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Mau News: डाला छठ पर देवलास सूर्य मंदिर पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब

Sat, 18 Nov 2023 11:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Nov 2023 11:50 PM IST
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There will be a flood of faith at Devlas Sun Temple on Dala Chhath.
मऊ / वलीदपुर। मुहम्मदाबादगोहना तहसील क्षेत्र के देवल मुनि की तपोभूमि देवलास पर प्राचीन काल से बालार्क रूप में स्थापित सूर्य मंदिर बगल स्थित स्थापित सूर्य कुंड शिव मंदिर आदि भक्तों के लिए आज भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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सूर्य मंदिर स्थित पवित्र सरोवर के जल को गंगा जल की तरह सहेज कर रखा जाता है। मान्यता है कि छठ पर्व के दिन सूर्य मंदिर सहित अन्य देवालयों में स्वर्ग लोक से देवता उतरते हैं। सरोवर में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसी मान्यता के तहत डाला छठ के अवसर पर हजारों महिलाएं रविवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्यदान करेंगी। जबकि सोमवार को उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्यदान कर व्रत का समापन करेंगी।
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भारत में तीन प्रमुख सूर्य मंंदिर हैं। जिसमें पहला बालार्क रूप मंदिर देवलास, दूसरा काशी में लोलार्क और तीसरा उड़ीसा में कोणार्क स्थापित है। देेेवलास तपोभूमि की विशेषता है कि प्राचीन तथा पौराणिक देवलास स्थल पर सूर्य मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, शंकर मंदिर, संतगणिनाथ मंदिर,हनुमान मंदिर, संत रविदास का मंदिर सूघर दास का मठ सहित 16से अधिक मंदिरों की स्थापना कराई गई है। बताया जाता है कि भगवान राम अपने गुरु विश्वामित्र जी के साथ ताड़का वध करने के लिए बक्सर जाते समय सूर्य देवता की उपासना करने के लिए रात्रि में विश्राम किया था और इसके साथ ही वहां पर स्नान कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया था। इसलिए माना जाता है कि इस सरोवर मेें स्नान कर लेने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। गंगा जल की तरह सरोवर के जल को लोग अपने घरों में रखते हैं। साथ ही यहां पूजा- अर्चन करने पर सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। इसी मान्यता के तहत आसपास सहित गैर जनपदों से हजारों व्रती महिलाएं रविवार को पौराणिक स्थल पर छठ पर्व के अवसर पर विधि विधान से पूजा-अर्चन कर देवलास मंदिर के तट पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्यदान करेंगी। जबकि सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्यदान कर व्रत का समापन करेंगी। यहां पर एक हफ्ते तक लगने वाले मेले की तैयारी अंतिम दौर में चल रही है।
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