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महिलाओं ने संकटा चौथ पर संतान के लिए रखा व्रत
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मऊ/वलीदपुर। माघ तीसरे पक्ष की चौथ को संकटी गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। शुक्रवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने बच्चों के स्वस्थ तथा दीर्घायु की कामना किया। मान्यता है कि यह व्रत बच्चों को बुरी नजर से भी बचाता है, जो मां अपने बच्चों के लिए इस दिन व्रत रखती है वह बच्चे जीवन में कई तरह के संकटों से दूर रहते हैं। चौथ का व्रत जीवन में सुख समृद्धि लाता है। इस व्रत को संतान के लिए श्रेष्ठ माना गया है। मां द्वारा रखे जाने वाला यह व्रत बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधा को भी दूर करने वाला भी माना गया है। संतान पर भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है।
नगर के फातिमा मोड़ स्थित मां मनोकामना मंदिर के पुजारी शुभम मिश्रा ने बताया कि इस दिन मां अपने बच्चों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। रात्रि में भगवान गणेश को तिल, गुड़ तथा चने का भोग लगाया जाता है तथा रात में चंद्र देव की पूजा के बाद बच्चों द्वारा अर्घ्य देती है। जिससे उनके परिवार में सुख समृद्धि कायम रहे तथा परिवार के लोग स्वस्थ रहे। मान्यता है कि इस दिन निर्जला व्रत रखकर मां पार्वती ने अपने पुत्र गणेश के लिए मंगलकामना की थी। तभी से महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य व जीवन में सुख समृद्धि की कामना के लिए संकट चौथ का व्रत रखती हैं। संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। संकट हरने के लिए गणपति से अर्चना होती है। उन्हें विशेष तौर पर तिल के मोदक चढ़ाए जाते हैं।
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नगर के फातिमा मोड़ स्थित मां मनोकामना मंदिर के पुजारी शुभम मिश्रा ने बताया कि इस दिन मां अपने बच्चों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। रात्रि में भगवान गणेश को तिल, गुड़ तथा चने का भोग लगाया जाता है तथा रात में चंद्र देव की पूजा के बाद बच्चों द्वारा अर्घ्य देती है। जिससे उनके परिवार में सुख समृद्धि कायम रहे तथा परिवार के लोग स्वस्थ रहे। मान्यता है कि इस दिन निर्जला व्रत रखकर मां पार्वती ने अपने पुत्र गणेश के लिए मंगलकामना की थी। तभी से महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य व जीवन में सुख समृद्धि की कामना के लिए संकट चौथ का व्रत रखती हैं। संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। संकट हरने के लिए गणपति से अर्चना होती है। उन्हें विशेष तौर पर तिल के मोदक चढ़ाए जाते हैं।
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