन को तोड़कर इस पर नया भवन बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। विभाग ने इसके लिए भवन को तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेज चुका है, जहां इसका मूल्यांकन करने के बाद भवन को गिराने के बाद नए भवन बनाने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
100 बेड वाला महिला जिला अस्पताल का भवन बीते तीन वर्षों से एमसीएच विंग के पांच मंजिला भवन में संचालित हो रहा है। नियमानुसार बात करें तो मेटरनिटी विंग में ओपीडी का संचालन नहीं हो सकता, लेकिन महिला अस्पताल का पुराना भवन जर्जर होने चलते मैटरनिटी विंग के साथ इसमें ओपीडी का भी संचालन हो रहा है। अमर उजाला द्वारा ही जर्जर भवन में संचालित महिला अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर 31 जुलाई 2018 को टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव सहित दूसरे शीर्षकों से कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद प्रशासन ने इसे बगल में बने पांच मंजिला में शिफ्ट कराया था। लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी महिला जिला अस्पताल के कंडम भवन को ढहाकर उसकी जगह नया भवन बनाने की कवायद शुरू नहीं की गई थी। लेकिन अब विभाग द्वारा एक बार फिर से इसको लेकर कवायद शुरू करते हुए लोक निर्माण विभाग को इस जर्जर भवन का मूल्यांकन कर इसे ढहाने का रिमाइंडर पत्र भेजा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता रामनयद प्रसाद ने बताया कि पीडब्ल्यूडी को इससे पहले भी कई पत्र भेजा गया,। अब पुन: पत्र भेजकर जर्जर भवन का मूल्यांकन कर इसे ढहाने को जिक्र किया गया है। जिससे इस भवन की जगह नया भवन बनाने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा सके।
एमसीएच विंग में मां शिशु का होता है इलाज
एमसीएच विंग (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ ) में मां और शिशु का उपचार एक ही छत के नीचे किया जाता है। प्रसव से पहले गर्भवती महिला को इस विंग में रखा जाता है। प्रसव के बाद शिशु के इलाज के साथ मां का इलाज इसी विंग में किया जाता है। 100 बेड के इस मैटरनल एंड चाइल्डविंग से जनपद के गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं का इलाज आसान हुआ है। इससे डाक्टर सहित मरीज और उनके तीमारदारों को काफी सहूलियत मिलती है।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा जर्जर महिला अस्पताल के भवन को तोड़कर इस पर नया भवन बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। विभाग ने इसके लिए भवन को तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग को प्रस्ताव बनाकर भेज चुका है, जहां इसका मूल्यांकन करने के बाद भवन को गिराने के बाद नए भवन बनाने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
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100 बेड वाला महिला जिला अस्पताल का भवन बीते तीन वर्षों से एमसीएच विंग के पांच मंजिला भवन में संचालित हो रहा है। नियमानुसार बात करें तो मेटरनिटी विंग में ओपीडी का संचालन नहीं हो सकता, लेकिन महिला अस्पताल का पुराना भवन जर्जर होने चलते मैटरनिटी विंग के साथ इसमें ओपीडी का भी संचालन हो रहा है। अमर उजाला द्वारा ही जर्जर भवन में संचालित महिला अस्पताल में अव्यवस्था को लेकर 31 जुलाई 2018 को टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव सहित दूसरे शीर्षकों से कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद प्रशासन ने इसे बगल में बने पांच मंजिला में शिफ्ट कराया था। लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी महिला जिला अस्पताल के कंडम भवन को ढहाकर उसकी जगह नया भवन बनाने की कवायद शुरू नहीं की गई थी। लेकिन अब विभाग द्वारा एक बार फिर से इसको लेकर कवायद शुरू करते हुए लोक निर्माण विभाग को इस जर्जर भवन का मूल्यांकन कर इसे ढहाने का रिमाइंडर पत्र भेजा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता रामनयद प्रसाद ने बताया कि पीडब्ल्यूडी को इससे पहले भी कई पत्र भेजा गया,। अब पुन: पत्र भेजकर जर्जर भवन का मूल्यांकन कर इसे ढहाने को जिक्र किया गया है। जिससे इस भवन की जगह नया भवन बनाने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा सके।
एमसीएच विंग में मां शिशु का होता है इलाज
एमसीएच विंग (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ ) में मां और शिशु का उपचार एक ही छत के नीचे किया जाता है। प्रसव से पहले गर्भवती महिला को इस विंग में रखा जाता है। प्रसव के बाद शिशु के इलाज के साथ मां का इलाज इसी विंग में किया जाता है। 100 बेड के इस मैटरनल एंड चाइल्डविंग से जनपद के गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं का इलाज आसान हुआ है। इससे डाक्टर सहित मरीज और उनके तीमारदारों को काफी सहूलियत मिलती है।