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Mau News: बदलता रहा घोसी के वोटरों का मूड, सभी दलों को दिया मौका

Tue, 21 May 2024 01:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 May 2024 01:55 AM IST
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The mood of Ghosi's voters kept changing, all parties were given a chance
मऊ-मुहम्मदाबाद गोहना। पूर्वांचल की घोसी लोकसभा ऐसा क्षेत्र है जहां का वोटर सियासत में खूब दिलचस्पी रखता है। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दलों को बारी-बारी से मौका मिला है। 90 के दशक और इसके पूर्व यहां पर कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का दबदबा हुआ करता था लेकिन मंडल कमंडल के उभार और चुनाव में जातियों का मुद्दों हावी होने के बाद कांग्रेस की सियासत हाशिए पर चली गई। यहां अब मुख्य लड़ाई सपा, बसपा और भाजपा के बीच सिमट कर रह गई है। घोसी का मतदाता हर चुनाव में मूड बदलते रहे इसीलिए कभी सपा तो कभी बसपा और कभी भाजपा को जीता कर भेजा।
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2024 के चुनाव के लिए सभी प्रमुख दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। एनडीए गठबंधन में घोसी की सीट सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के हिस्से में गई है। यहां से पहली बार इस दल के अरविंद राजभर चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा सपा ने राजीव राय पर दांव लगाया है, तो बहुजन समाज पार्टी ने अपने पुराने सिपहसालार पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान को मैदान में उतारा है। पूर्वांचल के दिग्गज नेता कल्पनाथ राय की कर्मभूमि घोसी में कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीति अब इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गई है। विगत 25 सालों से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। चुनाव के पहले लंबे चौड़े वादे और विकास कार्यों की फेरहिस्त गिनाने वाले प्रत्याशियों को लेकर घोसी का मतदाता हमेशा सचेत रहा है। यही कारण है कि कसौटी पर खरा न उतरने वाले किसी भी दल को लगातार दो बार मौका नहीं दिया।
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1999 में लगातार जीत का सिलसिला टूटा

1999 में इस क्षेत्र में कांग्रेस की लगातार जीत का सिलसिला टूट गया। पहली बार बसपा ने जीत दर्ज की। अगले 2004 के चुनाव में मतदाताओं का मूड बदला, तो बसपा की जगह सपा को पहली बार संसद की दहलीज तक पहुंचने का मौका दिया। 2009 में एक बार फिर से घोसी के मतदाताओं ने मूड बदलते हुए सपा की जगह बसपा को समर्थन देकर संसद में भेजा।
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2014 में पहली बार भाजपा का खाता खुला

वर्ष 2014 में मतदाताओं की कसौटी पर खरा उतरने में नाकामयाब बहुजन समाज पार्टी को दरकिनार कर पहली बार भाजपा पर विश्वास जताया। लेकिन 2019 के चुनाव में एक बार फिर से मूड बदलते हुए सपा बसपा के गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी को संसद में पहुंचने का समर्थन दिया। 2024 चुनाव के लिए सपा, बसपा और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला होता दिख रहा है। देखना है कि इस बार घोसी के मतदाताओ का समर्थन किस पार्टी के साथ होगा।
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