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Mau News: कहीं नाली टूटी तो कहीं मोटर खराब, हर साल लाखों खर्च, फिर भी किसान परेशान
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मऊ। नलकूप विभाग नाली, पाइपलाइन और मोटर मरम्मत के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च करता है। बावजूद किसानों की समस्या और शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। कहीं एक तो कहीं डेढ़ साल से नलकूप बंद हैं। अब से चार दशक पहले खेतों की सिंचाई के लिए सरकार ने नलकूप लगवाया। एक नलकूप से खेत तक पानी पहुंचाने के लिए चार दिशाओं में चार किमी लंबी नाली बनाई गई थी, जो अब घटकर 25 मीटर रह गई है। हालांकि सुविधा बढ़ाते हुए खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए एक-एक किमी तक अंडर ग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाती है।
मऊ जिले के दो खंड में 593 नलकूप चालू बताए जा रहे हैं। इनमें मऊ नलकूप खंड में 372 और बलिया जनपद के नगरा, रसड़ा और चिलकहर ब्लाॅक में 221 नलकूपों का संचालन भी मऊ नलकूप खंड से किया जाता है। इन नलकूपों से करीब 5026 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है।
नलकूप विभाग द्वारा मऊ खंड के नलकूपों की नालियों, पाइपलाइन और मोटर मरम्मत के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 91 लाख रुपये खर्च हुए, फिर भी समस्या बरकरार है।
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मुहम्मदाबाद गोहना तहसील मुख्यालय स्थित नलकूप विभाग के वर्कशॉप पर हर माह 18 से 20 फुंके मोटर पहुंच रहे हैं। नालियां टूटकर समतल हो चुकी हैं। 20 फीसदी नलकूपों से पानी ले जाने के लिए नाली और पाइपलाइन नहीं होने से 25 मीटर से अधिक दूरी वाले किसानों को फसल की सिंचाई करने में परेशानी होती है। 8 नलकूपों को चलाने की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर के भरोसे है। कोपागंज ब्लॉक के सरवा गांव में स्थित 100 जीजी नलकूप की नाली 7 साल पहले टूट गई थी। लेकिन अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। पानी स्टोर होने वाली टंकी भी चटक कर फट चुकी है, जिससे पानी का रिसाव होता है। यही कारण है नलकूप चालू नहीं होता है।
किसान पवन कुमार सिंह, कतवारू राजभर, संतलाल राजभर आदि ने बताया कि बीते डेढ़ साल से नलकूप विभाग में शिकायत दर्ज करा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। खेत तक पानी नहीं पहुंच पाने से नलकूप अनुपयोगी साबित हो रहा है। रतनपुरा ब्लॉक के पीपरसाथ, पहदेवाजीत, बीबीपुर, करऊत में लगे नलकूप काफी दिनों से बंद पड़े हैं। इटैली में मोटर तो ठीक है, लेकिन नाली कई जगहों से टूटी है, जिसके चलते पानी खेत तक नहीं पहुंच पाता है।
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मऊ जिले के दो खंड में 593 नलकूप चालू बताए जा रहे हैं। इनमें मऊ नलकूप खंड में 372 और बलिया जनपद के नगरा, रसड़ा और चिलकहर ब्लाॅक में 221 नलकूपों का संचालन भी मऊ नलकूप खंड से किया जाता है। इन नलकूपों से करीब 5026 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है।
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नलकूप विभाग द्वारा मऊ खंड के नलकूपों की नालियों, पाइपलाइन और मोटर मरम्मत के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 91 लाख रुपये खर्च हुए, फिर भी समस्या बरकरार है।
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मुहम्मदाबाद गोहना तहसील मुख्यालय स्थित नलकूप विभाग के वर्कशॉप पर हर माह 18 से 20 फुंके मोटर पहुंच रहे हैं। नालियां टूटकर समतल हो चुकी हैं। 20 फीसदी नलकूपों से पानी ले जाने के लिए नाली और पाइपलाइन नहीं होने से 25 मीटर से अधिक दूरी वाले किसानों को फसल की सिंचाई करने में परेशानी होती है। 8 नलकूपों को चलाने की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर के भरोसे है। कोपागंज ब्लॉक के सरवा गांव में स्थित 100 जीजी नलकूप की नाली 7 साल पहले टूट गई थी। लेकिन अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। पानी स्टोर होने वाली टंकी भी चटक कर फट चुकी है, जिससे पानी का रिसाव होता है। यही कारण है नलकूप चालू नहीं होता है।
किसान पवन कुमार सिंह, कतवारू राजभर, संतलाल राजभर आदि ने बताया कि बीते डेढ़ साल से नलकूप विभाग में शिकायत दर्ज करा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। खेत तक पानी नहीं पहुंच पाने से नलकूप अनुपयोगी साबित हो रहा है। रतनपुरा ब्लॉक के पीपरसाथ, पहदेवाजीत, बीबीपुर, करऊत में लगे नलकूप काफी दिनों से बंद पड़े हैं। इटैली में मोटर तो ठीक है, लेकिन नाली कई जगहों से टूटी है, जिसके चलते पानी खेत तक नहीं पहुंच पाता है।