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कुषाण और गुप्तकाल के अवशेष अंकित है मिले सिक्कों पर: डीएम
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ुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली क्षेत्र के माहपुर गढ़वा गाँव में मिट्टी की खोदाई के दौरान मिले तांबे क?
- फोटो : MAU
मऊ। मोहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के माहपुर गढवा गांव में मिले अवशेषों के साथ पुराने सिक्कों के बाद जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल ने प्रेसवार्ता में बताया कि बरामद हुए सिक्कों पर जो चिह्न अंकित हैं, उन्हें देखने से प्रथम दृष्टया लगता है कि ये कुषाण काल या फिर गुप्त काल के है। सिक्कों के साथ बर्तनों और मूर्तियों के अवशेष मिलने से तो यह स्पष्ट हो गया कि यहां कोई प्राचीन सभ्यता रही है। इसकी खोज करने के लिए उप्र के पुरातत्व निदेशालय से पत्राचार भी किया जा चुका है। यदि जांच में कुछ नया मिलता है तो निश्चित तौर पर मऊ जिले के साथ साथ पूर्वांचल के इतिहास के लिए यह नया अध्याय होगा।
अमित सिंह बंसल ने बताया कि जिस स्थान से यह बरामदगी हुई वह स्थान सरकारी अभिलेखों में भीटा के रूप में दर्ज है। इसका रकबा करीब साठ बीघे में है। मिले सिक्कों को सुनार की दुकान पर वजन कराया गया। इस दौरान पता चला कि सिक्कों का वजन करीब करीब डेढ़ ग्राम है, साथ ही 22 से 23 एमएक इसके डायमीटर है। बरामद सामानों की सूची तैयार कर उसे सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेजरी में रखवा दिया गया है।
जिलाधिकारी ने अपील किया कि यदि किसी के पास कोई अवशेष हो तो उसे वापस कर दें, क्योंकि यह संपत्ति प्रदेश सरकार की है। उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरा एरिया सील कर दिया गया है, फिर भी कोई व्यक्ति लालच में आकर वहां खुदाई का काम न करें, क्योंकि ऐसा करने से अवशेष क्षतिग्रस्त हो सकते है, पुरातत्व विभाग उसे अपने हिसाब से नियमानुसार साफ कर सभ्यताओं का पता लगाता है। बोले कि एक स्थान पर इतने सिक्कों का एक साथ मिलना दर्शाता है कि यहां कोई प्राचीन शहर रहा है, जहां व्यापार भी होता था। बोले बरामद प्रतिमाएं टेराकोट की निर्मित है। प्रतिमा को देखने से स्पष्ट होता है कि हनुमान जी की है। ऐसा ही बर्तनों के साथ है।
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अमित सिंह बंसल ने बताया कि जिस स्थान से यह बरामदगी हुई वह स्थान सरकारी अभिलेखों में भीटा के रूप में दर्ज है। इसका रकबा करीब साठ बीघे में है। मिले सिक्कों को सुनार की दुकान पर वजन कराया गया। इस दौरान पता चला कि सिक्कों का वजन करीब करीब डेढ़ ग्राम है, साथ ही 22 से 23 एमएक इसके डायमीटर है। बरामद सामानों की सूची तैयार कर उसे सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेजरी में रखवा दिया गया है।
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जिलाधिकारी ने अपील किया कि यदि किसी के पास कोई अवशेष हो तो उसे वापस कर दें, क्योंकि यह संपत्ति प्रदेश सरकार की है। उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरा एरिया सील कर दिया गया है, फिर भी कोई व्यक्ति लालच में आकर वहां खुदाई का काम न करें, क्योंकि ऐसा करने से अवशेष क्षतिग्रस्त हो सकते है, पुरातत्व विभाग उसे अपने हिसाब से नियमानुसार साफ कर सभ्यताओं का पता लगाता है। बोले कि एक स्थान पर इतने सिक्कों का एक साथ मिलना दर्शाता है कि यहां कोई प्राचीन शहर रहा है, जहां व्यापार भी होता था। बोले बरामद प्रतिमाएं टेराकोट की निर्मित है। प्रतिमा को देखने से स्पष्ट होता है कि हनुमान जी की है। ऐसा ही बर्तनों के साथ है।
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