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Mau News: जिला अस्पताल में दो साल से तीन वेंटिलेटर शुरू ही नहीं हो सके
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मऊ। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान जिला अस्पताल को पीएम केयर फंड से पांच वेंटिलेटर मिले थे। इसमें दो जिला अस्पताल की ओटी में लगा दी गई। जबकि तीन वेंटिलेटर अभी तक इंस्टॉल ही नहीं किए गए। इसके कारण मरीजों का लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि वेंटिलेटर का सही करने या बदलने के लिए शासन से चयनित संस्था का पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक पुराने वेंटिलेटर को सही नहीं किया गया है। जिले के सबसे बड़े 100 बेड के जिला अस्पताल में चिकित्सीय सुविधाएं कागजी साबित कर रही है। चौंकाने वाली बात है कि दो वर्ष पहले आए तीन वेंटीलेटर अब तक चालू नहीं किए जा सके। ऐसे में गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बीएचयू रेफर कर दिया जा रहा है।
24 लाख की लागत से खरीदे गए थे वेंटीलेटर
अप्रैल 2020 में जिला अस्पताल में 24 लाख की लागत से वेंटीलेटर खरीदे गए थे, इसमें दो पोर्टबल थे। जब से वेंटीलेटर आए तब से यह अपने स्थानों पर शोपीस बने खड़े हैं। सिर्फ दो वेंटिलेटर का ही मरीजों के उपचार में प्रयोग हो रहा है। सक्रिय दोनों वेंटिलेटर अस्पताल की ओटी में लगे हैं। अस्पताल में वेंटिलेटर लगाने और मेंटेनेंस का काम शासन द्वारा चयनित कंपनी सायरेक्श हेल्थ केयर द्वारा किया गया था। शासन द्वारा हर सोमवार को अस्पताल में लगे मेडिकल उपकरण का बेवसाइट के माध्यम से निगरानी की जाती है। उपकरण में कोई खराबी होने पर पूरा डिटेल वेबसाइट पर दिया जाता है। कंपनी को डिटेल भेजने के बाद कंपनी का इंजीनियर आकर उसे सही करता है। अस्पताल प्रशासन ने कंपनी को कई बार पत्र लिखकर वेंटिलेटर को सही कराने की मांग की गई थी। बावजूद वेंटिलेटर को सही नहीं किया गया है।
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कोट
अस्पताल में लगे वेंटिलेटर को चालू कराने के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया है।
- डॉ. धनंजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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24 लाख की लागत से खरीदे गए थे वेंटीलेटर
अप्रैल 2020 में जिला अस्पताल में 24 लाख की लागत से वेंटीलेटर खरीदे गए थे, इसमें दो पोर्टबल थे। जब से वेंटीलेटर आए तब से यह अपने स्थानों पर शोपीस बने खड़े हैं। सिर्फ दो वेंटिलेटर का ही मरीजों के उपचार में प्रयोग हो रहा है। सक्रिय दोनों वेंटिलेटर अस्पताल की ओटी में लगे हैं। अस्पताल में वेंटिलेटर लगाने और मेंटेनेंस का काम शासन द्वारा चयनित कंपनी सायरेक्श हेल्थ केयर द्वारा किया गया था। शासन द्वारा हर सोमवार को अस्पताल में लगे मेडिकल उपकरण का बेवसाइट के माध्यम से निगरानी की जाती है। उपकरण में कोई खराबी होने पर पूरा डिटेल वेबसाइट पर दिया जाता है। कंपनी को डिटेल भेजने के बाद कंपनी का इंजीनियर आकर उसे सही करता है। अस्पताल प्रशासन ने कंपनी को कई बार पत्र लिखकर वेंटिलेटर को सही कराने की मांग की गई थी। बावजूद वेंटिलेटर को सही नहीं किया गया है।
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कोट
अस्पताल में लगे वेंटिलेटर को चालू कराने के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया है।
- डॉ. धनंजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक