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युवाओं का बूढ़ा हो रहा दिल : 35-45 साल के लोगों की धमनियों में मिले 70 साल के बुजुर्गों जैसे गंभीर ब्लॉकेज
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मऊ। जिले के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के साथ बड़े निजी अस्पतालों में कम उम्र में हार्ट अटैक के मामलों ने चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज में बीते दो माह में 45 से अधिक हार्ट के मरीज कार्डियोलॉजी विभाग में पहुंचे हैं।
इसमें 40 फीसदी की उम्र 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं जो शारीरिक रूप से फिट दिखते हैं। जांच में सामने आया है कि इन युवाओं की धमनियों में 60 से 70 वर्ष के बुजुर्गों जैसे लंबे और गंभीर ब्लॉकेज मिल रहे हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में बीते दो माह में आए मरीजों पर उनकी टीम ने रिसर्च किया। केस स्टडी में युवाओं में हार्ट अटैक का पैटर्न पूरी तरह बदला होना मिला है।
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अभिनव पांडेय( 28) सीने में दर्द होने और गैस की समस्या लेकर आए थे। उनकी एंजियोग्राफी के दौरान नसों में 50 प्रतिशत तक लंबे ब्लॉकेज मिले। इसी तरह से एक अन्य मरीज निशांत कुमार (38)में 60 फीसदी नसों का ब्लॉकेज होना मिला। इन दो महीने में 45 से अधिक मरीज इस समस्या को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। इसमें 40 फीसदी की उम्र 35 से 45 वर्ष के बीच रही। चौंकाने वाली बात रही कि पहले युवाओं की केवल एक ही नस में छोटा-मोटा ब्लॉकेज मिलता था, वहीं अब कई युवाओं की नसों में 50, 80 और 90 प्रतिशत तक लंबे ब्लॉकेज व कैल्शियम जमा होने के मामले सामने आ रहे हैं।
कई मरीजों में तो ‘ट्रिपल वेसल’ (हृदय की तीनों मुख्य नसों में रुकावट) की स्थिति पाई गई, जो आमतौर पर 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में देखी जाती थी। जिला अस्पताल के आईसीयू इंचार्ज और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आईसीयू में बीते 60 दिन में 50 से अधिक मरीज पहुंचे थे, इसमें 40 फीसदी की उम्र 45 से कम थी।
इनमें से कई ऐसे थे जिनकी शारीरिक जांच में कोई बड़ी समस्या नहीं थी, लेकिन एंजियोग्राफी में उनकी नसों में गंभीर ब्लॉकेज पाए गए।
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इसमें 40 फीसदी की उम्र 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं जो शारीरिक रूप से फिट दिखते हैं। जांच में सामने आया है कि इन युवाओं की धमनियों में 60 से 70 वर्ष के बुजुर्गों जैसे लंबे और गंभीर ब्लॉकेज मिल रहे हैं।
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कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में बीते दो माह में आए मरीजों पर उनकी टीम ने रिसर्च किया। केस स्टडी में युवाओं में हार्ट अटैक का पैटर्न पूरी तरह बदला होना मिला है।
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अभिनव पांडेय( 28) सीने में दर्द होने और गैस की समस्या लेकर आए थे। उनकी एंजियोग्राफी के दौरान नसों में 50 प्रतिशत तक लंबे ब्लॉकेज मिले। इसी तरह से एक अन्य मरीज निशांत कुमार (38)में 60 फीसदी नसों का ब्लॉकेज होना मिला। इन दो महीने में 45 से अधिक मरीज इस समस्या को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। इसमें 40 फीसदी की उम्र 35 से 45 वर्ष के बीच रही। चौंकाने वाली बात रही कि पहले युवाओं की केवल एक ही नस में छोटा-मोटा ब्लॉकेज मिलता था, वहीं अब कई युवाओं की नसों में 50, 80 और 90 प्रतिशत तक लंबे ब्लॉकेज व कैल्शियम जमा होने के मामले सामने आ रहे हैं।
कई मरीजों में तो ‘ट्रिपल वेसल’ (हृदय की तीनों मुख्य नसों में रुकावट) की स्थिति पाई गई, जो आमतौर पर 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में देखी जाती थी। जिला अस्पताल के आईसीयू इंचार्ज और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आईसीयू में बीते 60 दिन में 50 से अधिक मरीज पहुंचे थे, इसमें 40 फीसदी की उम्र 45 से कम थी।
इनमें से कई ऐसे थे जिनकी शारीरिक जांच में कोई बड़ी समस्या नहीं थी, लेकिन एंजियोग्राफी में उनकी नसों में गंभीर ब्लॉकेज पाए गए।