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126वीं जयंती पर याद करते हुए दी गई श्रद्धांजलि
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Tue, 17 Feb 2015 10:59 PM IST
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नगर क्षेत्र के अस्तुपुरा स्थित सहजानंद चिल्ड्रेन एकेडमी में मंगलवार को स्वामी सहजानंद सरस्वती के 126वीं जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में किसान नेता देवप्रकाश राय और विशिष्ट अतिथि के रूप में राजनितिक चिंतक डा.अजय पांडेय ने स्वामी सहजानंद सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि किसान नेता देवप्रकाश राय ने कहा कि स्वामी पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान किसानों और मजदूरों की समस्याओं को केंद्र में ला दिया।
विशिष्ट अतिथि डा. अजय पांडेय ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती भारतीय पुनर्जागरण के सलाखा पुरुष थे। वे किसानों के मसीहा, पीड़ितों और शोषितों की बहुत बड़ी आवाज थे।
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आजादी के आंदोलन में नेताजी सुबाषचंद बोस जैसे क्रांतिकारी विभूति के साथ उन्होंने जनआंदोलन खड़ा किया। स्वामी सहजानंद जनमंच के अध्यक्ष समीर राय ने कहा कि उनका तार्किक और वैज्ञानिक चिंतन एक पथनिरपेक्ष, राजनितिक, सामाजिक, आर्थिक समतामूलक समाज की रचना के लिए था।
डा.अलका राय ने कहा कि समझौता का मतलब सच्चाई को नकारना है। इसलिए सत्य के पथ पर चलना और सिद्धातों से कभी समझौता न करना उनकी सबसे बड़ी सीख है।
गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी प्रजापति राय ने किया। इस मौके पर अवधनारायण राय, रामाश्रय राय, अवधेश राय, सुनील राय आदि मौजूद रहे।
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जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में किसान नेता देवप्रकाश राय और विशिष्ट अतिथि के रूप में राजनितिक चिंतक डा.अजय पांडेय ने स्वामी सहजानंद सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि किसान नेता देवप्रकाश राय ने कहा कि स्वामी पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान किसानों और मजदूरों की समस्याओं को केंद्र में ला दिया।
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विशिष्ट अतिथि डा. अजय पांडेय ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती भारतीय पुनर्जागरण के सलाखा पुरुष थे। वे किसानों के मसीहा, पीड़ितों और शोषितों की बहुत बड़ी आवाज थे।
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आजादी के आंदोलन में नेताजी सुबाषचंद बोस जैसे क्रांतिकारी विभूति के साथ उन्होंने जनआंदोलन खड़ा किया। स्वामी सहजानंद जनमंच के अध्यक्ष समीर राय ने कहा कि उनका तार्किक और वैज्ञानिक चिंतन एक पथनिरपेक्ष, राजनितिक, सामाजिक, आर्थिक समतामूलक समाज की रचना के लिए था।
डा.अलका राय ने कहा कि समझौता का मतलब सच्चाई को नकारना है। इसलिए सत्य के पथ पर चलना और सिद्धातों से कभी समझौता न करना उनकी सबसे बड़ी सीख है।
गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी प्रजापति राय ने किया। इस मौके पर अवधनारायण राय, रामाश्रय राय, अवधेश राय, सुनील राय आदि मौजूद रहे।