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गौरैया के लिए सहेजे घोंसले
BEARU, AMAR UJALA, MAU
Updated Mon, 21 Mar 2016 12:09 AM IST
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दोहरीघाट थाने पर विश्व गौरेया दिवस पर पुलिसकर्मी को घोसला प्रदान करते क्षेत्रीय वनाधिकारी हरिलाल।
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एक महीने के प्रयास के बाद रविवार को विश्व गौरैया दिवस पर विभिन्न स्थानों पर गोष्ठी एवं जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्रों ने गौरैया को बचाने का संकल्प भी लिया। कई स्थानों पर लोगों को घोंसले भेंट कर गौरैया संरक्षण के लिए जागरूक किया गया।
एक महीने पूर्व ही वन विभाग के डीएफओ ने शासन के निर्देश पर 20 मार्च के लिए विश्व गौरैया दिवस संरक्षण के लिए मुहिम चलाई। उन्होंने विभिन्न संगठनों एवं लोगों से आर्थिक मदद दान में लेकर गौरैया के लिए घोंसले बनवाए। उसे लोगों में वितरित कराया। विभाग ने 1500 घोंसले बांटने का दावा किया।
साथ ही अन्य लोगों को प्रेरित कर ऐसे घोंसलों के क्रय विक्रय के लिए भी प्रेरित किया। पूरे एक महीने तक स्कूल, कालेज, सरकारी, अर्द्ध सरकारी कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर जन जागरूकता कार्यक्रम चलाकर इस पर छात्रों को लेख, भाषण, निबंध आदि लिखने के लिए भी प्रेरित किया।
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इसका परिणाम रहा कि अधिकांश लोग इस अभियान से जुड़े। जिन घरों में घोंसले लगाए गए थे, उन स्थानों पर गौरैया के जोड़ों ने अपना आशियाना भी बना लिया है। इसे देखकर लोग गौरैया का स्वागत भी कर रहे हैं। डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय का कहना है कि गौरैया संरक्षण को लेकर जिले में चलाया गया प्रयास सफल साबित हुआ।
लोगों को संरक्ष्ाण के प्रति जागरूक किया जा रहा, जिसका सकारात्मक परिणाम मिल रहा। इसमें विभागीय बजट के बिना भी लोगों के सहयोग से इस अभियान को व्यापक रूप से चलाया गया। इसमें सभी ने तन, मन, धन से सहयोग कर गौरैया के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
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एक महीने पूर्व ही वन विभाग के डीएफओ ने शासन के निर्देश पर 20 मार्च के लिए विश्व गौरैया दिवस संरक्षण के लिए मुहिम चलाई। उन्होंने विभिन्न संगठनों एवं लोगों से आर्थिक मदद दान में लेकर गौरैया के लिए घोंसले बनवाए। उसे लोगों में वितरित कराया। विभाग ने 1500 घोंसले बांटने का दावा किया।
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साथ ही अन्य लोगों को प्रेरित कर ऐसे घोंसलों के क्रय विक्रय के लिए भी प्रेरित किया। पूरे एक महीने तक स्कूल, कालेज, सरकारी, अर्द्ध सरकारी कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर जन जागरूकता कार्यक्रम चलाकर इस पर छात्रों को लेख, भाषण, निबंध आदि लिखने के लिए भी प्रेरित किया।
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इसका परिणाम रहा कि अधिकांश लोग इस अभियान से जुड़े। जिन घरों में घोंसले लगाए गए थे, उन स्थानों पर गौरैया के जोड़ों ने अपना आशियाना भी बना लिया है। इसे देखकर लोग गौरैया का स्वागत भी कर रहे हैं। डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय का कहना है कि गौरैया संरक्षण को लेकर जिले में चलाया गया प्रयास सफल साबित हुआ।
लोगों को संरक्ष्ाण के प्रति जागरूक किया जा रहा, जिसका सकारात्मक परिणाम मिल रहा। इसमें विभागीय बजट के बिना भी लोगों के सहयोग से इस अभियान को व्यापक रूप से चलाया गया। इसमें सभी ने तन, मन, धन से सहयोग कर गौरैया के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।