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कई बार नतीजों को पलटते रहेे निर्दलीय

Thu, 23 Feb 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ Updated Thu, 23 Feb 2017 11:21 PM IST
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विधानसभा चुनावों में दिग्गजों के माननीय बनने की राह में एक तरफ जहां निर्दल प्रत्याशी रोड़ा साबित हुए हैं, तो वहीं कहीं-कहीं जीतने वाली पार्टी की चुनावी वैतरणी पार लगाने में अहम रोल भी निभाते रहे हैं। 2012 के चुनाव से लेकर 1989 तक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1993 के चुनाव को छोड़कर अन्य चुनावों के परिणामों में हार जीत का अंतर काफी काफी कम रहा है।
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 इसके विपरीत इन चुनावों में निर्दलियोें द्वारा प्राप्त मतों का आंकड़ा जीत के अंतर के मतों से इतना अधिक रहा है कि वह पराजित प्रत्याशियाें का खेल बिगाड़ने के लिए काफी रहा है। विधान सभा क्षेत्र के 2002 के चुनाव में जीत हार का अंतर आधा प्रतिशत के आसपास रहा तो वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल प्राप्त मतों का आंकड़ा 4 प्रतिशत से भी अधिक रहा। इसी प्रकार 2007 और 2012 के भी चुनावों में निर्दलियों द्वारा प्राप्त मतों को भी हार और जीत के लिए अहम माना जाता है।
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  1989 से 2012 के बीच हुए विधान सभा चुनाव में इस सीट पर हमेशा ही मुकाबला रोचक होता रहा है। 1989 में यहां से पहली बार जीते बसपा के फौजदार राम और कांग्रेस के श्यामलाल के बीच हुए मुकाबले में फौजदार प्रसाद को 31.09 प्रतिशत मत प्राप्त हुआ था, और उन्हें मात्र 2171 मतों से जीत हासिल हुई थी। लेकिन चुनाव में निर्दलियों को मिले मतों की संख्या 11320 थी।
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वर्ष 1991 के भी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी 5.68 प्रतिशत से चुनाव जीते, लेकिन इसके विपरीत निर्दलीय प्रत्याशियों ने सेंधमारी कर 14838 वोट प्राप्त किया। निर्दलियों को मिले इस वोट का प्रतिशत 18.87 रहा। 1996 में निर्दल भाजपा प्रत्याशी का खेल बनाया, तो बसपा के लिए अभिशाप साबित हुआ। भाजपा और बसपा प्रत्याशी की जीत में मात्र 2845 मतों का अंतर था, जो प्रतिशत में 2.01 है।


इस चुनाव में निर्दलियों ने 8566 वोट हासिल किया था। 2002 के चुनाव का मुकाबला सबसे रोचक रहा। सपा प्रत्याशी को मात्र .66 प्रतिशत, यानी मात्र 929 मतों से विजय हासिल हुई। जबकि दूसरी तरफ पांच निर्दलीय प्रत्याशियों को 4348 वोट मिले। 2007 के चुनाव में सबसे अधिक 15981 वोट प्राप्त कर कुल 9 निर्दलीय उम्मीदवारों ने बसपा की चुनावी वैतरणी पार लगाने में अहम भूमिका निभाई, यह सपा के लिए काफी भारी साबित हुआ। जबकि चुनाव में हार जीत में मात्र 3562 मतों का ही अंतर रहा।



इसी प्रकार 2012 के चुनाव का भी आंकड़ा रोचक रहा। सपा प्रत्याशी के जीत का अंतर मात्र 1.72 प्रतिशत यानी कुल 3139 मतों का रहा तो निर्दलीयों द्वारा कुल 9587 मत प्राप्त हुए। मौजूदा 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा, सपा और बसपा प्रत्याशी के अलावा पूर्वमंत्री और दो बार यहां से विधायक रह चुके फौजदार प्रसाद समेत 4 निर्दलीय चुनाव मैदान में है। इस बार भी रोचक मुकाबला होने की उम्मीद है। देखना है कि इस चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने में निर्दलीय कितना अहम रोल निभाएंगे।
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