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महामारी में बच्चों के पोषण की किसे फिक्र

Fri, 23 Jul 2021 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 11:36 PM IST
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Who cares about the nutrition of children in the epidemic
मऊ। कोविड के चलते कुपोषण पर से ध्यान हटा है जबकि तीसरी लहर को बच्चों के लिए ही जोखिम वाला बताया जा रहा है। जून माह में चले विशेष वजन सप्ताह में चार हजार से अतिकुपोषित बच्चे पाए गए थे। मगर जिला अस्पताल एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में छह माह में केवल नौ बच्चों का ही पोषण पुनर्वास किया गया है। वर्तमान में तीन बच्चे भर्ती हैं।
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बच्चों की सेहत की निगहबानी का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के चार सदस्यों वाली 18 आरबीएस टीम तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के 2587 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर है। कुपोषण और भुखमरी के खिलाफ मुहिम के तहत जिले के अधिकारियों ने गांवों को गोद लेकर अभियान शुरू किया था। जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। कोविड के चलते कुपोषण के खिलाफ मुहिम ठंडी पड़ गई है।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने 18 से 24 जून तक वजन सप्ताह का आयोजन किया था। इसमें जिले की चार तहसील में चार हजार अतिकुपोषित बच्चे पाए गए थे। मगर पोषण पुनर्वास केंद्र में छह महीने में महज नौ बच्चों को ही भर्ती कराया गया। दस बिस्तर वाले पोषण पुनर्वास केंद्र में बाल रोग विशेष समेत दस चिकित्साकर्मी तैनात है। मौजूदा समय में रकौली निवासी हरिनरायण की एक वर्ष पुत्री परी साहनी, संजय की डेढ़ वर्षीय पुत्री डुग्गू तथा नगर क्षेत्र के बुनकर कॉलोनी निवासी अलमान अंसारी की नौ माह की पुत्री शबरीन भर्ती है। इससे जाहिर है कि वजन लेने के बाद विभाग अतिकुपोषित बच्चों को पोषण और पुनार्वास क बात भूल गई। मई माह में कोरोना जब अपने चरम पर था तब किसी बच्चे को यहां भर्ती ही नहीं कराया गया। जो बच्चे अतिकुपोषित पाए गए, उनमें से ज्यादातर को अभिभावक खुद केंद्रों तक लेकर गए थे।
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47 अतिकुपोषित बच्चों को गोद लेने की हो चुकी है पहल
मऊ। जिले में चिह्नित 47 अतिकुपोषित बच्चों को कुपोषण से उबारने के लिए अभिनव पहल शुरू की गई है। इसके तहत जिलाधिकारी, सीडीओ, सीआरओ, एडीएम, एसडीएम सहित 47 अधिकारियों ने 47 बच्चों को गोद लेना है। इसके तहत गत दिवस सीडीओ राम सिंह वर्मा नगर क्षेत्र के औरंगाबाद में एक अतिकुपोषित बच्चों को गोद ले चुके है।

इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेंश कुमार ने बताया कि कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है, जो कि उनके द्वारा किया जाता है। लेकिन उन्हें भर्ती कराने की जिम्मेदारी की आरबीएसके के जिम्मे है। वहीं जिले के प्रभारी सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते आरबीएस की टीम को आरआटी टीम में लगाया गया था। जल्द ही टीमें वापस अपने कार्य क्षेत्र में पहली की तरह कार्य करते हुए कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें दोबारा पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती कराया जाएगा।
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