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मास्टर प्लान से व्यवस्थित होगा शहर
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अमृत योजना के तहत मऊ शहर का चयन होने के बाद विकास में अवरोध बने मास्टर प्लान की सौगात दिसंबर 2022 तक मिल सकती है। सर्वे कर नए मास्टर प्लान को तैयार करने की जिम्मेदारी कोलकाता की एक कंपनी को सौंपी गई है। इतना ही नहीं नया फार्मेट भी जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। नए मास्टर प्लान के लागू होने के बाद शहर के विकास के साथ ही निर्माण कार्य भी व्यवस्थित तरीके से होगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय के प्रयास से 14 नवंबर 1989 को मऊ जिले का गठन हुआ, लेकिन कल्पनाथ राय के देहांत के बाद नगर से लेकर जिले तक का विकास अवरुद्ध हो गया। जिले का गठन होने के बाद से आनन फानन में एक काम चलाऊ मास्टर प्लान भी लागू किया गया। लेकिन सख्ती के साथ इस मास्टर प्लान पर अमल न होने से लोगों ने गैर प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी आवास से लेकर दुकान आदि का निर्माण कार्य कराया।
इस बीच 2016 में प्रशासन की तरफ से शहर में नए मास्टर प्लान लागू करने के लिए पत्राचार किया। इस बीच 2017 में मऊ नगर पालिका क्षेत्र का चयन अमृत योजना में हो गया। इसके बाद से अमृत योजना के तहत शहर का विकास करने के लिए नए तरीके से मास्टर प्लान को लागू किया जाना था। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते ब्रेक लग गया। कोरोना संक्रमण के सामान्य होने के बाद अब कोलकाता की कंपनी स्टेलिस्ट सिस्टम लिमिटेड को मऊ शहर का सर्वे कर मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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शहर को सुव्यवस्थित तरीके से बसाने में मिलेगी मदद
अमृत योजना के तहत शहर में नाली, नाला, सीवरेज से लेकर अन्य तरह के विकास का खाका जरूरत के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस योजना से शहर को सुव्यवस्थित तरीके से शहर को बसाने में भी मदद मिलेगी। इस मास्टर प्लान के आने के बाद से चिंह्ति एरिया में ही आवासीय और कामर्शियल क्षेत्र में दुकानों का निर्माण हो सकेगा। ग्रीन लैंड के साथ कृषि क्षेत्र में आवासीय निर्माण संभव नहीं होगा।
अभी तक मनमाने तरह से हुआ है शहर में निर्माण
मऊ शहर के विनियमित क्षेत्र में भले ही मास्टर प्लान लागू था, लेकिन निर्माण मनमाने तरीके से किया गया है। इसका परिणाम है कि मास्टर प्लान को ठेंगा दिखाते हुए तमसा नदी के तट तक मकान बना लिया गया है। भले ही वह ग्रीन लैंड रहा हो। मास्टर प्लान के जेई समीउल्लाह असगरी का कहना था कि उनके कार्यकाल में कही ग्रीन लैंड में निर्माण नहीं किया गया है। गलत नक्शा से मकान बनवाले वालों पर जुर्माना लगाया गया है। आगे भी मास्टर प्लान के नियम का पालन किया जाएगा।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय के प्रयास से 14 नवंबर 1989 को मऊ जिले का गठन हुआ, लेकिन कल्पनाथ राय के देहांत के बाद नगर से लेकर जिले तक का विकास अवरुद्ध हो गया। जिले का गठन होने के बाद से आनन फानन में एक काम चलाऊ मास्टर प्लान भी लागू किया गया। लेकिन सख्ती के साथ इस मास्टर प्लान पर अमल न होने से लोगों ने गैर प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी आवास से लेकर दुकान आदि का निर्माण कार्य कराया।
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इस बीच 2016 में प्रशासन की तरफ से शहर में नए मास्टर प्लान लागू करने के लिए पत्राचार किया। इस बीच 2017 में मऊ नगर पालिका क्षेत्र का चयन अमृत योजना में हो गया। इसके बाद से अमृत योजना के तहत शहर का विकास करने के लिए नए तरीके से मास्टर प्लान को लागू किया जाना था। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते ब्रेक लग गया। कोरोना संक्रमण के सामान्य होने के बाद अब कोलकाता की कंपनी स्टेलिस्ट सिस्टम लिमिटेड को मऊ शहर का सर्वे कर मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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शहर को सुव्यवस्थित तरीके से बसाने में मिलेगी मदद
अमृत योजना के तहत शहर में नाली, नाला, सीवरेज से लेकर अन्य तरह के विकास का खाका जरूरत के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस योजना से शहर को सुव्यवस्थित तरीके से शहर को बसाने में भी मदद मिलेगी। इस मास्टर प्लान के आने के बाद से चिंह्ति एरिया में ही आवासीय और कामर्शियल क्षेत्र में दुकानों का निर्माण हो सकेगा। ग्रीन लैंड के साथ कृषि क्षेत्र में आवासीय निर्माण संभव नहीं होगा।
अभी तक मनमाने तरह से हुआ है शहर में निर्माण
मऊ शहर के विनियमित क्षेत्र में भले ही मास्टर प्लान लागू था, लेकिन निर्माण मनमाने तरीके से किया गया है। इसका परिणाम है कि मास्टर प्लान को ठेंगा दिखाते हुए तमसा नदी के तट तक मकान बना लिया गया है। भले ही वह ग्रीन लैंड रहा हो। मास्टर प्लान के जेई समीउल्लाह असगरी का कहना था कि उनके कार्यकाल में कही ग्रीन लैंड में निर्माण नहीं किया गया है। गलत नक्शा से मकान बनवाले वालों पर जुर्माना लगाया गया है। आगे भी मास्टर प्लान के नियम का पालन किया जाएगा।